ग्रामीण विकास विभाग में सृजित 4966 नियमित पदों के सेवा नियम शीघ्र लागू कर संविदा कार्मिकों का नियमितीकरण करने की मांग को लेकर मुख्यमंत्री के नाम विकास अधिकारी को ज्ञापन सौंपा गया। यह ज्ञापन जेटीए कृष्णवीर सिंह के नेतृत्व में वरिष्ठ सहायक हेमेंद्र पटेल को दिया गया।

ज्ञापन में बताया गया कि मनरेगा योजना के तहत पिछले लगभग 20 वर्षों से संविदा कार्मिक अल्प मानदेय पर निष्ठापूर्वक सेवाएं दे रहे हैं। नियमितीकरण की लंबी प्रतीक्षा और कम मानदेय के कारण अनेक संविदा कार्मिक आर्थिक एवं मानसिक कठिनाइयों का सामना करते हुए असमय काल का ग्रास बन चुके हैं।

ज्ञापन के अनुसार, राजस्थान कॉन्ट्रैक्चुअल हायरिंग टू सिविल पोस्ट रूल्स-2022 के नियम-20 के तहत 9 वर्ष या उससे अधिक सेवा दे चुके संविदा कार्मिकों के नियमितीकरण के लिए वित्त विभाग द्वारा ग्रामीण विकास विभाग के प्रशासनिक नियंत्रण में 4966 नियमित पद सृजित किए जा चुके हैं। इन पदों की प्रशासनिक स्वीकृति 7 मार्च 2024 को जारी की जा चुकी है। पात्र कार्मिकों के दस्तावेजों का सत्यापन भी पूरा हो चुका है तथा इन पदों के लिए बजट हेड भी निर्धारित कर दिया गया है।

ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया कि 25 अक्टूबर 2024 को वित्त विभाग द्वारा जारी एसओपी के अनुसार सभी विभागों को सेवा नियम बनाकर नियुक्तियां देने के निर्देश दिए गए थे। ग्रामीण विकास विभाग के मंत्री द्वारा भी विधानसभा में सेवा नियम बनाकर नरेगा कार्मिकों के नियमितीकरण की घोषणा की जा चुकी है। विभाग द्वारा सेवा नियमों की पत्रावली तैयार कर कार्मिक विभाग से अनुमोदन प्राप्त करने के बाद वित्त विभाग को भेज दी गई है, जहां यह पिछले चार माह से विचाराधीन है।

इसके अलावा एसएनए स्पर्श प्रणाली लागू होने के कारण संविदा कार्मिकों का मानदेय दो से तीन माह की देरी से मिलने की समस्या भी ज्ञापन में उठाई गई। समय पर मानदेय भुगतान सुनिश्चित करने की भी मांग की गई।

ज्ञापन में चेतावनी दी गई कि यदि सेवा नियमों को शीघ्र मंजूरी देकर नियमित नियुक्ति प्रक्रिया शुरू नहीं की गई तो प्रदेशभर के नरेगा कार्मिक VB-GRAM-G योजना का बहिष्कार करते हुए दो दिवसीय सामूहिक अवकाश पर रहेंगे। इसके तहत 30 जून 2026 को खाटूश्यामजी में ज्ञापन सौंपा जाएगा, जबकि 1 जुलाई 2026 को प्रातः 9 बजे मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा के निवास पर भी ज्ञापन प्रस्तुत किया जाएगा। यह मांग अब प्रदेशभर के संविदा नरेगा कार्मिकों के नियमितीकरण और लंबित सेवा नियमों को लेकर बढ़ते दबाव का महत्वपूर्ण संकेत मानी जा रही है।

Pratahkal Bureau

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