सलूम्बर (प्रात:काल संवाददाता)। सलूम्बर जिले सहित संपूर्ण क्षेत्र में बुधवार को निजी दवा दुकानों के शटर पूरी तरह गिरे रहने से चिकित्सा व्यवस्था चरमरा गई। डिस्ट्रिक्ट केमिस्ट अलायंस के आह्वान पर आयोजित इस एक दिवसीय हड़ताल के कारण सुबह से ही गंभीर रूप से बीमार मरीजों और उनके तीमारदारों को जीवन रक्षक दवाओं के लिए भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। जिलेभर में मरीज और उनके परिजन एक बंद दुकान से दूसरी दुकान के चक्कर काटते नजर आए।

डिस्ट्रिक्ट केमिस्ट अलायंस के अध्यक्ष सुशील मिण्डा ने स्पष्ट किया कि यह आंदोलन केवल स्थानीय नहीं, बल्कि राष्ट्रीय स्तर का है। उन्होंने बताया कि राजस्थान केमिस्ट्स अलायंस और राष्ट्रीय संगठन 'ऑल इंडिया ऑर्गेनाइजेशन ऑफ केमिस्ट्स एंड ड्रगिस्ट्स' के संयुक्त आह्वान पर इस एक दिवसीय हड़ताल का आयोजन किया गया था। इस देशव्यापी बंद के माध्यम से भारत भर के लगभग 12 लाख 40 हजार से अधिक दवा विक्रेताओं ने केंद्र और राज्य सरकार की जनविरोधी नीतियों के खिलाफ अपना कड़ा विरोध दर्ज कराया।

बुधवार सुबह जैसे ही ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों से मरीज जिला अस्पताल और निजी क्लीनिकों में उपचार के लिए पहुंचे, उन्हें निजी मेडिकल स्टोर बंद मिले, जिससे अफरा-तफरी का माहौल पैदा हो गया। इस हड़ताल का सर्वाधिक दंश उन मरीजों को झेलना पड़ा जो हृदय रोग, मधुमेह और सांस जैसी गंभीर बीमारियों से जूझ रहे हैं और जिनकी नियमित दवाओं का सेवन अनिवार्य है। पर्चियां हाथ में लिए तीमारदार चिलचिलाती धूप में दवाइयों की तलाश में दर-दर भटकते देखे गए।

निजी दुकानों के पूरी तरह बंद रहने के बीच सरकारी चिकित्सा इंतजामों ने संकट की इस घड़ी में जनता को बड़ी राहत प्रदान की। राजकीय चिकित्सालयों के भीतर संचालित सरकारी दवाघर, जहां निशुल्क दवाएं उपलब्ध कराई जाती हैं, और प्रधानमंत्री भारतीय जनऔषधि केंद्र पूरी तरह खुले रहे। आपातकालीन स्थिति को देखते हुए मरीजों ने बड़ी संख्या में इन केंद्रों का रुख किया, जहां लंबी लाइनों में लगकर लोगों ने अपनी जरूरत की दवाएं खरीदीं। हालांकि, एकाएक भीड़ अत्यधिक बढ़ जाने के कारण इन केंद्रों पर दवाओं की मांग में अचानक हुई वृद्धि ने व्यवस्था संभालने वाले कर्मियों के लिए भी खासी मशक्कत बढ़ा दी।

Pratahkal HQ

Pratahkal HQ

Next Story