सलूम्बर के सैरिंग तालाब में जिंडों की अवैध निकासी का आरोप, नगर परिषद कर्मचारी पर मिलीभगत के गंभीर दावे
सलूम्बर के ऐतिहासिक सैरिंग तालाब में बिना टेंडर जिंडों की कथित अवैध निकासी और नगर परिषद के एक कर्मचारी पर मिलीभगत के आरोपों ने नया विवाद खड़ा कर दिया है। मीडिया के सामने सामने आए दावों के बाद नवनियुक्त आयुक्त अभिषेक शर्मा ने मामले की जांच और दोषियों पर सख्त कार्रवाई का आश्वासन दिया है।

तस्वीर में पुलिस अधिकारी सड़क के किनारे कुछ लोगों से पूछताछ करते हुए दिखाई दे रहे हैं।
सलूम्बर के ऐतिहासिक सैरिंग तालाब में जिंडों (कमल के फल) और कमल की खेती को लेकर गंभीर अनियमितताओं के आरोप सामने आए हैं। आरोप है कि जिस तालाब से हर वर्ष नगर परिषद को जिंडों और कमल की खेती के ठेके के माध्यम से लाखों रुपये का राजस्व प्राप्त होता था, उसी तालाब से इस बार बिना ठेका प्रक्रिया के अवैध रूप से जिंडे निकलवाए जा रहे हैं। आरोप यह भी है कि इस पूरे मामले में नगर परिषद का एक कर्मचारी आर्थिक लाभ उठा रहा है।
जानकारी के अनुसार, प्रत्येक वर्ष सैरिंग तालाब में उगने वाले जिंडों और कमल की खेती के लिए नियमानुसार नगर परिषद की ओर से सरकारी टेंडर जारी किए जाते थे। ठेकेदार ऊंची बोली लगाकर ठेका प्राप्त करता था, जिससे नगर परिषद के खाते में लाखों रुपये का राजस्व जमा होता था। लेकिन इस बार नगर परिषद के प्रशासनिक काल के चलते टेंडर प्रक्रिया ही नहीं कराई गई।
आरोप है कि टेंडर नहीं होने की स्थिति में तालाब की सरकारी निगरानी होनी चाहिए थी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। सूत्रों के अनुसार, नगर परिषद के एक कर्मचारी ने भील समाज के कुछ लोगों के साथ कथित रूप से साठगांठ कर तालाब से जिंडों की निकासी शुरू करवा दी।
सूत्रों का दावा है कि तालाब से प्रतिदिन लगभग 20 से 25 किलो तक ताजे और कीमती जिंडे अवैध रूप से निकाले जा रहे हैं। इन्हें बाजार में कम कीमत पर बेचकर प्रतिदिन हजारों रुपये की कमाई की जा रही है।
मामले की जानकारी मिलने पर मीडिया की टीम सैरिंग तालाब स्थित पंचमुखी हनुमान मंदिर के पास पहुंची। वहां कुछ लोग दिनदहाड़े तालाब में उतरकर जिंडे निकालते दिखाई दिए। मीडिया द्वारा कैमरे के सामने पूछताछ किए जाने पर जिंडे निकाल रहे लोगों ने कहा कि वे नगर परिषद के एक कर्मचारी के कहने पर यह कार्य कर रहे हैं।
उनका कहना था कि वर्तमान में किसी के नाम पर कोई ठेका नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि कमाई का आधा हिस्सा संबंधित कर्मचारी को दिया जाता है, जबकि शेष आधा हिस्सा बाजार में बिक्री के बाद आपस में बांट लिया जाता है।
इस पूरे मामले को लेकर नगर परिषद के नवनियुक्त आयुक्त अभिषेक शर्मा से सवाल किए गए। उन्होंने कहा, “मैंने नगर परिषद आयुक्त का चार्ज कल ही संभाला है। यह मामला अभी मेरे संज्ञान में आया है। मैं तुरंत इस पूरे मामले की विस्तृत जानकारी जुटा रहा हूँ। सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वाले और इस अवैध खेल में शामिल संबंधित कर्मचारी व अन्य लोगों के विरुद्ध सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।”
मामले के सामने आने के बाद कई सवाल भी उठ रहे हैं। सवाल किया जा रहा है कि आखिर इस वर्ष समय पर टेंडर क्यों जारी नहीं किए गए। यह भी पूछा जा रहा है कि क्या टेंडर प्रक्रिया में हुई देरी जानबूझकर की गई थी। वहीं, जब जिंडे निकाल रहे लोग नगर परिषद के कर्मचारी का नाम ले रहे हैं, तो संबंधित कर्मचारी के विरुद्ध कार्रवाई कब होगी। साथ ही यह भी प्रश्न उठ रहा है कि प्रशासक काल में नगर परिषद को हुए कथित लाखों रुपये के वित्तीय नुकसान की भरपाई किससे की जाएगी।

Kalpita Bhavsar (Salumber)
कलपिता भवसार (सालुम्बर) प्रात:काल न्यूज़ की प्रतिष्ठित रिपोर्टर हैं, जिनका पत्रकारिता में अनुभव और निपुणता उन्हें क्षेत्रीय और राष्ट्रीय खबरों की सटीक और निष्पक्ष कवरेज प्रदान करने में सक्षम बनाती है। सालुम्बर से होने के नाते, वे स्थानीय मुद्दों, सामाजिक घटनाओं और जनसामान्य की आवाज़ को प्रभावी ढंग से पाठकों तक पहुंचाने का काम करती हैं। उनका लेखन तथ्यात्मक, स्पष्ट और प्रभावशाली है, जो पाठकों को खबरों के मूल अर्थ तक सीधे जोड़ता है।
