सलूंबर नगर परिषद: उपसभापति डॉ. लव व्यास 6 साल के लिए भाजपा से निष्कासित
क्रॉस वोटिंग के आरोप में निष्कासन के बाद पूर्व मंडल अध्यक्ष डॉ. व्यास ने प्रेस वार्ता कर संगठन से जांच और निष्पक्षता पर सवाल उठाए।

तस्वीर में सलूंबर उपसभापति डॉ. लव व्यास अन्य लोगों के साथ प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए।
सलूंबर। नगर परिषद चुनाव में सभापति की कुर्सी से शुरू हुई सलूंबर भाजपा की सियासी उठापटक अब निष्कासन तक पहुंच गई है। भाजपा जिला संगठन ने पूर्व नगर मंडल अध्यक्ष एवं वर्तमान उपसभापति डॉ. लव व्यास को छह साल के लिए पार्टी से निष्कासित कर दिया। निष्कासन के बाद रविवार को डॉ. व्यास ने प्रेस वार्ता कर संगठन के सामने ही कई सवाल उठाए।
डॉ. व्यास ने कहा, “भाजपा मेरे रोम-रोम में है। संगठन जब भी बुलाएगा, मैं हाजिर रहूंगा।” उन्होंने सवाल किया कि अगर क्रॉस वोटिंग हुई है तो उसकी जांच क्यों नहीं की जा रही। उनके इस सवाल के साथ निष्कासन के फैसले के बीच क्रॉस वोटिंग की जांच का मुद्दा भी सामने आ गया।
निष्कासन प्रकरण में 3 अक्टूबर की देर रात वायरल हुए पहले पत्र को लेकर भी सवाल उठे। पत्र में पत्र क्रमांक की जगह थी, लेकिन नंबर दिखाई नहीं दिया। डिस्पैच नंबर और कार्यालय का पता भी स्पष्ट नहीं था। सोशल मीडिया पर पत्र को लेकर सवाल उठने के बाद भाजपा जिलाध्यक्ष चंद्रशेखर जोशी ने सफाई दी कि भावुक कार्यकर्ता ने जल्दबाजी में पत्र वायरल कर दिया था। इसके बाद संगठन ने पत्र क्रमांक और डिस्पैच नंबर के साथ दूसरा पत्र जारी किया।
प्रेस वार्ता में डॉ. व्यास ने अपने संगठनात्मक सफर का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि उनकी शुरुआत एबीवीपी से हुई। इसके बाद विश्व हिंदू परिषद में जिला महामंत्री व जिलाध्यक्ष, संस्कार भारती में कोषाध्यक्ष, भारत विकास परिषद में दो बार शाखा अध्यक्ष, हाड़ी रानी गौरव संस्थान में सचिव-सहसचिव और भाजपा में तीन बार अध्यक्ष रहे। उन्होंने कहा, “मैंने सभी संगठनों में तन-मन-धन से सेवा की है। भाजपा मेरे रोम-रोम में है।”
डॉ. व्यास ने बताया कि भाजपा ने उन्हें वार्ड 21 से टिकट दिया था। उन्हें 400 में से 324 वोट मिले और उन्होंने 263 वोट के अंतर से जीत हासिल की। इसके बाद सभापति पद की दावेदारी भी सामने आई, लेकिन राजनीतिक परिस्थितियां उनके पक्ष में नहीं रहीं। उन्होंने सभापति चुनाव में पार्टी उम्मीदवार को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं होने का भी दावा किया।
क्रॉस वोटिंग को लेकर डॉ. व्यास ने सबसे बड़ा सवाल उठाया। उन्होंने बताया कि 16 तारीख को उन्हें कुंभलगढ़ से सलूंबर लाया गया, लेकिन पार्षदों को स्पष्ट रूप से नहीं बताया गया कि पार्टी का अधिकृत उम्मीदवार कौन है। उन्होंने संगठन से निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए कहा कि पता लगाया जाए कि किसने किसे वोट दिया और पार्षदों की घेराबंदी के दौरान आखिर कौन व्यक्ति उनके संपर्क में पहुंच रहा था। उन्होंने जरूरत पड़ने पर ऑडियो-वीडियो उपलब्ध कराने की बात भी कही।
मतदान के दिन तबीयत खराब होने के बाद डॉ. व्यास को उदयपुर ले जाया गया। इसके बावजूद अगले दिन उपसभापति चुनाव के लिए वे वापस सलूंबर पहुंचे। अंतिम समय में उनका नाम सामने आया और करीब 10.50 बजे नामांकन दाखिल हुआ। उन्हें कांग्रेस समर्थित 13 वोट मिले, जबकि भाजपा के अधिकृत प्रत्याशी अखिलेश बाहेती को 12 वोट मिले। एक वोट का यही अंतर अब भाजपा के भीतर सबसे बड़ा सियासी सवाल बन गया है।
डॉ. व्यास ने कहा कि उन्होंने योग्य उम्मीदवार को बोर्ड में भेजने के उद्देश्य से पार्टी से ऊपर उठकर फैसला लिया। यही फैसला अब उनके छह साल के निष्कासन की बड़ी वजह बन गया है।
उन्होंने कहा कि राजनीति अपनी जगह है और सलूंबर का विकास अपनी जगह। डॉ. व्यास ने सभी 25 पार्षदों से भाजपा-कांग्रेस का भेद भूलकर शहर के विकास के लिए एकजुट होने की अपील की। उन्होंने सेरिंग तालाब को हेरिटेज रूप देने, रिंग रोड के साथ नाली-लाइटिंग, फाउंटेन, चौपाटी, इंडोर स्टेडियम, तरणताल, खेल अकादमी, सरणी नदी का सीमांकन-सौंदर्यीकरण, पार्किंग, बस-टैक्सी स्टैंड और गौशालाओं में सुधार जैसे मुद्दे गिनाए।
ईडी-आईटी के ‘निशाने’ वाले सवाल पर भी डॉ. व्यास ने कहा कि निशाना किसी की ओर भी हो सकता है। अपने बारे में उन्होंने कहा, “हमारा कोई दो नंबर का काम नहीं है, ऑल इज वेल। ईश्वर जो चाहेगा वही होगा।”
निष्कासन के बाद डॉ. लव व्यास की प्रेस वार्ता ने सलूंबर भाजपा के भीतर चल रहे सियासी घटनाक्रम में क्रॉस वोटिंग, पार्टी उम्मीदवार को लेकर स्पष्टता और निष्कासन की कार्रवाई से जुड़े सवालों को सामने ला दिया है।

Kalpita Bhavsar (Salumber)
कलपिता भवसार (सालुम्बर) प्रात:काल न्यूज़ की प्रतिष्ठित रिपोर्टर हैं, जिनका पत्रकारिता में अनुभव और निपुणता उन्हें क्षेत्रीय और राष्ट्रीय खबरों की सटीक और निष्पक्ष कवरेज प्रदान करने में सक्षम बनाती है। सालुम्बर से होने के नाते, वे स्थानीय मुद्दों, सामाजिक घटनाओं और जनसामान्य की आवाज़ को प्रभावी ढंग से पाठकों तक पहुंचाने का काम करती हैं। उनका लेखन तथ्यात्मक, स्पष्ट और प्रभावशाली है, जो पाठकों को खबरों के मूल अर्थ तक सीधे जोड़ता है।
