सलूम्बर में सोमवार को लोक मंथन यात्रा का भव्य स्वागत किया गया। मेवाड़ की समृद्ध लोक संस्कृति, पारंपरिक परंपराओं और लोक कलाओं के संरक्षण तथा नई पीढ़ी को सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने के उद्देश्य से निकाली जा रही इस यात्रा में गवरी नृत्य प्रमुख आकर्षण रहा। पारंपरिक खेलों और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से मेवाड़ की जीवनशैली और राजस्थान की लोक परंपराओं की झलक देखने को मिली। इस दौरान लोक कला, पारंपरिक ज्ञान और सामाजिक संस्कारों के संरक्षण का संदेश दिया गया।

लोक मंथन यात्रा उदयपुर रोड स्थित गायत्री शक्तिपीठ पहुंची, जहां लोगों ने यात्रा का स्वागत किया। इसके बाद वाहन रैली के साथ यात्रा की अगवानी की गई। यात्रा के डाल तिराहे पहुंचने पर मातृशक्ति ने भव्य स्वागत किया। गवरी नृत्य दल की प्रस्तुति ने कार्यक्रम में विशेष आकर्षण पैदा किया। इसके बाद यात्रा पंडित दीनदयाल उपाध्याय कॉलोनी स्थित सेवक समाज के मांगलिक भवन पहुंची, जहां मेवाड़ की पारंपरिक जीवनशैली से जुड़ी गतिविधियां आयोजित की गईं।



कार्यक्रम में स्कूली बच्चों ने मांडना, साजी, कंचे, लट्टू (भंवरी), सितोलिया और रस्साकशी सहित विभिन्न पारंपरिक खेलों में भाग लिया। इन गतिविधियों के माध्यम से बच्चों को अपनी सांस्कृतिक विरासत और पुरानी परंपराओं से परिचित होने का अवसर मिला। पारंपरिक खेलों और लोक कलाओं ने कार्यक्रम में मेवाड़ की सांस्कृतिक पहचान को प्रमुखता से प्रस्तुत किया।

लोक मंथन यात्रा के संयोजक डॉ. सत्यनारायण कुमावत ने कहा कि वर्तमान समय में सामाजिक और सांस्कृतिक जीवन में तेजी से बदलाव हो रहे हैं। ऐसे में लोक संस्कृति, पारंपरिक ज्ञान और प्रकृति से जुड़ी जीवनशैली को फिर से समाज के बीच स्थापित करना जरूरी है। उन्होंने कहा कि भारतीय लोक परंपराएं लोकमंगल, समृद्धि और जनकल्याण की भावना पर आधारित हैं।

डॉ. कुमावत ने पारंपरिक संस्कारों का उल्लेख करते हुए कहा कि पहले लोग भोजन करने से पहले पशु-पक्षियों के लिए रोटी का हिस्सा निकालते थे और छोटे से छोटे जीव के प्रति भी संवेदना रखते थे। उन्होंने इन संस्कारों को नई पीढ़ी तक पहुंचाने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने बताया कि लोक मंथन यात्रा राजस्थान के 31 जिलों का भ्रमण पूरा कर 32वें जिले में पहुंची है। उन्होंने पारंपरिक जड़ी-बूटियों, औषधीय पौधों और प्राकृतिक ज्ञान के संरक्षण को भी आवश्यक बताया।

समारोह में लोक संस्कृति, भजन गायन, झांकी निर्माण, प्राकृतिक मूर्ति निर्माण और गौसेवा सहित विभिन्न क्षेत्रों में योगदान देने वाले लोगों का सम्मान किया गया। भजन गायन के लिए विनोद गर्ग और मुकेश वाल्मीकि, झांकी निर्माण के लिए भेरूलाल पटेल, प्राकृतिक मूर्ति निर्माण के लिए जयरथ सिंह पंवार और गौसेवा के लिए शंकरलाल भोई को सम्मानित किया गया।

इसी क्रम में पैदल कांवड़ यात्रा के लिए अतुलेश जागिड़, कांवड़ यात्रा संयोजन के लिए रमेश उस्ता, भरतदास वैष्णव और जगदीश पुरी गोस्वामी तथा लोक गायन के लिए पंकज भाट का सम्मान किया गया।

कार्यक्रम में लोकमंथन यात्रा समिति के अध्यक्ष मुकेश मंत्री, संयोजक महेश चंद्र आमेटा सहित अन्य सदस्यों का सहयोग रहा। कार्यक्रम का संयोजन बालकृष्ण चौबीसा ने किया। लोक मंथन यात्रा के माध्यम से पारंपरिक खेलों, लोक कलाओं, प्राकृतिक ज्ञान और सांस्कृतिक संस्कारों को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के साथ मेवाड़ की लोक विरासत के संरक्षण का संदेश दिया गया।

Kalpita Bhavsar (Salumber)

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कलपिता भवसार (सालुम्बर) प्रात:काल न्यूज़ की प्रतिष्ठित रिपोर्टर हैं, जिनका पत्रकारिता में अनुभव और निपुणता उन्हें क्षेत्रीय और राष्ट्रीय खबरों की सटीक और निष्पक्ष कवरेज प्रदान करने में सक्षम बनाती है। सालुम्बर से होने के नाते, वे स्थानीय मुद्दों, सामाजिक घटनाओं और जनसामान्य की आवाज़ को प्रभावी ढंग से पाठकों तक पहुंचाने का काम करती हैं। उनका लेखन तथ्यात्मक, स्पष्ट और प्रभावशाली है, जो पाठकों को खबरों के मूल अर्थ तक सीधे जोड़ता है।

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