सलूम्बर। राजस्थान के नवगठित सलूम्बर जिले के लसाडिया उपखण्ड में शिक्षा व्यवस्था को लेकर ग्रामीणों का आक्रोश सातवें आसमान पर पहुंच गया है। ग्राम पंचायत टटाकिया के अंतर्गत आने वाले राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय रेलमहुडी में शिक्षकों की कमी और लंबे समय से चल रही प्रतिनियुक्ति के खेल ने अब एक बड़े आंदोलन का रूप ले लिया है। गणतंत्र दिवस के पावन अवसर पर जहां देश उत्सव मना रहा था, वहीं रेलमहुडी के ग्रामीणों ने विद्यालय की बदहाली और बच्चों के भविष्य से हो रहे खिलवाड़ को लेकर हुंकार भरी है। ग्रामीणों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगें पूरी नहीं हुईं तो वे न केवल विद्यालय पर तालाबंदी करेंगे, बल्कि उग्र धरना प्रदर्शन को भी मजबूर होंगे।

घटनाक्रम के अनुसार, 26 जनवरी को विद्यालय परिसर में आयोजित एसएमसी (SMC) और एसडीएनसी (SDNC) की बैठक संख्या 24 में ग्रामीणों और विद्यालय प्रबंधन समिति के सदस्यों ने एक सुर में स्थानीय शिक्षिका श्रीमती वंदना सुधार की प्रतिनियुक्ति का विरोध किया। बताया गया कि श्रीमती वंदना सुधार को स्थानीय विद्यालय से हटाकर राजकीय प्राथमिक विद्यालय टीमरु फला घाटा में प्रतिनियुक्ति पर लगा दिया गया है, जिससे रेलमहुडी स्कूल में शिक्षण कार्य पूरी तरह प्रभावित हो रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि महत्वपूर्ण पदों पर बैठे कार्मिकों को अन्यत्र भेजने से स्थानीय बच्चों की पढ़ाई का भारी नुकसान हो रहा है, जिसे अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

इसी संदर्भ में आक्रोशित ग्रामीणों के एक प्रतिनिधिमंडल ने मुख्य ब्लॉक शिक्षा अधिकारी (CBEO), समग्र शिक्षा लसाडिया को एक औपचारिक ज्ञापन सौंपा। इस ज्ञापन के माध्यम से प्रशासन को अवगत कराया गया है कि यदि उक्त कार्मिक की प्रतिनियुक्ति तत्काल प्रभाव से निरस्त कर उन्हें पुनः मूल विद्यालय में पदस्थापित नहीं किया गया, तो समस्त ग्रामवासी विद्यालय बंद कर अनिश्चितकालीन धरने पर बैठ जाएंगे। ज्ञापन में दो टूक शब्दों में कहा गया है कि आंदोलन के दौरान होने वाली किसी भी अप्रिय स्थिति या कानून व्यवस्था की जिम्मेदारी सीधे तौर पर प्रशासन की होगी।

इस विरोध प्रदर्शन और ज्ञापन सौंपने के दौरान एसएमसी अध्यक्ष हरिश कुमार मीणा के नेतृत्व में बड़ी संख्या में ग्रामीण एकजुट नजर आए। मौके पर देवा, भगा, सुरेश, वर्दीचंद मीणा, शंकर और प्रकाश सहित ग्राम पंचायत टटाकिया के कई गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। ग्रामीणों की इस एकजुटता ने शिक्षा विभाग के गलियारों में हलचल पैदा कर दी है। अब देखना यह होगा कि प्रशासन बच्चों के शैक्षणिक हित को ध्यान में रखते हुए इस प्रतिनियुक्ति को रद्द करता है या क्षेत्र में तनाव की स्थिति बनी रहती है।

Pratahkal Bureau

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