सलूंबर। राजस्थान के नवनियुक्त जिला मुख्यालय सलूंबर में राजनीतिक पारा उस वक्त गरमा गया जब जिला कांग्रेस कमेटी ने महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के अस्तित्व को बचाने के लिए एक निर्णायक जंग का ऐलान किया। शनिवार को आयोजित एक महत्वपूर्ण प्रेस वार्ता के दौरान कांग्रेस नेताओं ने स्पष्ट किया कि केंद्र और राज्य की वर्तमान सरकारों द्वारा इस जनकल्याणकारी योजना के मूल स्वरूप और नाम के साथ की जा रही "छेड़छाड़" को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी और प्रदेश कांग्रेस कमेटी के आह्वान पर शुरू हुआ यह 45 दिवसीय 'मनरेगा बचाओ आंदोलन' न केवल एक विरोध प्रदर्शन है, बल्कि ग्रामीण गरीबों के अधिकारों की रक्षा के लिए एक व्यापक जन-अभियान का शंखनाद भी है।

प्रेस वार्ता के दौरान मंच पर प्रदेश कांग्रेस प्रभारी रामविलास राव और जिला कांग्रेस अध्यक्ष परमानंद मेहता विशेष रूप से उपस्थित रहे, जिन्होंने सरकार की नीतियों पर कड़ा प्रहार किया। प्रदेश प्रभारी रामविलास राव ने रणनीतिक रूपरेखा साझा करते हुए बताया कि 10 जनवरी से संपूर्ण राजस्थान में इस आंदोलन की शुरुआत की जा चुकी है। उन्होंने जोर देकर कहा कि मनरेगा जैसी ऐतिहासिक योजना, जिसने देश के करोड़ों परिवारों को भुखमरी से उबारा, आज राजनीतिक द्वेष का शिकार हो रही है। कांग्रेस का यह 45 दिवसीय अभियान गांव-गांव तक पहुंचकर मजदूरों को उनके कानूनी अधिकारों के प्रति जागरूक करेगा और सरकार की जनविरोधी नीतियों का पर्दाफाश करेगा।

वक्ताओं ने ऐतिहासिक संदर्भ देते हुए स्मरण कराया कि पूर्ववर्ती मनमोहन सिंह सरकार और सोनिया गांधी के दूरदर्शी मार्गदर्शन में लागू किया गया यह कानून महज एक योजना नहीं, बल्कि ग्रामीण भारत की जीवनरेखा है। इस कानून ने न केवल पलायन और शोषण पर लगाम लगाई, बल्कि हर हाथ को काम का कानूनी अधिकार देकर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाया। पंचायत स्तर पर रोजगार की उपलब्धता और सीधा बैंक खातों में भुगतान ने भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाया था, जिसे वर्तमान सत्ता पक्ष द्वारा अब कमजोर करने का प्रयास किया जा रहा है। नेताओं ने आरोप लगाया कि योजना का नाम बदलने और इसके ढांचे में तकनीकी जटिलताएं पैदा कर गरीबों को उनके हक से वंचित करने की साजिश रची जा रही है।

इस प्रेस वार्ता का समापन एक कड़े संकल्प के साथ हुआ, जिसमें नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि मनरेगा के मूल स्वरूप के साथ खिलवाड़ बंद नहीं हुआ, तो यह आंदोलन आगामी दिनों में और अधिक उग्र रूप धारण करेगा। सलूंबर जिला मुख्यालय से उठी यह आवाज अब जिले के दूर-दराज के गांवों और ढाणियों तक पहुंचेगी, जिससे यह सुनिश्चित किया जा सके कि सत्ता के गलियारों में बैठे लोग ग्रामीण मजदूरों की आवाज को अनसुना न कर सकें।

Pratahkal Bureau

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