जयपुर, 10 दिसंबर। राज्यपाल श्री हरिभाऊ बागडे ने प्रवासी राजस्थानियों को मातृभूमि के प्रति अपने कर्ज का भुगतान करने और राज्य में अधिक से अधिक निवेश करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि प्रवासी राजस्थानियों का आर्थिक योगदान न केवल राज्य के सामाजिक-आर्थिक ढांचे को मजबूत करता है, बल्कि राष्ट्रीय विकास के मार्ग को भी प्रशस्त करता है। प्रवासी राजस्थानी सम्मेलन इस दृष्टि से एक महत्वपूर्ण माध्यम है, जो प्रदेश के विकास और प्रवासियों के आर्थिक सहयोग को जोड़ता है।

राज्यपाल ने राजस्थान को भक्ति और शक्ति की धरती और लक्ष्मीपुत्रों का प्रदेश बताया। उन्होंने महाकवि कन्हैयालाल सेठियाजी की प्रसिद्ध पंक्तियां "धरती धोरा री" उद्धृत करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा प्रवासी राजस्थानियों को राज्य में स्थाई वास के लिए प्रोत्साहित करने की पहल कर रहे हैं। उनकी इस पहल से प्रवासी सम्मेलन भविष्य में बड़े निवेश अवसरों की संभावनाएं प्रस्तुत करता है।

सम्मेलन में उपस्थित प्रवासियों से संवाद करते हुए श्री बागडे ने कहा कि राज्य में आने वाले निवेशकों को मानव शक्ति, भूमि और अन्य सभी सुविधाएं समयबद्ध तरीके से उपलब्ध कराई जाएंगी। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि राजस्थान अब केवल सूखा प्रदेश नहीं है, बल्कि हरा-भरा और निवेश के अनुकूल क्षेत्र बन चुका है।

राज्यपाल ने वाल्मीकि रामायण का संदर्भ देते हुए कहा कि जब भगवान श्री राम ने लंका विजय की तो लक्ष्मण ने सोने की लंका की प्रशंसा की। इसके जवाब में श्री राम ने कहा था, "जननी जन्मभूमि स्वर्गादपि गरीयसी"। इस दृष्टांत के माध्यम से उन्होंने प्रवासियों को यह संदेश दिया कि मातृभूमि का महत्व स्वर्ग से भी बड़ा है और इसे समृद्ध बनाने में उनका योगदान अनमोल है।

उन्होंने प्रवासियों से राजस्थान के विकास में हर क्षेत्र में सहयोग करने, युवाओं को रोजगार के अवसर प्रदान करने और उद्यमिता के माध्यम से राज्य की प्रगति में भागीदारी निभाने का आग्रह किया। उन्होंने प्रदेश की अपनत्वपूर्ण संस्कृति "पधारो म्हारे देश" का परिचय देते हुए कहा कि राज्य तेजी से विकास की ओर अग्रसर है और प्रवासी राजस्थानियों का स्वागत सदैव किया जाएगा।

सम्मेलन के दौरान राज्यपाल ने मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा और पंजाब के राज्यपाल श्री गुलाबचंद कटारिया के साथ राज्य में निवेश करने वाले विशिष्ट उद्यमियों को उनके योगदान के लिए सम्मानित किया। उन्होंने प्रवासी सम्मेलन पर प्रकाशित पुस्तक का लोकार्पण किया और राजस्थान पर निर्मित फिल्म का शुभारंभ भी किया। इसके अतिरिक्त, विभिन्न विभागों द्वारा प्रदर्शित राजस्थान के विकास को दर्शाती ऑडियो-वीडियो कला दीर्घा का अवलोकन कर उन्होंने कार्यक्रम का औपचारिक समापन किया।

यह प्रवासी सम्मेलन न केवल राजस्थानियों की मातृभूमि से आत्मीयता और अपनत्व को उजागर करता है, बल्कि प्रदेश में निवेश और आर्थिक विकास के नए अवसर भी खोलता है। राज्यपाल के आह्वान के माध्यम से यह स्पष्ट संदेश गया कि प्रवासी राजस्थानियों का सहयोग राज्य और राष्ट्रीय विकास में निर्णायक भूमिका निभा सकता है।

Pratahkal Bureau

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