सलूम्बर। आस्था, अटूट विश्वास और कठिन साधना की मिसाल पेश करते हुए शहर के तीन युवाओं ने उत्तराखंड के ज्योतिर्लिंग बाबा केदारनाथ और पवित्र देवप्रयाग संगम से कांवड़ में गंगाजल व पवित्र जल भरकर करीब 1500 किलोमीटर की दुर्गम पैदल यात्रा पूरी की। सोमवार को कांवड़ियों के सलूम्बर पहुंचने पर शहर ‘‘हर-हर महादेव’’ और ‘‘बम-बम भोले’’ के जयकारों से गूंज उठा। शहरवासियों ने आतिशबाजी और पुष्पवर्षा कर इन आधुनिक भगीरथों का जोरदार स्वागत किया।



केदारनाथ और देवप्रयाग से जल लेकर शुरू हुई यह यात्रा मौसम की मार, पैरों में पड़े छालों और पहाड़ों के उतार-चढ़ाव के बीच करीब 40 दिनों तक चली। करीब 1500 किलोमीटर की दूरी तय कर जब तीनों कांवड़िए सोमवार को अपने गृह नगर सलूम्बर पहुंचे तो उनके चेहरों पर थकान के बजाय महादेव के दर्शन और जलाभिषेक का संतोष नजर आया।

कांवड़ यात्रा का शहर में उदयपुर रोड से भव्य शुभारंभ हुआ। नगर सीमा में प्रवेश करते ही ढोल-नगाड़ों और आतिशबाजी के साथ कांवड़ियों के स्वागत का सिलसिला शुरू हो गया। यात्रा उदयपुर रोड, डाल तिराहा, कमरूदिया भेरू बाईपास, चुंगीनाका, बस स्टैंड, लिंक रोड, खटीकवाड़ा, गांधी चौक, होली चौक, आजाद मोहल्ला, रावली पोल और माना की सैर से होते हुए जागेश्वर महादेव मंदिर परिसर पहुंची।

यात्रा मार्ग में मोहल्लेवासियों, व्यापारिक संगठनों, सामाजिक संस्थाओं और आम नागरिकों ने कांवड़ियों को मालाएं पहनाईं और आरती उतारी। इस दौरान भजनों की धुन पर युवा और श्रद्धालु झूमते-नाचते नजर आए। पूरे मार्ग में धार्मिक उत्साह का माहौल बना रहा।

जागेश्वर महादेव मंदिर परिसर पहुंचने पर जागेश्वर महादेव मंदिर मंडल के पदाधिकारियों और प्रबुद्ध जनों ने कांवड़ियों की अगवानी की और उन्हें सम्मानित किया। इसके बाद मुख्य गर्भगृह में विद्वान पंडितों के सानिध्य में वैदिक मंत्रोच्चारण और शास्त्रोक्त विधि-विधान से केदारनाथ व देवप्रयाग से लाए गए पवित्र जल से भगवान जागेश्वर महादेव का जलाभिषेक किया गया।

इस विशेष अवसर का साक्षी बनने के लिए मंदिर परिसर में सैकड़ों की संख्या में महिला-पुरुष और श्रद्धालु मौजूद रहे। जलाभिषेक के बाद भगवान शिव की भव्य महाआरती की गई और उपस्थित जनसमुदाय में महाप्रसाद का वितरण किया गया।

श्रद्धालुओं ने कहा कि सलूम्बर के इतिहास में तीनों युवाओं की यह भक्ति यात्रा हमेशा याद रखी जाएगी। करीब 40 दिनों में 1500 किलोमीटर की पैदल यात्रा के बाद केदारनाथ और देवप्रयाग का पवित्र जल जागेश्वर महादेव को अर्पित किए जाने का यह धार्मिक आयोजन शहर में आस्था और भक्ति का विशेष अवसर बन गया।

Pratahkal Newsroom

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