सलूंबर: लसाड़िया में शिक्षा सहयोगियों का महामंथन संपन्न, FLN प्रशिक्षण से बदलेगी शिक्षा की तस्वीर
सलूंबर जिले के लसाड़िया में शिक्षा सहयोगियों के तीन दिवसीय FLN प्रशिक्षण का भव्य समापन हुआ। राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय में आयोजित इस कार्यशाला में अमीन खान पठान, संतोष वैष्णव और नरेश चोबीसा जैसे विशेषज्ञों ने नवीन शिक्षण विधाओं और शाला दर्पण की जानकारी दी। जानिए कैसे यह प्रशिक्षण मां-बाड़ी केंद्रों की शिक्षा व्यवस्था में क्रांतिकारी बदलाव लाएगा।

लसाड़िया (सलूंबर)। शिक्षा की बुनियाद को मजबूत करने और नौनिहालों के भविष्य को नई दिशा देने के उद्देश्य से सलूंबर जिले के लसाड़िया ब्लॉक में आयोजित तीन दिवसीय विशेष प्रशिक्षण शिविर का भव्य समापन हुआ। राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय लसाड़िया के प्रांगण में आयोजित इस कार्यशाला ने क्षेत्र के शिक्षा सहयोगियों के लिए ज्ञान के नए द्वार खोल दिए हैं। इस तीन दिवसीय गहन प्रशिक्षण सत्र का मुख्य केंद्र 'बुनियादी साक्षरता और संख्यात्मकता' (FLN) रहा, जिसे आधुनिक शिक्षण पद्धतियों के साथ जोड़कर प्रस्तुत किया गया।
कार्यशाला के समापन समारोह में ब्लॉक सुपरवाइजर अमीन खान पठान, संतोष वैष्णव और राधेश्याम चौधरी ने अपनी गरिमामयी उपस्थिति दर्ज कराई। अतिथियों ने शिक्षा सहयोगियों को संबोधित करते हुए कहा कि बुनियादी शिक्षा ही वह आधारशिला है जिस पर राष्ट्र का भविष्य टिका है। इस प्रशिक्षण के दौरान लसाड़िया ब्लॉक के मां-बाड़ी केंद्रों पर कार्यरत शिक्षा सहयोगियों को अंग्रेजी भाषा की बारीकियां, गणित के जटिल सूत्रों को सरल बनाना, हिंदी व्याकरण का शुद्ध बोध और पर्यावरण के प्रति संवेदनशीलता जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से प्रशिक्षित किया गया। इतना ही नहीं, वर्तमान डिजिटल युग की मांग को देखते हुए सभी प्रतिभागियों को 'शाला दर्पण' पोर्टल के संचालन और उसकी बारीकियों के बारे में भी गहन जानकारी दी गई।
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता और दक्ष प्रशिक्षक नरेश चोबीसा ने नवीन शिक्षण विधाओं का प्रदर्शन करते हुए राष्ट्रीय शिक्षा नीति के विभिन्न आयामों पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि किस तरह खेल-खेल में और रचनात्मक गतिविधियों के माध्यम से बच्चों को कठिन से कठिन विषय समझाए जा सकते हैं। प्रशिक्षण के दौरान इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति के लक्ष्यों को धरातल पर उतारने के लिए शिक्षा सहयोगियों की भूमिका सबसे अहम है।
समापन के अवसर पर वक्ताओं ने इस बात को रेखांकित किया कि यह मात्र एक प्रशिक्षण नहीं, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने का एक महाभियान है। तीन दिनों तक चले इस बौद्धिक मंथन के बाद, अब ये शिक्षा सहयोगी नई ऊर्जा और आधुनिक तकनीकों के साथ मां-बाड़ी केंद्रों पर बच्चों का भविष्य संवारने के लिए तैयार हैं। इस कार्यशाला की सफलता ने लसाड़िया क्षेत्र में शैक्षिक नवाचार की एक नई लहर पैदा कर दी है, जिसका सीधा लाभ आने वाले समय में यहां के विद्यार्थियों को मिलेगा।

Pratahkal Bureau
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