सलूंबर के 50 किसान बांस की आधुनिक खेती सीखने रवाना, उदयपुर-सिरोही में मिलेगा वैज्ञानिक प्रशिक्षण
सलूंबर के 50 किसान बांस की आधुनिक खेती के प्रशिक्षण के लिए उदयपुर, कोटड़ा और सिरोही रवाना हुए। जानिए इस अध्ययन भ्रमण में उन्हें क्या-क्या सीखने को मिलेगा।

तस्वीर में 'ग्रामीण सेवा शिविर' के दौरान मंच पर मौजूद अधिकारी और अतिथि एक किसान को दस्तावेज सौंपते हुए नजर आ रहे हैं।
जिले के विभिन्न विकासखंडों से चयनित 50 किसानों का दल बांस की खेती के प्रशिक्षण एवं अंतरजिला अध्ययन भ्रमण के लिए रवाना हुआ। तीन से चार दिवसीय इस प्रशिक्षण एवं भ्रमण कार्यक्रम के दौरान किसान उदयपुर, कोटड़ा और सिरोही जिले के स्वरूपगंज सहित विभिन्न स्थानों का भ्रमण कर बांस उत्पादन एवं प्रबंधन की आधुनिक तकनीकों की जानकारी प्राप्त करेंगे।
प्रशिक्षण के प्रथम चरण में कृषक दल बेड़वाल स्थित वन विभाग की नर्सरी का अवलोकन करेगा, जहां किसानों को बांस की विभिन्न प्रजातियों, रोपण विधि, प्रवर्धन तकनीक तथा विकसित बांस प्लांटेशन की विस्तृत जानकारी दी जाएगी। इसके बाद महाराणा प्रताप कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, उदयपुर के कृषि प्रसार शिक्षा निदेशालय में विशेषज्ञ किसानों को बांस की वैज्ञानिक खेती से जुड़े तकनीकी पहलुओं का प्रशिक्षण देंगे।
भ्रमण कार्यक्रम के अगले चरण में किसान कोटड़ा क्षेत्र के खोखरिया स्थित बांस की नर्सरी एवं प्लांटेशन का अवलोकन करेंगे। इसके साथ ही जिला सिरोही के स्वरूपगंज स्थित बांस डिपो का भी निरीक्षण किया जाएगा। इस दौरान किसानों को बांस की विभिन्न प्रजातियों, रोपण तकनीक, रखरखाव, प्रसंस्करण, मूल्य संवर्धन, विपणन तथा इससे होने वाले आर्थिक लाभ के संबंध में व्यावहारिक जानकारी उपलब्ध कराई जाएगी।
उपनिदेशक उद्यान श्री पुरुषोत्तम लाल भट्ट ने बताया कि सलूंबर जिले का बड़ा भाग वनाच्छादित एवं पहाड़ी क्षेत्र है। ऐसे में खेतों की मेड़ों, जलभराव वाले क्षेत्रों तथा अनुपयोगी एवं दलदली भूमि पर बांस की खेती कर भूमि का बेहतर उपयोग किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि बांस के विक्रय से किसानों को अतिरिक्त एवं स्थायी आय का अच्छा स्रोत प्राप्त हो सकता है।
उन्होंने बताया कि वर्तमान समय में बांस की मांग लगातार बढ़ रही है। बांस से हस्तशिल्प सामग्री, बास्केट, फर्नीचर, टाइल्स और टेक्सटाइल उत्पाद सहित अनेक मूल्यवर्धित उत्पाद तैयार किए जाते हैं। दैनिक जीवन में जन्म से लेकर जीवन के विभिन्न चरणों तक बांस का व्यापक उपयोग होता है। उन्होंने जिले के इच्छुक किसानों से बांस की खेती अपनाने तथा अधिक जानकारी के लिए उद्यान विभाग से संपर्क करने का आग्रह किया। यह प्रशिक्षण एवं अध्ययन भ्रमण कार्यक्रम किसानों को आधुनिक तकनीकों से जोड़ने के साथ बांस आधारित आय के नए अवसरों से भी परिचित कराएगा।

Kalpita Bhavsar (Salumber)
कलपिता भवसार (सालुम्बर) प्रात:काल न्यूज़ की प्रतिष्ठित रिपोर्टर हैं, जिनका पत्रकारिता में अनुभव और निपुणता उन्हें क्षेत्रीय और राष्ट्रीय खबरों की सटीक और निष्पक्ष कवरेज प्रदान करने में सक्षम बनाती है। सालुम्बर से होने के नाते, वे स्थानीय मुद्दों, सामाजिक घटनाओं और जनसामान्य की आवाज़ को प्रभावी ढंग से पाठकों तक पहुंचाने का काम करती हैं। उनका लेखन तथ्यात्मक, स्पष्ट और प्रभावशाली है, जो पाठकों को खबरों के मूल अर्थ तक सीधे जोड़ता है।
