सलूम्बर: आखातीज और पीपल पूर्णिमा पर बाल विवाह रोकने के लिए विशेष अभियान शुरू
महिला अधिकारिता विभाग ने सलूम्बर की ग्राम पंचायतों और स्कूलों में जागरूकता अभियान चलाकर विद्यार्थियों को बाल विवाह न करने की शपथ दिलाई।

राजस्थान के नवगठित जिले सलूम्बर में आगामी अक्षय तृतीया (आखातीज) और पीपल पूर्णिमा के पावन पर्वों पर बाल विवाह जैसी सामाजिक कुरीति को जड़ से उखाड़ने के लिए महिला अधिकारिता विभाग ने एक व्यापक और विशेष अभियान का बिगुल फूंक दिया है। विभाग के कड़े निर्देशों के अनुपालन में सलूम्बर ब्लॉक की समस्त ग्राम पंचायतों में जनजागरूकता की गतिविधियों को युद्ध स्तर पर संचालित किया जा रहा है, ताकि परंपरा की आड़ में मासूमों का बचपन दांव पर न लगे।
इस विशेष अभियान के अंतर्गत विभाग की टीमें गांव-गांव के विद्यालयों में पहुंचकर छात्र-छात्राओं को बाल विवाह के गंभीर दुष्परिणामों से रूबरू करवा रही हैं। विद्यालयों में आयोजित कार्यक्रमों में विद्यार्थियों को न केवल जागरूक किया जा रहा है, बल्कि उन्हें बाल विवाह न करने और समाज में कहीं भी ऐसा होने पर उसे रोकने की सामूहिक शपथ भी दिलाई जा रही है। बाल विवाह निषेध अधिनियम के कड़े प्रावधानों की जानकारी देते हुए विभाग द्वारा ग्रामीणों और विद्यार्थियों को इसके तहत होने वाली दंडात्मक कार्रवाई के प्रति भी सचेत किया जा रहा है।
महिला अधिकारिता विभाग की साथिनों ने स्पष्ट किया कि आखातीज और पीपल पूर्णिमा जैसे अबूझ सावा के अवसरों पर परंपरागत रूप से बाल विवाह की घटनाओं में वृद्धि की आशंका प्रबल रहती है, जिसे देखते हुए इस बार प्रशासन और विभाग अत्यधिक सतर्कता बरत रहे हैं। शिक्षकों और स्थानीय ग्रामीणों के सक्रिय सहयोग से इस कुप्रथा को समाप्त करने का संकल्प लिया गया है। प्रशासन ने बच्चों और आमजन से पुरजोर अपील की है कि यदि कहीं भी बाल विवाह की सूचना मिले, तो अविलंब इसकी जानकारी प्रशासन को दें, ताकि समय रहते उचित कानूनी कार्रवाई कर बच्चों के उज्ज्वल भविष्य को सुरक्षित किया जा सके।

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