सलूम्बर पॉक्सो कोर्ट का फैसला: मासूम से दुष्कर्म के दोषी को आजीवन कारावास
विशेष न्यायालय ने सेमारी थाना क्षेत्र के दोषी मुकेश कुमार पर 50 हजार रुपये का जुर्माना लगाया और पीड़िता को प्रतिकर देने का आदेश दिया।

राजस्थान के सलूम्बर जिले से एक बड़ी न्यायिक खबर सामने आई है, जहाँ विशेष न्यायालय पॉक्सो ने नाबालिग बालिका से दुष्कर्म के हृदयविदारक मामले में त्वरित न्याय करते हुए आरोपी को कठोरतम दंड से दंडित किया है। न्यायालय ने मानवता को शर्मसार करने वाले इस कृत्य के दोषी को शेष प्राकृतिक जीवनकाल के लिए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है, साथ ही आरोपी पर 50 हजार रुपये का अर्थदंड भी अधिरोपित किया है।
यह प्रकरण सलूम्बर जिले के सेमारी थाना क्षेत्र का है, जहाँ भोराई फला, मोजावद निवासी आरोपी मुकेश कुमार ने मात्र 6 वर्ष 11 माह की मासूम बालिका को अपनी हवस और क्रूरता का शिकार बनाया था। आरोपी के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता की धारा 137(2), 87, 115(2) तथा पॉक्सो एक्ट की धारा 5(ड)/6 के अंतर्गत संगीन मामला दर्ज किया गया था। अभियोजन पक्ष के अनुसार, मुकेश कुमार ने न केवल मासूम के साथ दुष्कर्म किया, बल्कि उसके साथ मारपीट कर गंभीर चोटें भी पहुंचाई थीं। सेमारी थाना पुलिस ने इस जघन्य अपराध की गहनता से जांच कर न्यायालय में आरोप पत्र (चालान) प्रस्तुत किया था।
न्यायिक प्रक्रिया के दौरान लोक अभियोजन एवं जिला राजकीय अधिवक्ता रणजीत पुर्बिया ने अभियोजन पक्ष को मजबूती से रखते हुए न्यायालय के समक्ष 13 गवाहों के बयान दर्ज करवाए और 35 महत्वपूर्ण दस्तावेजी साक्ष्य प्रस्तुत किए। विशेष न्यायालय पॉक्सो, सलूम्बर के न्यायाधीश रामस्वरूप प्रसाद चौधरी ने पत्रावली पर उपलब्ध वैज्ञानिक और परिस्थितिजन्य साक्ष्यों को निर्णायक मानते हुए आरोपी मुकेश कुमार को दोषसिद्ध करार दिया। न्यायाधीश ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि आरोपी को पॉक्सो एक्ट की धारा 5/6 के तहत शेष प्राकृतिक जीवनकाल तक जेल की सलाखों के पीछे रहना होगा। इसके अतिरिक्त, अन्य धाराओं में सुनाई गई सजाएं भी समानांतर रूप से प्रभावी रहेंगी।
न्यायालय ने अपने फैसले में संवेदनशीलता का परिचय देते हुए यह भी निर्देशित किया कि आरोपी पर लगाए गए 50 हजार रुपये के जुर्माने की राशि पीड़िता को प्रतिकर (मुआवजे) के रूप में दी जाए। इसके साथ ही, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, सलूम्बर को पीड़ित प्रतिकर योजना के तहत पीड़िता को अतिरिक्त सहायता उपलब्ध कराने की अनुशंसा की गई है। यह फैसला समाज में कड़ा संदेश देता है कि मासूमों के विरुद्ध अपराध करने वालों के लिए कानून में कोई रियायत नहीं है।

Pratahkal Bureau
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