शिक्षक सिर्फ पाठ नहीं पढ़ाता, समाज की दिशा भी तय करता है, सलूम्बर सम्मेलन में मंथन
सलूम्बर के शैक्षिक सम्मेलन में शिक्षक की सामाजिक भूमिका, संस्कारयुक्त शिक्षा और संगठन की मजबूती पर मंथन हुआ।

तस्वीर में मंच पर बैठे हुए अतिथि और पदाधिकारी नजर आ रहे हैं।
शिक्षक के हाथ में केवल किताब और चॉक नहीं होती, बल्कि वह आने वाली पीढ़ी के संस्कार, चरित्र और समाज की दिशा गढ़ने की जिम्मेदारी भी संभालता है। विद्यालय में शिक्षक का आचरण विद्यार्थियों के लिए सबसे बड़ा पाठ होता है। इसी विचार के साथ अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ राजस्थान (विद्यालय शिक्षा), जिला सलूम्बर के दो दिवसीय जिला शैक्षिक सम्मेलन के दूसरे दिन शिक्षा के साथ शिक्षक की सामाजिक भूमिका और संगठन की मजबूती को लेकर मंथन हुआ।
विद्यानिकेतन माध्यमिक विद्यालय, प्रताप चौराहा सलूम्बर में आयोजित द्वितीय दिवस के कार्यक्रम में जिलेभर से शिक्षक पदाधिकारी एवं सदस्य जुटे। सम्मेलन के प्रथम सत्र में जिला कार्यकारिणी, खंड कार्यकारिणी तथा संकुल संयोजक-सहसंयोजकों की बैठक हुई। इसमें खंड स्तर पर संगठन के खाते एवं उपयोग, आगामी लोक मंथन यात्रा, महिला संवर्ग की बैठक तथा प्रदेश सम्मेलन सहित विभिन्न संगठनात्मक विषयों पर चर्चा की गई।
समापन सत्र को संबोधित करते हुए जिलाध्यक्ष हिमांशु भट्ट ने “शिक्षा, प्रार्थना सभा एवं समाज में शिक्षकों की भूमिका” विषय पर विचार रखे। उन्होंने कहा कि शिक्षक का कार्य केवल पाठ्यक्रम पूरा कराना नहीं है, बल्कि वह विद्यार्थी के व्यक्तित्व, संस्कार और चरित्र निर्माण की नींव रखता है।
हिमांशु भट्ट ने कहा कि विद्यालय की प्रार्थना सभा महज रोजमर्रा की औपचारिकता नहीं, बल्कि विद्यार्थियों में अनुशासन, राष्ट्रभाव, संस्कार, आत्मविश्वास और सामाजिक चेतना विकसित करने का महत्वपूर्ण माध्यम है। शिक्षक अपने आचरण एवं व्यवहार से विद्यार्थियों के साथ-साथ समाज को भी दिशा देता है।
उन्होंने कहा, “विद्यालय ही गुरु की वास्तविक पहचान है, उसकी गरिमा और मर्यादा को बनाए रखना प्रत्येक शिक्षक का दायित्व है।” भट्ट ने शिक्षकों से अपने आचरण को आदर्श बनाते हुए शिक्षा के माध्यम से समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने का आह्वान किया।
विभाग संगठन मंत्री देवीलाल पटेल ने शिक्षक संगठन की भूमिका और आवश्यकता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि संगठन शिक्षकों को एक साझा मंच प्रदान करता है। उन्होंने संगठन की गतिविधियों और शिक्षक हितों से जुड़े विषयों पर सामूहिक रूप से कार्य करने की आवश्यकता बताई।
जिला संगठन मंत्री फणीन्द्र गर्ग ने संगठनात्मक एकता, सामाजिक सरोकार और शैक्षिक मूल्यों के प्रति प्रतिबद्धता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि संगठन की रीति-नीति एवं मर्यादा का अक्षरशः पालन करते हुए शिक्षक समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करें।
सम्मेलन में सलूम्बर, झल्लारा, जयसमन्द, सेमारी, लसाड़िया एवं सराड़ा खंडों के अध्यक्ष, मंत्री, कोषाध्यक्ष सहित जिला एवं खंड कार्यकारिणी के पदाधिकारी और सैकड़ों शिक्षक सदस्य उपस्थित रहे। सम्मेलन में शिक्षा की गुणवत्ता, शिक्षक की सामाजिक भूमिका, संस्कारयुक्त शिक्षा, संगठनात्मक मजबूती तथा राष्ट्र निर्माण में शिक्षक की भूमिका जैसे विषयों पर विचार-विमर्श हुआ।
वक्ताओं ने कहा कि बदलते समय में शिक्षक की जिम्मेदारी और भी व्यापक हुई है। शिक्षक को विद्यार्थियों को विषय ज्ञान के साथ जीवन मूल्यों, अनुशासन और सामाजिक जिम्मेदारी से जोड़ना होगा।
कार्यक्रम के अंत में सम्मेलन को सफल बनाने में सहयोग देने वाले शिक्षक बंधुओं, कार्यकर्ताओं एवं पदाधिकारियों का आभार व्यक्त किया गया। महिला जिला संगठन मंत्री ललिता पूर्बिया ने आभार व्यक्त करते हुए सभी सहयोगियों के प्रति धन्यवाद ज्ञापित किया। कार्यक्रम का संचालन जिला मंत्री कमल आमेटा ने किया।
सम्मेलन के समापन पर शिक्षकों ने शिक्षा, शिक्षक और समाज के हित में निरंतर सक्रिय रहने तथा संगठन को मजबूत बनाने का संकल्प लिया।

Kalpita Bhavsar (Salumber)
कलपिता भवसार (सालुम्बर) प्रात:काल न्यूज़ की प्रतिष्ठित रिपोर्टर हैं, जिनका पत्रकारिता में अनुभव और निपुणता उन्हें क्षेत्रीय और राष्ट्रीय खबरों की सटीक और निष्पक्ष कवरेज प्रदान करने में सक्षम बनाती है। सालुम्बर से होने के नाते, वे स्थानीय मुद्दों, सामाजिक घटनाओं और जनसामान्य की आवाज़ को प्रभावी ढंग से पाठकों तक पहुंचाने का काम करती हैं। उनका लेखन तथ्यात्मक, स्पष्ट और प्रभावशाली है, जो पाठकों को खबरों के मूल अर्थ तक सीधे जोड़ता है।
