बाल विवाह रोकने में शिक्षक अहम कड़ी, संयुक्त राष्ट्र की घोषणा के बाद सलूम्बर में सम्मान
सलूम्बर के जैताणा विद्यालय में शिक्षक दिवस पर बाल विवाह रोकने वाले शिक्षकों का सम्मान हुआ। संयुक्त राष्ट्र की 27 नवंबर को अंतरराष्ट्रीय दिवस घोषित करने की पहल के बीच अभियान की उपलब्धियों और आंकड़ों पर चर्चा हुई।

तस्वीर में सलूम्बर के विद्यालय में बाल विवाह रोकथाम अभियान के तहत सम्मानित शिक्षक और छात्र नजर आ रहे हैं।
सलूम्बर में शिक्षक दिवस के अवसर पर बाल विवाह के खिलाफ जमीनी स्तर पर काम कर रहे शिक्षकों का सम्मान किया गया। झल्लारा पंचायत समिति के जैताणा राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय में गायत्री सेवा संस्थान, उदयपुर की ओर से आयोजित कार्यक्रम में बाल विवाह रोकने में शिक्षकों की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया गया। यह आयोजन संयुक्त राष्ट्र द्वारा 27 नवंबर को ‘बाल विवाह, कम उम्र और जबरन विवाह की समाप्ति के लिए अंतरराष्ट्रीय दिवस’ घोषित किए जाने के उपलक्ष्य में किया गया।
बाल विवाह के खिलाफ अभियान चला रहे गायत्री सेवा संस्थान ने संयुक्त राष्ट्र के इस ऐतिहासिक कदम का स्वागत किया। संगठन के अनुसार, यह सरकार और प्रशासन के सहयोग से देश में बाल विवाह के खिलाफ अभियान चला रहे नागरिक समाज संगठनों के देश के सबसे बड़े नेटवर्क जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन (जेआरसी) के अथक और असाधारण प्रयासों को वैश्विक मान्यता है। गायत्री सेवा संस्थान जेआरसी का सहयोगी संगठन है और जेआरसी लंबे समय से इस दिवस की मांग कर रहा था।
कार्यक्रम में बाल अधिकार विशेषज्ञ एवं पूर्व सदस्य राजस्थान बाल आयोग, राजस्थान सरकार डॉ. शैलेन्द्र पण्ड्या ने कहा कि भारत से उठी आवाज आज पूरी दुनिया का संकल्प बन गई है। उन्होंने कहा कि यह पूरे भारत के लिए भी गर्व का विषय है कि संयुक्त राष्ट्र ने बाल विवाह के खिलाफ वैश्विक दिवस के लिए 27 नवंबर की तारीख चुनी। वर्ष 2024 में इसी दिन भारत सरकार ने जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन जैसे नागरिक समाज संगठनों को साथ लेकर ‘बाल विवाह मुक्त भारत’ अभियान की शुरुआत की थी।
डॉ. पण्ड्या ने कहा कि यह जश्न मनाकर रुक जाने का क्षण नहीं है। संयुक्त राष्ट्र की घोषणा ने गौरव दिया है, लेकिन अब जिम्मेदारी है कि दुनिया के हर बच्चे को बाल विवाह मुक्त बचपन मिले। उन्होंने कहा कि इस संकल्प को जमीन पर उतारना चुनौती है और जब तक जिले के किसी गांव का एक भी बच्चा बाल विवाह के डर में जी रहा है, तब तक लड़ाई अधूरी है। उन्होंने बाल विवाह को जड़ से खत्म करने के लिए शिक्षकों की महत्वपूर्ण भूमिका बताते हुए मिलकर काम करने की आवश्यकता पर जोर दिया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे स्थानीय विद्यालय के प्रधानाचार्य दिनेश कुमार चौबीसा ने शिक्षक दिवस से एक दिन पूर्व संयुक्त राष्ट्र द्वारा बाल विवाह की रोकथाम के लिए घोषित अंतरराष्ट्रीय दिवस की पहल की सराहना की। उन्होंने जनजाति अंचल में बाल विवाह रोकने के लिए गायत्री सेवा संस्थान की ओर से किए जा रहे प्रयासों की सराहना करते हुए बच्चों को बाल विवाह से होने वाले नुकसान से अवगत कराया।
गायत्री सेवा संस्थान की जिला समन्वयक हेमा ने बताया कि जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन के संस्थापक भुवन ऋभु ने बाल विवाह के खात्मे के लिए एक अलग अंतरराष्ट्रीय दिवस घोषित करने की पहल की थी। मार्च 2026 में संयुक्त राष्ट्र में भुवन ऋभु ने अपने संबोधन के दौरान कई वैश्विक नेताओं की मौजूदगी में एक बार फिर बाल विवाह के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय दिवस घोषित करने के लिए प्रस्ताव लाने की बात कही थी। उस दौरान अफ्रीकी देश सिएरा लियोन की फर्स्ट लेडी डॉ. फातिमा मादा बायो भी मौजूद थीं, जिन्होंने इस पहल का समर्थन किया।
इसके बाद सिएरा लियोन ने भारत सहित करीब 50 देशों के समर्थन वाला प्रस्ताव संयुक्त राष्ट्र महासभा में पेश किया। प्रस्ताव में 27 नवंबर को बाल विवाह समाप्त करने के लिए समर्पित वैश्विक दिवस घोषित करने की मांग की गई थी। 4 सितंबर 2026 को संयुक्त राष्ट्र ने इस प्रस्ताव को पारित कर दिया।
हेमा ने बताया कि इसी उपलक्ष्य में शिक्षक दिवस के अवसर पर बाल विवाह की रोकथाम में सहयोग करने वाले शिक्षकों के सम्मान के लिए संस्थान की ओर से प्रदेश के विभिन्न जिलों में कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। भारत में जेआरसी अपने सहयोगी संगठनों के साथ देश के सभी 782 जिलों में बाल विवाह के खिलाफ अभियान चला रहा है।
जेआरसी ने अपने सहयोगी संगठनों के साथ सरकारों और कानून-प्रवर्तन एजेंसियों के सहयोग से समुदायों, स्कूलों, पंचायतों, आदिवासी और वंचित समुदायों, महिलाओं, पुलिसकर्मियों, धर्मगुरुओं और जनप्रतिनिधियों को बाल विवाह रोकने के लिए एकजुट किया है। जेआरसी के सहयोगी संगठनों ने देश में 5,50,000 से अधिक बाल विवाह रुकवाए हैं। यह इस बात का प्रमाण बताया गया कि सरकार, नागरिक समाज और समुदाय मिलकर काम करें तो बाल विवाह को रोका जा सकता है और अंततः पूरी तरह समाप्त भी किया जा सकता है।
गायत्री सेवा संस्थान की रमेश चौबीसा ने मुहिम के प्रभाव की जानकारी देते हुए बाल विवाह की दर में आई गिरावट का उल्लेख किया। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वे-5 (2019-21) के अनुसार देश में 23.3 फीसदी लड़कियों की शादी 18 साल से पहले हो चुकी थी, जबकि राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वे-6 (2023-24) में यह आंकड़ा घटकर 20.1 फीसदी रह गया। वहीं भारत सरकार ने 2026 तक बाल विवाह की दर को 10 फीसदी तक घटाने का लक्ष्य रखा है।
रमेश चौबीसा के अनुसार, केंद्र और राज्य दोनों स्तरों पर लगातार किए जा रहे प्रयासों की बदौलत उम्मीद है कि 2026 खत्म होते-होते भारत में बाल विवाह की दर 15 फीसदी से भी नीचे आ जाएगी। यह 2030 तक बाल विवाह समाप्त करने की वैश्विक प्रतिबद्धता और सतत विकास लक्ष्य 5 (लैंगिक समानता) के लक्ष्य 5.3 के अनुरूप है। इसमें बाल विवाह, कम उम्र और जबरन विवाह जैसी सभी नुकसानदेह प्रथाओं को खत्म करने की बात कही गई है।
कार्यक्रम का संचालन बालकृष्ण चौबीसा ने किया। इस दौरान बच्चों ने शिक्षक बनकर बच्चों के अधिकारों पर संवाद किया। कार्यक्रम में गायत्री सेवा संस्थान के कार्यकर्ता कमलेश चौबीसा, नारायण लाल आहारी, विद्यालय के उप प्रधानाचार्य भगवती लाल चौबीसा, हेमेन्द्र राठौड़, योगेंद्र चुंडावत, चंद्रवीर चुंडावत, महेंद्र जी, कृष्णवत, योगेश सेवक, भोनिका पाटीदार, संगीता कुमावत, जयश्री जैन, झल्लारा थाने के बाल कल्याण अधिकारी चिराग उपाध्याय, चंदा मीणा, जिला विशेष पुलिस इकाई के नीरज कुमार पाटीदार टीम सहित अन्य उपस्थित रहे।
संयुक्त राष्ट्र की ओर से 27 नवंबर को बाल विवाह, कम उम्र और जबरन विवाह की समाप्ति के लिए अंतरराष्ट्रीय दिवस घोषित किए जाने के बाद शिक्षक दिवस पर आयोजित यह कार्यक्रम बाल विवाह की रोकथाम में शिक्षकों, समुदाय, नागरिक समाज और कानून-प्रवर्तन एजेंसियों की संयुक्त भूमिका को रेखांकित करता है।

Kalpita Bhavsar (Salumber)
कलपिता भवसार (सालुम्बर) प्रात:काल न्यूज़ की प्रतिष्ठित रिपोर्टर हैं, जिनका पत्रकारिता में अनुभव और निपुणता उन्हें क्षेत्रीय और राष्ट्रीय खबरों की सटीक और निष्पक्ष कवरेज प्रदान करने में सक्षम बनाती है। सालुम्बर से होने के नाते, वे स्थानीय मुद्दों, सामाजिक घटनाओं और जनसामान्य की आवाज़ को प्रभावी ढंग से पाठकों तक पहुंचाने का काम करती हैं। उनका लेखन तथ्यात्मक, स्पष्ट और प्रभावशाली है, जो पाठकों को खबरों के मूल अर्थ तक सीधे जोड़ता है।
