सलूंबर में नाबालिग से दुष्कर्म के दोषी को आजीवन कारावास, कोर्ट ने लगाया 70 हजार रुपये का जुर्माना
सलूंबर जिला एवं सत्र न्यायालय ने नाबालिग से दुष्कर्म के मामले में आरोपी मणीलाल उर्फ मनीष उर्फ भाणा को आजीवन कारावास और 70 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। न्यायालय ने पीड़िता को प्रतिकर राशि दिलाने के आदेश के साथ पीड़ित प्रतिकर योजना के तहत 3 लाख रुपये सहायता की भी अनुशंसा की।

सलूंबर। जिला एवं सत्र न्यायालय के न्यायाधीश रामेश्वर प्रसाद चौधरी ने नाबालिग बालिका से दुष्कर्म के मामले में आरोपी को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास तथा 70 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। न्यायालय ने जुर्माना राशि जमा होने पर उसे पीड़िता को प्रतिकर के रूप में प्रदान करने का भी आदेश दिया है। इसके अलावा जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, सलूंबर को पीड़ित प्रतिकर योजना के तहत पीड़िता को 3 लाख रुपये की सहायता राशि उपलब्ध कराने की अनुशंसा की गई है।
अभियोजन के अनुसार, सेमारी थाना क्षेत्र के धनकावाड़ा गांव निवासी पीड़िता के परिजनों ने 19 मार्च 2025 को रिपोर्ट दर्ज कराई थी। रिपोर्ट में बताया गया कि 13 मार्च 2025 को होली दहन के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में बालिका अपने भाई के साथ गई थी, लेकिन वह वापस घर नहीं लौटी। परिजनों ने काफी तलाश की, लेकिन उसका कोई पता नहीं चलने पर सेमारी थाने में मामला दर्ज कराया गया।
पुलिस जांच के दौरान आरोपी मणीलाल उर्फ मनीष उर्फ भाणा को गिरफ्तार किया गया। उसके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 137(2), 87, 127(3) तथा पॉक्सो अधिनियम की धारा 5/6 के तहत न्यायालय में चालान पेश किया गया।
विचारण के दौरान लोक अभियोजक रणजीत पुर्बिया ने न्यायालय के समक्ष 11 गवाहों के बयान और 31 दस्तावेजी साक्ष्य प्रस्तुत किए। मेडिकल रिपोर्ट, एफएसएल रिपोर्ट तथा अन्य साक्ष्यों के आधार पर न्यायालय ने माना कि पीड़िता नाबालिग थी और होली मेले में अपने भाई से बिछड़ जाने के बाद आरोपी उसे बहला-फुसलाकर अपने साथ ले गया। वहां उसने पीड़िता की इच्छा और सहमति के विरुद्ध दुष्कर्म किया। विरोध करने पर आरोपी ने पीड़िता को दांतों से काटकर घायल भी कर दिया।
अपने निर्णय में न्यायालय ने टिप्पणी की कि बालिकाओं के विरुद्ध इस प्रकार के अपराध समाज के लिए गंभीर चिंता का विषय हैं और ऐसे मामलों में कठोर दंड आवश्यक है। इन्हीं तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर न्यायालय ने आरोपी को दोषसिद्ध मानते हुए आजीवन कारावास एवं 70 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। साथ ही निर्देश दिया कि जुर्माना राशि जमा होने पर उसे पीड़िता को प्रतिकर के रूप में दिया जाए तथा जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, सलूंबर को पीड़ित प्रतिकर योजना के तहत 3 लाख रुपये की सहायता राशि उपलब्ध कराने की अनुशंसा की जाए।

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