सलूंबर में 'पंच गौरव' का शंखनाद: मक्का के जायके और आधुनिक खेती की तकनीक ने जीता आमजन का दिल
सलूंबर में आयोजित 'पंच गौरव' कार्यक्रम में कृषि विभाग ने 'एक जिला, एक उत्पाद' के तहत मक्का के विविध रूपों और आधुनिक कृषि तकनीकों का भव्य प्रदर्शन किया। इस लेख में मक्का के लजीज व्यंजनों से लेकर प्राकृतिक खेती के लाइव डेमो और सरकारी योजनाओं की पूरी जानकारी दी गई है, जिसमें विभाग के सभी वरिष्ठ अधिकारियों और विशेषज्ञों की सहभागिता शामिल है।

सलूंबर। राजस्थान के नवनियुक्त जिले सलूंबर के शैक्षणिक प्रांगण में आज 'पंच गौरव' कार्यक्रम के तहत कृषि और नवाचार का एक ऐसा अनूठा संगम देखने को मिला, जिसने क्षेत्र के किसानों और आम नागरिकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। जिला प्रशासन और कृषि विभाग के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस भव्य प्रदर्शनी में न केवल सलूंबर की माटी की पहचान 'मक्का' के विविध रूपों का प्रदर्शन किया गया, बल्कि भविष्य की 'प्राकृतिक खेती' का रोडमैप भी जनता के सामने रखा गया। कार्यक्रम का शुभारंभ होते ही कृषि विभाग की स्टाल पर उमड़ी भीड़ ने यह साबित कर दिया कि सलूंबर अब कृषि और तकनीकी विकास के नए सोपान चढ़ने को तैयार है।
'एक जिला, एक उत्पाद' (ODOP) योजना के अंतर्गत सलूंबर जिले के लिए चयनित मक्का की फसल इस प्रदर्शनी का मुख्य केंद्र रही। मक्का के पारंपरिक उपयोग से इतर इसके आधुनिक और लजीज व्यंजनों की एक विशाल श्रृंखला ने दर्शकों को हैरत में डाल दिया। स्टाल पर सजे क्रिस्पी कॉर्न, सैंडविच, पारंपरिक मक्का राबड़ी, मक्का भेल, पॉपकॉर्न, और गर्मागर्म मक्का की रोटी के साथ-साथ मक्का का पनिया, ढोकला, पकोड़े, कबाब और हलवा जैसे नवाचारी उत्पादों ने लोगों की स्वाद इंद्रियों को झंकृत कर दिया। इसके अतिरिक्त मक्का की टिकिया, स्वीट कॉर्न, दलिया और पापड़ के प्रदर्शन ने यह संदेश दिया कि मक्का केवल पशु आहार या साधारण भोजन नहीं, बल्कि एक बहुआयामी नकदी उत्पाद बन चुका है।
तकनीकी मोर्चे पर, कृषि विभाग ने 'राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन' के तहत रसायनों से मुक्त खेती का जीवंत प्रदर्शन किया। मौके पर 'प्रदान' संस्था के सहयोग से किसानों को बीजामृत, जीवामृत, मल्चिंग, अग्नि अस्त्र, ब्रह्मास्त्र और दशपर्णी अर्क बनाने की विधियों का लाइव डेमो दिया गया। उद्यान विभाग ने भी अपनी तकनीकी दक्षता का लोहा मनवाते हुए सोलर पंप, फवारा सिंचाई, रेनगन, स्प्रिंकलर और पॉलीहाउस जैसी योजनाओं का प्रदर्शन किया। आधुनिक कृषि उपकरणों जैसे थ्रेसर, बैंड फार्मर, डिस्कप्लू, रोटावेटर और कल्टीवेटर की प्रदर्शनी ने किसानों को कम लागत में अधिक उत्पादन की नई दिशा दिखाई।
संयुक्त निदेशक उद्यान पुरुषोत्तम लाल भट्ट ने कार्यक्रम की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए बताया कि यह प्रदर्शनी 17 और 18 जनवरी को विद्यालय प्रांगण में निरंतर जारी रहेगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस आयोजन का उद्देश्य केवल प्रदर्शन मात्र नहीं है, बल्कि मौके पर ही किसानों की समस्याओं का विभाग के अधिकारियों और फील्ड स्टाफ द्वारा त्वरित समाधान करना भी है। इस पूरे आयोजन को सफल बनाने में सहायक निदेशक कृषि गौस मोहम्मद, प्रवीण मराला, कृषि अधिकारी जयपाल यादव, सुरेश गहलोत, देवीलाल मीणा और राजेंद्र मेघवाल ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। साथ ही फील्ड कार्मिक संजय सेवक, खुशीराम मेहता, जितेंद्र सालवी, हरीश पटेल सहित प्रदान सेवा संस्था, मेवाड़ मशीनरी और भंडारी कृषि डिपो के प्रतिनिधियों की सक्रिय भागीदारी ने इस आयोजन को एक नई ऊँचाई प्रदान की। यह प्रदर्शनी सलूंबर के कृषि परिदृश्य में एक क्रांतिकारी बदलाव की ओर इशारा कर रही है।

Pratahkal Bureau
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