सलूम्बर निकाय चुनाव में टिकट की दौड़ तेज, अध्यक्ष पद के लिए दावेदारों की लंबी कतार
सलूम्बर नगर परिषद चुनाव में टिकट की दौड़ तेज हो गई है। कांग्रेस के ऑनलाइन और भाजपा के ऑफलाइन आवेदन के बीच 25 वार्डों में दावेदार सक्रिय हैं। अध्यक्ष पद पर करीब 11 नाम और वार्ड 2 में 21 दावेदारों की चर्चा है।

सलूम्बर। नगर परिषद के आगामी निकाय चुनावों की घोषणा के साथ ही सलूम्बर के 25 वार्डों में राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। चुनावी मैदान में उतरने से पहले ही टिकट की दौड़ ने नेताओं और कार्यकर्ताओं की धड़कनें बढ़ा दी हैं। कोई पार्टी कार्यालय के चक्कर लगा रहा है तो कोई ऑनलाइन आवेदन के जरिए अपनी दावेदारी मजबूत करने में जुटा है। राजनीति में बदलते दौर का असर टिकट की प्रक्रिया पर भी दिखाई दे रहा है।
कांग्रेस ने टिकट के लिए ऑनलाइन आवेदन की प्रक्रिया शुरू कर दी है, जबकि भाजपा ने ऑफलाइन आवेदन लेने की तैयारी की है। दोनों दलों में दावेदारों की संख्या को देखते हुए एक टिकट के लिए कई-कई दावेदार सामने हैं। हर दावेदार खुद को सबसे मजबूत उम्मीदवार बताकर अपनी दावेदारी पेश कर रहा है।
भाजपा में नगर परिषद अध्यक्ष पद को लेकर सबसे ज्यादा हलचल दिखाई दे रही है। अध्यक्ष पद के लिए करीब 11 नाम चर्चा में बताए जा रहे हैं। इनमें पूर्व अध्यक्ष, पूर्व उपाध्यक्ष और संगठन से जुड़े अनुभवी चेहरों के साथ नए दावेदार भी शामिल हैं। टिकट की दौड़ ने राजनीतिक समीकरणों को भी दिलचस्प बना दिया है। कल तक जो एक-दूसरे को शुभकामनाएं दे रहे थे, वे अब टिकट की दौड़ में संभावित प्रतिद्वंद्वी के रूप में सामने हैं।
भाजपा में अध्यक्ष पद के संभावित दावेदारों में पूर्व भाजपा देहात जिला उपाध्यक्ष कैलाश गांधी, पूर्व नगर अध्यक्ष लव व्यास, करण सिंह पंवार, विश्व हिंदू परिषद के पूर्व विभाग मंत्री पूर्णेश शर्मा, पूर्व पार्षद धर्मेंद्र शर्मा, पूर्व पालिका अध्यक्ष भगवती लाल सेवक, महेंद्र रूपावत और दिनेश लढ्ढा के नाम चर्चा में बताए जा रहे हैं। अध्यक्ष की एक सीट के लिए दावेदारों की यह लंबी सूची पार्टी के सामने टिकट चयन की चुनौती को स्पष्ट करती है।
कांग्रेस में भी दावेदारों की कमी नहीं है। पूर्व पार्षद नरेश जैन, निकाय प्रकोष्ठ जिलाध्यक्ष महिपाल खेतावत, पूर्व सभापति प्रद्युम्न कोड़िया, दिनेश जैन, पूर्व नगर अध्यक्ष लक्ष्मीकांत शर्मा, अब्दुल रऊफ खान, जयप्रकाश जैन और रमेश मदादा सहित कई नामों की चर्चा है। पार्टी स्तर पर जातीय, सामाजिक और राजनीतिक समीकरणों को ध्यान में रखते हुए टिकट तय करने की कवायद चल रही है। दोनों दलों में संभावित उम्मीदवारों को लेकर बैठकों और मंथन का दौर शुरू हो चुका है।
इस बार वार्डों के आरक्षण ने चुनावी समीकरणों को और बदल दिया है। कई पुराने दावेदारों के लिए आरक्षण के कारण रास्ता बदल गया है, जबकि नए चेहरों के लिए अचानक अवसर पैदा हुआ है। वार्ड 8 हॉट सीट बनकर उभरा है। वहीं वार्ड 2 में बड़ी संख्या में दावेदारों के आवेदन की चर्चा है। करीब 230 मतदाताओं वाले इस वार्ड में 21 दावेदारों की चर्चा अपने आप में बताती है कि चुनाव से पहले ही टिकट की होड़ कितनी तेज हो गई है।
अब दोनों राजनीतिक दलों के सामने सबसे बड़ी चुनौती टिकट वितरण की है। एक दावेदार को टिकट मिलने के बाद अन्य दावेदारों को साथ बनाए रखना भी जरूरी होगा। चुनावी मैदान में विरोधी दल से मुकाबला बाद में होगा, उससे पहले अपने ही दावेदारों की नाराजगी पार्टियों के लिए चुनौती बन सकती है।
कुल मिलाकर सलूम्बर का निकाय चुनाव अभी मैदान में उतरा भी नहीं है, लेकिन राजनीतिक मुकाबला शुरू हो चुका है। ऑनलाइन आवेदन हो या ऑफलाइन फार्म, इस समय सबसे बड़ा सवाल टिकट किसे मिलेगा और टिकट न मिलने के बाद कौन किसके साथ खड़ा रहेगा, यही आने वाले दिनों में सलूम्बर की राजनीति का सबसे बड़ा सस्पेंस बना रहेगा।

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