सलूम्बर। सराड़ा क्षेत्र के खड़ेदखेतड़ी खाटी में वन विभाग को 39 दिन बाद बड़ी सफलता मिली, जहां शुक्रवार सुबह करीब 4 बजे पिंजरे में एक नर पैंथर कैद हो गया। करीब दो साल उम्र के इस पैंथर की लगातार आवाजाही से आसपास के ग्रामीण लंबे समय से भयभीत थे। पैंथर के पकड़े जाने के बाद ग्रामीणों ने राहत की सांस ली, वहीं वन विभाग ने भी अभियान में सफलता मिलने पर राहत महसूस की।

जानकारी के अनुसार, सराड़ा क्षेत्र के धूरा, डिंगड़ी, बरैला, पलोड़ड़ा, डाया और बाध क्षेत्र के आसपास लंबे समय से पैंथर की गतिविधियां सामने आ रही थीं। जंगल और आबादी के नजदीक पैंथर की लगातार आवाजाही से ग्रामीणों में भय का माहौल बना हुआ था। ग्रामीणों के अनुसार, क्षेत्र में पैंथर की गतिविधियों के चलते करीब 10 शिकार किए जाने की सूचनाएं सामने आई थीं। इन घटनाओं की जानकारी से लोगों की चिंता बढ़ गई थी। ग्रामीणों को खेतों और आसपास के इलाकों में आवाजाही के दौरान सतर्क रहना पड़ रहा था।

पैंथर की लगातार गतिविधियों को देखते हुए वन विभाग ने पलोड़ड़ा रेंज के पैंथर नाका क्षेत्र के अंतर्गत खड़ेदखेतड़ी खाटी में पिंजरा लगाया था। इसके बाद से विभाग की ओर से निगरानी की जा रही थी। शुक्रवार सुबह करीब 4 बजे नर पैंथर पिंजरे में कैद हो गया। पैंथर को पकड़ने के लिए लगाए गए पिंजरे में 39 दिन बाद सफलता मिलने से वन विभाग को राहत मिली।

धूरा, डिंगड़ी, बरैला, पलोड़ड़ा, डाया और बाध क्षेत्र के आसपास पैंथर की आवाजाही की लगातार सूचनाओं के कारण ग्रामीणों में डर बना हुआ था। खासकर जंगल से सटे इलाकों में रहने वाले लोग पैंथर की मौजूदगी को लेकर चिंतित थे। ग्रामीणों का कहना था कि लगातार पैंथर दिखाई देने और शिकार की घटनाओं की सूचनाओं के चलते क्षेत्र में असुरक्षा का माहौल बना हुआ था। ऐसे में पैंथर के पकड़े जाने से लोगों को बड़ी राहत मिली है।

पिंजरे में कैद नर पैंथर की उम्र करीब दो साल बताई जा रही है। लंबे समय से पैंथर की गतिविधियों से परेशान ग्रामीणों के लिए 39 दिन बाद मिली यह सफलता राहत लेकर आई है। अब क्षेत्रवासियों की नजर वन विभाग की आगामी कार्रवाई पर है।

Kalpita Bhavsar (Salumber)

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कलपिता भवसार (सालुम्बर) प्रात:काल न्यूज़ की प्रतिष्ठित रिपोर्टर हैं, जिनका पत्रकारिता में अनुभव और निपुणता उन्हें क्षेत्रीय और राष्ट्रीय खबरों की सटीक और निष्पक्ष कवरेज प्रदान करने में सक्षम बनाती है। सालुम्बर से होने के नाते, वे स्थानीय मुद्दों, सामाजिक घटनाओं और जनसामान्य की आवाज़ को प्रभावी ढंग से पाठकों तक पहुंचाने का काम करती हैं। उनका लेखन तथ्यात्मक, स्पष्ट और प्रभावशाली है, जो पाठकों को खबरों के मूल अर्थ तक सीधे जोड़ता है।

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