सलूंबर। शहर में तालाब की पाल के समीप स्थित हजरत नत्थे शाह बाबा की दरगाह पर आयोजित 62वां सालाना उर्स अकीदत और रूहानियत के माहौल में सम्पन्न हुआ। दो दिवसीय उर्स में बड़ी संख्या में जायरीन और अकीदतमंद शामिल हुए। उर्स के अंतिम दिन सजी कव्वाली की महफिल में सूफियाना कलाम की गूंज के बीच समापन पर अमन-चैन, खुशहाली और आपसी भाईचारे के लिए दुआएं मांगी गईं।

उर्स का आगाज शुक्रवार को कुल की रस्म के साथ हुआ। इस दौरान अकीदतमंदों ने हजरत नत्थे शाह बाबा की दरगाह पर हाजिरी लगाकर चादर पेश की और देश एवं क्षेत्र में खुशहाली की कामना की। दो दिनों तक दरगाह परिसर जायरीनों की आमद और धार्मिक गतिविधियों से गुलजार रहा।

शनिवार को उर्स की अंतिम शाम कव्वाली की महफिल आयोजित की गई। इसमें कव्वाल बाबू भाई और रईस फरीद ने अपने सूफियाना कलाम और एक से बढ़कर एक कव्वालियां पेश कर समां बांध दिया। उनकी प्रस्तुतियों पर जायरीनों ने जमकर दाद दी और वाहवाही का सिलसिला देर तक चलता रहा। कव्वालों के रूहानी अंदाज और सूफियाना कलाम ने महफिल में मौजूद लोगों को देर तक बांधे रखा।

उर्स के दौरान दरगाह पर अकीदतमंदों की आवाजाही लगातार बनी रही। जायरीनों ने बाबा की दरगाह पर माथा टेककर अपने परिवार की खुशहाली, कारोबार में बरकत और क्षेत्र में अमन-चैन की दुआ मांगी। दो दिवसीय आयोजन ने आपसी प्रेम, सद्भाव और गंगा-जमुनी तहजीब का संदेश दिया।

इस अवसर पर तुर्की दरवाजा काजी हजरत मकबूल शाह, सदर मोहम्मद युसुफ, दरगाह सदर मुनाफ मोहम्मद, हबीबुर्रहमान, अब्दुल रऊफ, हाजी जहीर खान, अब्दुल रज्जाक, आजम खान और लियाकत खान सहित बड़ी संख्या में जायरीन एवं अकीदतमंद मौजूद रहे।

Kalpita Bhavsar (Salumber)

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कलपिता भवसार (सालुम्बर) प्रात:काल न्यूज़ की प्रतिष्ठित रिपोर्टर हैं, जिनका पत्रकारिता में अनुभव और निपुणता उन्हें क्षेत्रीय और राष्ट्रीय खबरों की सटीक और निष्पक्ष कवरेज प्रदान करने में सक्षम बनाती है। सालुम्बर से होने के नाते, वे स्थानीय मुद्दों, सामाजिक घटनाओं और जनसामान्य की आवाज़ को प्रभावी ढंग से पाठकों तक पहुंचाने का काम करती हैं। उनका लेखन तथ्यात्मक, स्पष्ट और प्रभावशाली है, जो पाठकों को खबरों के मूल अर्थ तक सीधे जोड़ता है।

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