लसाड़िया। उदयपुर जिले के लसाड़िया उपखण्ड अंतर्गत ग्राम पंचायत घाटा और लालपुरा में पिछले दिनों अज्ञात वायरस के कहर ने 5 से 6 मासूम बच्चों की बलि ले ली, लेकिन प्रशासन और सरकार की संवेदनहीनता का आलम यह है कि आज तक इस जानलेवा बीमारी की असल हकीकत सामने नहीं आ पाई है। इस हृदयविदारक घटना के बावजूद न तो राजस्थान के मुख्यमंत्री ने मामले का संज्ञान लिया और न ही स्वास्थ्य मंत्री ने पीड़ित परिवारों की सुध ली। सरकारी तंत्र द्वारा की गई खानापूर्ति और धरातल पर समाधान के अभाव से उपजे जनआक्रोश के बीच गुरुवार को ग्रामीणों ने हुंकार भरी। आनंदीलाल और जगदीश मीणा के नेतृत्व में बड़ी संख्या में क्षेत्रवासियों ने उपखण्ड अधिकारी दिनेश आचार्य को मुख्यमंत्री, जिला कलेक्टर और ब्लॉक मुख्य शिक्षा अधिकारी के नाम ज्ञापन सौंपकर मृतक बच्चों के परिजनों को आर्थिक सहायता देने और क्षेत्र की जर्जर व्यवस्थाओं को सुधारने की पुरजोर मांग की।

ज्ञापन में स्पष्ट किया गया कि अज्ञात वायरल बीमारी से मासूमों की मौत के बाद राज्य सरकार ने घर-घर सर्वे कर सैंपल तो लिए, लेकिन अभी तक वायरस के वेरिएंट का खुलासा नहीं किया गया है। आदिवासी क्षेत्र में इस घातक बीमारी से हुई मौतों पर मुख्यमंत्री की ओर से कोई शोक संदेश या सकारात्मक पहल न दिखने पर ग्रामीणों ने गहरा रोष व्यक्त किया। प्रदर्शनकारियों ने लसाड़िया सीएचसी को उप जिला चिकित्सालय का दर्जा देने की मांग उठाई, क्योंकि यह ब्लॉक तीन जिलों की मध्यस्थता रखता है। वर्तमान में यहाँ चिकित्सा व्यवस्था पूरी तरह चरमराई हुई है; अस्पताल केवल एक डॉक्टर के भरोसे है और स्वीकृत 6 नर्सिंग स्टाफ में से एक को सीएमएचओ सलूंबर ने एपीओ कर रखा है। पूरे ब्लॉक में जीएनएम के 15 पद रिक्त हैं, जिन्हें तत्काल भरने की मांग की गई है। इसके अलावा ग्राम पंचायत घाटा और धामनिया में नवीन पीएचसी खोलने, धामनिया में मोबाइल टावर लगाने और घाटा पंचायत के सभी फिल्टर्स पर आरओ का पानी उपलब्ध करवाने की मांग प्रमुखता से रखी गई।

क्षेत्र की बदहाल अधोसंरचना पर प्रहार करते हुए ज्ञापन में बताया गया कि लसाड़िया से धरियावद रोड वर्तमान में पूरी तरह खस्ताहाल है, जिसके कारण एंबुलेंस या निजी वाहन समय पर अस्पताल नहीं पहुंच पाते और गंभीर मरीज रास्ते में ही दम तोड़ देते हैं। ग्रामीणों ने इस सड़क का कार्य तत्काल शुरू करने और जल जीवन मिशन के तहत हर घर तक पानी पहुंचाने की मांग की। शिक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए ग्रामीणों ने बताया कि राजकीय प्राथमिक विद्यालय कचूमरी एसआईआर में केवल दो कार्मिक कार्यरत थे, जिनमें से एक को सलूंबर लगा दिया गया है और दूसरा बीएलओ ड्यूटी पर है, जिससे स्कूल पूरी तरह भगवान भरोसे है। ज्ञापन में मांग की गई कि स्कूलों की दूरी अधिक होने के कारण उचित स्थानों पर आंगनबाड़ी केंद्र खोले जाएं ताकि नौनिहाल शिक्षा से वंचित न रहें। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने अविलंब मुआवजा और स्वास्थ्य सुविधाएं सुनिश्चित नहीं कीं, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।

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Kalpita Bhavsar (Salumber)

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कलपिता भवसार (सालुम्बर) प्रात:काल न्यूज़ की प्रतिष्ठित रिपोर्टर हैं, जिनका पत्रकारिता में अनुभव और निपुणता उन्हें क्षेत्रीय और राष्ट्रीय खबरों की सटीक और निष्पक्ष कवरेज प्रदान करने में सक्षम बनाती है। सालुम्बर से होने के नाते, वे स्थानीय मुद्दों, सामाजिक घटनाओं और जनसामान्य की आवाज़ को प्रभावी ढंग से पाठकों तक पहुंचाने का काम करती हैं। उनका लेखन तथ्यात्मक, स्पष्ट और प्रभावशाली है, जो पाठकों को खबरों के मूल अर्थ तक सीधे जोड़ता है।

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