सलूम्बर। मेवाड़ की पावन धरा सलूम्बर में सोमवार को गौ माता को राष्ट्र माता का दर्जा दिलाने की मांग को लेकर श्रद्धालुओं, गौ सेवकों और साधु-संतों ने जिला मुख्यालय पर विशाल पैदल मार्च निकाला। रैली के माध्यम से केंद्र और राज्य सरकार तक गौ संरक्षण और सुरक्षा की मांग को प्रमुखता से पहुंचाने का प्रयास किया गया।

पैदल मार्च शहर के डाल तिराहा स्थित सिद्दी धाम मंदिर से प्रारंभ हुआ। देखते ही देखते यह रैली एक बड़े जनआंदोलन का स्वरूप लेती नजर आई। इसमें बड़ी संख्या में गौ भक्त, सामाजिक कार्यकर्ता और स्थानीय नागरिक शामिल हुए। प्रतिभागियों ने हाथों में “गौ हत्या बंद करो” और “गाय को राष्ट्र माता का दर्जा दो” जैसे नारों वाली तख्तियां थाम रखी थीं। पूरे मार्ग में गूंजती नारेबाजी ने शहरवासियों का ध्यान आकर्षित किया और वातावरण गौ सेवा के समर्थन के स्वर से गुंजायमान रहा।



इस पैदल मार्च का नेतृत्व क्षेत्र श्रीं 1008 डॉ. इतवार नाथ करजी धुणी कल्याणपुर, प्रकाशनन्द महाराज, जैताना, चेतन गिरी, सराडी, ईश्वर नाथ, निर्भय मठ सेमारी, सुन्दर नाथ माताजी, कल्याणपुर, भुतनाथ, बरोड़ा, रामगिरी महाराज, शंकरान्नद भारती, ओडवाडीया, बावजी शंकर पुरी, लालु महाराज करावली, रूपलाल महाराज धावडी तथा चेतन गिरी महाराज नाकेश्वर महादेव सहित संतों ने किया। संतों की अगुवाई में निकली रैली में आध्यात्मिक वातावरण देखने को मिला।

शहर के प्रमुख मार्गों से गुजरते हुए कीर्तन के साथ रैली जिला कलेक्टर कार्यालय पहुंची। यहां संतों और गौ सेवकों ने अपनी मांगों से संबंधित विस्तृत प्रार्थना पत्र जिला कलेक्टर मुहम्मद पीपी जुनैद को सौंपा। यह प्रार्थना पत्र देश के राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, राज्यपाल और मुख्यमंत्री के नाम प्रेषित किया गया। रैली के दौरान गौ माता की जीवंत झांकी भी आकर्षण का केंद्र रही, जिसने उपस्थित लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचा।

Kalpita Bhavsar (Salumber)

Kalpita Bhavsar (Salumber)

कलपिता भवसार (सालुम्बर) प्रात:काल न्यूज़ की प्रतिष्ठित रिपोर्टर हैं, जिनका पत्रकारिता में अनुभव और निपुणता उन्हें क्षेत्रीय और राष्ट्रीय खबरों की सटीक और निष्पक्ष कवरेज प्रदान करने में सक्षम बनाती है। सालुम्बर से होने के नाते, वे स्थानीय मुद्दों, सामाजिक घटनाओं और जनसामान्य की आवाज़ को प्रभावी ढंग से पाठकों तक पहुंचाने का काम करती हैं। उनका लेखन तथ्यात्मक, स्पष्ट और प्रभावशाली है, जो पाठकों को खबरों के मूल अर्थ तक सीधे जोड़ता है।

Next Story