सराड़ा-सलूम्बर में जल संचयन परियोजनाओं को रफ्तार, 327 हेक्टेयर भूमि को सिंचाई लाभ
सलूम्बर के सराड़ा क्षेत्र में ₹56.41 लाख की सोलर माइक्रो इरिगेशन योजना से 327 हेक्टेयर कृषि भूमि को सिंचाई लाभ मिलेगा। मुलेश्वर, लिमजिया पंडेर और गींगला एनीकट परियोजनाओं पर भी काम जारी है।

सलूम्बर, 26 सितम्बर। नवसृजित सलूम्बर जिले के आदिवासी बहुल सराड़ा-सलूम्बर क्षेत्र में जल सुरक्षा, सिंचाई सुविधा और कृषि विकास के लिए जल संवर्धन एवं सिंचाई परियोजनाओं पर तेजी से कार्य चल रहा है। क्षेत्र में सोलर आधारित माइक्रो इरिगेशन के साथ चार एनीकट परियोजनाओं का निर्माण प्रगतिरत है। परियोजनाओं के पूर्ण होने से हजारों ग्रामीण परिवारों, विशेषकर सीमांत एवं लघु कृषकों को सिंचाई के लिए अतिरिक्त जल उपलब्ध होगा।
पर्यावरण-अनुकूल ऊर्जा को बढ़ावा देने के उद्देश्य से ₹56.41 लाख की स्वीकृत लागत से सोलर आधारित माइक्रो इरिगेशन योजना पर कार्य किया जा रहा है। इसके तहत देवेंद्र एनीकट से बंजारिया तालाब, भोराव तालाब, हासोला तालाब सहित अन्य जल स्रोतों को सोलर प्रणाली आधारित माइक्रो इरिगेशन से जोड़ा जा रहा है। गामदरा, घाटकोन एवं बेड़ा का नाका में तीन नए एनीकट का निर्माण कर सोलर आधारित माइक्रो इरिगेशन प्रणाली भी स्थापित की जा रही है।
योजना के तहत 33,274 मीटर पाइपलाइन सप्लाई का कार्य 100 प्रतिशत पूरा हो चुका है। एनीकट निर्माण भी पूरा हो गया है, जबकि इनटेक वेल, पंप हाउस एवं पाइपलाइन बिछाने का कार्य करीब 90 प्रतिशत पूरा किया जा चुका है। योजना से खरबर, निम्बोदा, सराड़ा, नीमच, सेपुर, वैरी, गामदारा, खेड़ा घाटी, राजनगर, गंगानगर, कुवेदिया, बूदरा, डोमारफला, बलीचा, नलफला एवं खेरवान सहित क्षेत्र के विभिन्न गांवों में 327 हेक्टेयर कृषि भूमि को सीधा सिंचाई लाभ मिलेगा।
गोमती नदी पर ग्राम सेपुर (मल्लाड़ा) के समीप मुलेश्वर एनीकट का निर्माण भी बजट घोषणा के तहत तेजी से प्रगति पर है। वर्तमान में नींव खुदाई एवं कंक्रीटिंग का कार्य जारी है। एनीकट की 14.47 एमसीएफटी भराव क्षमता होगी। कार्य को निर्धारित समय जून 2027 से पूर्व पूरा करवाने के प्रयास किए जा रहे हैं।
मुलेश्वर महादेव मंदिर क्षेत्र का प्रमुख धार्मिक एवं ग्रामीण पर्यटन स्थल है। एनीकट बनने से क्षेत्र में जल उपलब्धता बढ़ने के साथ भूजल स्तर में सुधार, आसपास के क्षेत्र में हरियाली एवं चरागाह विकास को बढ़ावा मिलेगा। इससे स्थानीय गौशाला के संचालन में भी सहयोग मिलने की उम्मीद है। महाशिवरात्रि एवं श्रावण मास में मंदिर आने वाले श्रद्धालुओं को भी बेहतर सुविधाएं मिल सकेंगी।
जल संवर्धन एवं सिंचाई सुविधाओं के विस्तार की इसी कड़ी में सलूम्बर क्षेत्र में लिमजिया पंडेर एनीकट की 11.55 एमसीएफटी तथा गींगला एनीकट की 7 एमसीएफटी क्षमता वाली परियोजनाओं पर भी कार्य प्रगतिरत है।
इन परियोजनाओं के पूर्ण होने से क्षेत्र में जल संग्रहण क्षमता बढ़ेगी और सिंचाई सुविधा का विस्तार होगा। इससे किसानों को वर्षा आधारित कृषि पर निर्भरता कम करने में मदद मिलेगी। जल उपलब्धता बढ़ने से कृषि उत्पादन, पशुपालन एवं स्थानीय आजीविका गतिविधियों को भी गति मिलने की संभावना है।

Kalpita Bhavsar (Salumber)
कलपिता भवसार (सालुम्बर) प्रात:काल न्यूज़ की प्रतिष्ठित रिपोर्टर हैं, जिनका पत्रकारिता में अनुभव और निपुणता उन्हें क्षेत्रीय और राष्ट्रीय खबरों की सटीक और निष्पक्ष कवरेज प्रदान करने में सक्षम बनाती है। सालुम्बर से होने के नाते, वे स्थानीय मुद्दों, सामाजिक घटनाओं और जनसामान्य की आवाज़ को प्रभावी ढंग से पाठकों तक पहुंचाने का काम करती हैं। उनका लेखन तथ्यात्मक, स्पष्ट और प्रभावशाली है, जो पाठकों को खबरों के मूल अर्थ तक सीधे जोड़ता है।
