सलूंबर। 2 से 8 अक्टूबर तक आयोजित 72वें वन्यजीव सप्ताह के तहत रविवार को वन विभाग की ओर से पर्यावरण और वन्यजीव संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए ट्रैकिंग कार्यक्रम आयोजित किया गया। जिला कलक्टर मुहम्मद जुनैद पी.पी. की उपस्थिति में ट्रैकिंग दल को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया गया।

कार्यक्रम में विद्यार्थियों, छात्र-छात्राओं, पर्यावरणविदों और प्रकृति प्रेमियों ने प्राकृतिक परिवेश में भ्रमण कर क्षेत्र की जैव विविधता, वनस्पतियों और पर्यावरण संरक्षण के विभिन्न पहलुओं को करीब से जाना। डी.एफ.ओ. अनुराग भटनागर ने ट्रैकिंग कार्यक्रम की रूपरेखा और रूट प्लान की जानकारी दी। उन्होंने प्रतिभागियों को प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के प्रति संवेदनशील रहने का संदेश दिया।

ट्रैकिंग के दौरान मार्ग में विभिन्न प्रकार के पौधों और वनस्पतियों की पहचान कराते हुए उनके पर्यावरणीय महत्व की जानकारी दी गई। विद्यार्थियों को बताया गया कि पौधे केवल ऑक्सीजन उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि जैव विविधता के संरक्षण, मृदा संरक्षण, जल संरक्षण, जलवायु संतुलन और वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास को सुरक्षित रखने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

वन विभाग के अधिकारियों और विशेषज्ञों ने विद्यार्थियों को वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास सुरक्षित रखने, जंगलों में स्वच्छता बनाए रखने, प्लास्टिक और अन्य प्रदूषण से पर्यावरण को बचाने तथा वन्यजीवों के प्रति संवेदनशील व्यवहार अपनाने के लिए प्रेरित किया।

कार्यक्रम के दौरान डॉ. सतीश शर्मा, एनजीओ फाउंडेशन और इकोलॉजी से जुड़े विशेषज्ञों ने विद्यार्थियों, शोधार्थियों और पर्यावरण में रुचि रखने वाले प्रतिभागियों को वनस्पति विज्ञान तथा क्षेत्र की जैव विविधता से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी दी। ट्रैकिंग के दौरान विद्यार्थियों और शोधार्थियों ने विभिन्न प्रश्न पूछे, जिनका विशेषज्ञों ने विस्तारपूर्वक उत्तर दिया। उन्होंने वनस्पतियों की पहचान, उनके उपयोग, पारिस्थितिकी तंत्र में उनकी भूमिका और संरक्षण की आवश्यकता के बारे में समझाया।

विशेषज्ञों ने कहा कि प्राकृतिक वातावरण स्वयं में एक जीवंत प्रयोगशाला है। प्रकृति को करीब से समझने और उसके संरक्षण के लिए युवाओं और विद्यार्थियों की भागीदारी अत्यंत महत्वपूर्ण है।

वन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि वन्यजीव सप्ताह का उद्देश्य केवल वन्यजीवों के प्रति जागरूकता पैदा करना ही नहीं, बल्कि आमजन को प्रकृति, वनस्पति, जैव विविधता और पारिस्थितिक संतुलन के संरक्षण के लिए प्रेरित करना भी है। वन्यजीवों का संरक्षण तभी प्रभावी हो सकता है, जब प्राकृतिक आवासों का संरक्षण किया जाए और समाज का प्रत्येक वर्ग पर्यावरण के प्रति अपनी जिम्मेदारी को समझे।

कार्यक्रम में आर.एफ.ओ. डॉ. राजेंद्र महला, ए.सी.एफ. तरुण मीणा, विकास अधिकारी जयसमंद दयाचंद सहित वन विभाग के अधिकारी-कर्मचारी, विद्यार्थी, शोधार्थी, पर्यावरणविद् और प्रकृति प्रेमी उपस्थित रहे।

Kalpita Bhavsar (Salumber)

Kalpita Bhavsar (Salumber)

कलपिता भवसार (सालुम्बर) प्रात:काल न्यूज़ की प्रतिष्ठित रिपोर्टर हैं, जिनका पत्रकारिता में अनुभव और निपुणता उन्हें क्षेत्रीय और राष्ट्रीय खबरों की सटीक और निष्पक्ष कवरेज प्रदान करने में सक्षम बनाती है। सालुम्बर से होने के नाते, वे स्थानीय मुद्दों, सामाजिक घटनाओं और जनसामान्य की आवाज़ को प्रभावी ढंग से पाठकों तक पहुंचाने का काम करती हैं। उनका लेखन तथ्यात्मक, स्पष्ट और प्रभावशाली है, जो पाठकों को खबरों के मूल अर्थ तक सीधे जोड़ता है।

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