ठाट-बाट से निकली ठाकुरजी की सवारियां, सरोवर स्नान के साथ गूंजे जयकारे
सलूम्बर में जल झूलनी एकादशी पर ठाकुरजी की सवारियां पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ निकलीं। सैरिंग तालाब पर सरोवर स्नान और बड़ा गणपति मंदिर में सामूहिक आरती के दौरान गूंजे जयकारे।

तस्वीर में सलूम्बर में जल झूलनी एकादशी के अवसर पर सजे हुए बेवाण और भगवान ठाकुरजी की शोभायात्रा में शामिल श्रद्धालु नजर आ रहे हैं।
सलूम्बर। जल झूलनी एकादशी के पावन अवसर पर मंगलवार को जिला मुख्यालय सलूम्बर भक्ति और परंपरा से सराबोर नजर आया। शहर के विभिन्न मंदिरों से भगवान ठाकुरजी की सवारियां पूरे ठाट-बाट और पारंपरिक धार्मिक रीति-रिवाजों के साथ निकलीं। बेवाण में विराजमान भगवान के श्रीविग्रह स्वरूप को नगर भ्रमण करवाते हुए सैरिंग तालाब की पाल तक ले जाया गया, जहां विधि-विधान से ठाकुरजी को सरोवर स्नान करवाया गया। इस दौरान शहर ठाकुरजी के जयकारों और भजनों से गूंजता रहा।
शाम को गांधी चौक से जल झूलनी एकादशी की शोभायात्रा का शुभारंभ हुआ। इससे पहले भगवान बद्री विशाल मंदिर, मानेसर महादेव मंदिर, राधा-कृष्ण मंदिर, नरसिंह मंदिर, रघुनाथ मंदिर, गोवर्धननाथ मंदिर, जगदीश मंदिर, सत्यनारायण मंदिर, अंदर के चारभुजा मंदिर, द्वारिकाधीश मंदिर, तेजानंद बिहारी दाता मंदिर, हरमंदिर तथा भगवान चारभुजानाथ सहित विभिन्न मंदिरों के बेवाण रावली पोल प्रांगण में एकत्र हुए। यहां श्रद्धालुओं ने भजन-कीर्तन किया। इसके बाद गाजे-बाजे के साथ ठाकुरजी की सवारियों को नगर भ्रमण के लिए रवाना किया गया।
रावली पोल प्रांगण से शुरू हुई शोभायात्रा हरमंदिर होते हुए सैरिंग तालाब की पाल पहुंची। शोभायात्रा में आगे ढोल-नगाड़ों और मादल की थाप गूंज रही थी, जबकि पीछे ठाकुरजी के बेवाण और उनके दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ चल रही थी। श्रद्धालु पारंपरिक धवल वस्त्र धारण कर शोभायात्रा में शामिल हुए।
तालाब की पाल पर पहुंचने के बाद पुजारियों ने भगवान के श्रीविग्रह स्वरूप को शंख, थाली, मादल, घंटे और ढोल-नगाड़ों की गूंज के बीच मंत्रोच्चार के साथ सरोवर स्नान करवाया। भगवान के सरोवर स्नान के दौरान श्रद्धालु दर्शन के लिए आतुर नजर आए। स्नान के बाद भगवान की आरती उतारी गई। श्रद्धालुओं ने हाथ जोड़कर सुख-समृद्धि की कामना की।
सरोवर स्नान के बाद ठाकुरजी की सवारियां नागदा बाजार और आजाद मोहल्ला होते हुए श्री बड़ा गणपति महाराज मंदिर पहुंचीं। यहां सभी बेवाणों की सामूहिक आरती की गई। आरती के स्वर गूंजते ही मंदिर परिसर और आसपास का क्षेत्र भक्तिमय हो गया। ‘ओम जय जगदीश हरे’ की आरती के साथ पूरा वातावरण हरिमय नजर आया।
आरती के दौरान करतल ध्वनि के साथ श्रद्धालुओं ने ‘ठाकुरजी महाराज की जय’ और ‘चारभुजानाथ महाराज की जय’ के जयकारे लगाए। ढोल-मादल की थाप और जयकारों के बीच श्रद्धालु भक्ति में झूमते दिखाई दिए।
जल झूलनी एकादशी पर निकली ठाकुरजी की सवारियां सलूम्बर की धार्मिक परंपरा और सांस्कृतिक विरासत की जीवंत तस्वीर पेश करती नजर आईं। शहर की गलियों से गुजरते बेवाण, दर्शन के लिए उमड़ते श्रद्धालु, पारंपरिक वेशभूषा, ढोल-मादल की गूंज और जगह-जगह लगते ठाकुरजी के जयकारों से शहर का माहौल पूरी तरह धार्मिक बना रहा।
सामूहिक आरती के बाद विभिन्न मंदिरों के बेवाण अपने-अपने धाम के लिए रवाना हुए। देर शाम तक शहर में जल झूलनी एकादशी की भक्ति और उल्लास का माहौल बना रहा। श्रद्धालुओं ने भगवान ठाकुरजी के दर्शन कर आशीर्वाद लिया और सुख-समृद्धि की मंगलकामना की।

Kalpita Bhavsar (Salumber)
कलपिता भवसार (सालुम्बर) प्रात:काल न्यूज़ की प्रतिष्ठित रिपोर्टर हैं, जिनका पत्रकारिता में अनुभव और निपुणता उन्हें क्षेत्रीय और राष्ट्रीय खबरों की सटीक और निष्पक्ष कवरेज प्रदान करने में सक्षम बनाती है। सालुम्बर से होने के नाते, वे स्थानीय मुद्दों, सामाजिक घटनाओं और जनसामान्य की आवाज़ को प्रभावी ढंग से पाठकों तक पहुंचाने का काम करती हैं। उनका लेखन तथ्यात्मक, स्पष्ट और प्रभावशाली है, जो पाठकों को खबरों के मूल अर्थ तक सीधे जोड़ता है।
