लसाड़िया में यूजीसी कानून के विरोध में प्रदर्शन, राष्ट्रपति के नाम सौंपा ज्ञापन
सलूम्बर के लसाड़िया में सर्व समाज ने यूजीसी कानून को भेदभावपूर्ण बताते हुए इसे तत्काल निरस्त करने की मांग को लेकर एसडीएम को ज्ञापन दिया।

सलूम्बर जिले के लसाड़िया में यूजीसी कानून के विरोध में लसाड़िया उपखंड अधिकारी दिनेश आचार्य को राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपते सर्व समाज के प्रतिनिधि।
स्थान एवं आयोजन
सलूम्बर जिले के लसाडिया उपखण्ड की सर्व समाज स्वर्ण द्वारा कूण के मंशा पुर्ण हनुमान मंदिर परिसर में बैठक की गई। इसके पश्चात लसाड़िया उपखंड अधिकारी दिनेश आचार्य को राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपा गया। सर्व समाज द्वारा ज्ञापन पड़कर सुनाया गया।
विरोध का मुख्य कारण
- सर्व समाज के प्रतिनिधियों ने बताया की 13 जनवरी 2026 से लागू यूजीसी (University Grants Commission) कानून को लेकर क्षेत्र में विरोध के स्वर तेज हो गए हैं।
- प्रतिनिधिमंडल ने ज्ञापन में कहा कि वर्तमान स्वरूप में लागू यूजीसी कानून से देशभर के विश्वविद्यालयों में अध्ययनरत विद्यार्थियों के बीच असमंजस और असंतोष की स्थिति बन रही है।
नेतृत्व एवं प्रतिनिधिमंडल
श्री राष्ट्रीय राजपूत करणी सेना, श्रत्रिय महासभा, और जैन समाज के नेतृत्व में समाज के प्रतिनिधिमंडल ने राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपते हुए कानून को तत्काल प्रभाव से निरस्त करने की मांग की। ज्ञापन लसाडिया उपखंड कार्यालय में एसडीएम दिनेश आचार्य के माध्यम से भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को प्रेषित किया गया, जिसके लिए स्वर्ण समाज का प्रतिनिधिमंडल उपखंड कार्यालय पहुंचा।
सरकार पर आरोप एवं सामाजिक चिंताएं
"ज्ञापन में आरोप लगाया गया कि सरकार ऐसे “काले कानून” लाकर देश की 36 कौमों के बीच भेदभाव पैदा करने का कार्य कर रही है।"
प्रतिनिधियों ने कहा कि:
- एक ओर सरकार एकता और समरसता की बात करती है, वहीं दूसरी ओर नीतियों के माध्यम से समाज को बांटने का प्रयास किया जा रहा है।
- उन्होंने स्पष्ट किया कि सर्व समाज एक है और किसी भी प्रकार का विभाजन स्वीकार नहीं किया जाएगा।
- संगठन का कहना है कि विश्वविद्यालय केवल शिक्षा के केंद्र नहीं, बल्कि सामाजिक समरसता और समान अवसर की भावना के संवाहक होते हैं।
मूल मांग और भविष्य की चेतावनी
प्रतिनिधिमंडल ने राष्ट्रपति से राष्ट्रहित, विद्यार्थी हित एवं सामाजिक सौहार्द को ध्यान में रखते हुए यूजीसी कानून को तत्काल प्रभाव से पूर्णतः वापस लेने की मांग की।
"यदि किसी भी कानून से विद्यार्थियों के बीच भेदभाव, अविश्वास या असुरक्षा की भावना उत्पन्न होती है, तो यह उच्च शिक्षा व्यवस्था की मूल आत्मा के विपरीत है।"
प्रतिनिधिमंडल ने साथ ही चेतावनी दी कि यदि समय रहते सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो व्यापक स्तर पर लोकतांत्रिक आंदोलन की रूपरेखा तय की जाएगी।
उपस्थिति एवं संकल्प
इस दौरान स्वर्ण समाज के पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता उपस्थित रहे। संगठन ने कहा कि छात्र और समाज हित में संघर्ष निरंतर जारी रहेगा।

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