सलूंबर के लसाडिया स्कूल में उल्लास: बाल वाटिका में गूंजी 'हैप्पी बर्थडे' की गूंज, शिक्षा और समुदाय के संगम की अनूठी मिसाल
सलूंबर के महात्मा गांधी राजकीय विद्यालय लसाडिया में 'कम्युनिटी कनेक्ट' पहल के तहत बाल वाटिका के छात्र नवाज का जन्मदिन धूमधाम से मनाया गया। प्रधानाचार्य बनवारी लाल बैरवा और प्रभारी मुश्ताक खान के नेतृत्व में हुए इस आयोजन ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के उद्देश्यों को सफल बनाते हुए स्कूल और समुदाय के बीच संबंधों को मजबूत करने की एक नई मिसाल पेश की है।

लसाडिया (सलूंबर)। सरकारी स्कूलों की बदलती तस्वीर और सामुदायिक जुड़ाव का एक भावुक कर देने वाला दृश्य आज सलूंबर जिले के लसाडिया में देखने को मिला। मौका था महात्मा गांधी राजकीय विद्यालय लसाडिया की बाल वाटिका में अध्ययनरत नन्हे छात्र नवाज के जन्मदिन का, जिसे स्कूल प्रशासन और समुदाय ने मिलकर एक उत्सव का रूप दे दिया। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के 'कम्युनिटी कनेक्ट' प्रोग्राम की भावनाओं को धरातल पर उतारते हुए आयोजित इस कार्यक्रम ने न केवल एक बच्चे के चेहरे पर मुस्कान बिखेरी, बल्कि सरकारी शिक्षा तंत्र और अभिभावकों के बीच के विश्वास को एक नई ऊंचाई प्रदान की।
विद्यालय परिसर में आयोजित इस गरिमामयी समारोह में नन्हे नवाज का जन्मदिन पूरी आत्मीयता के साथ मनाया गया। बाल वाटिका प्रभारी मुश्ताक खान ने इस पहल की गहराई पर प्रकाश डालते हुए बताया कि प्रतिमाह होने वाले ऐसे आयोजनों का उद्देश्य केवल उत्सव मनाना नहीं है, बल्कि समुदाय की जागरूकता, सहयोग और सक्रिय सहभागिता को बढ़ाना है। खान ने जोर देते हुए कहा कि जब एक अभिभावक स्कूल की गतिविधियों से भावनात्मक रूप से जुड़ता है, तो छात्र-शिक्षक संबंधों में प्रगाढ़ता आती है और यही वह आधार है जिससे हम गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के कठिन लक्ष्यों को सुगमता से प्राप्त कर सकते हैं।
इस अवसर पर विद्यालय के प्रधानाचार्य बनवारी लाल बैरवा ने अभिभावकों के साथ सीधा संवाद स्थापित किया। उन्होंने वर्तमान शैक्षणिक परिदृश्य में सामुदायिक सहभागिता की महत्ता को रेखांकित करते हुए कहा कि पूर्व प्राथमिक कक्षाओं में अध्ययनरत बच्चों को श्रेष्ठ शिक्षा और बेहतर वातावरण सुनिश्चित करने के लिए 'कम्युनिटी कनेक्ट' जैसे कार्यक्रम एक अभिनव और क्रांतिकारी पहल हैं। प्रधानाचार्य बैरवा के अनुसार, जब स्कूल और समाज एक मंच पर आते हैं, तो बालकों के भीतर उत्साह का संचार होता है और वे सीखने की प्रक्रिया में अधिक रुचि लेने लगते हैं।
यह आयोजन इस बात का जीवंत प्रमाण बना कि किस तरह छोटे-छोटे प्रयास सरकारी विद्यालयों के प्रति जनमानस की धारणा को बदल सकते हैं। स्थानीय ग्रामीणों और अभिभावकों ने भी विद्यालय की इस अनूठी पहल की सराहना की, जिसमें अनुशासन के साथ-साथ रिश्तों की गर्माहट भी महसूस की गई। अंततः, लसाडिया के इस विद्यालय ने यह संदेश दिया है कि शिक्षा केवल चार दीवारी के भीतर दी जाने वाली जानकारी नहीं है, बल्कि यह समुदाय के साथ मिलकर एक उज्ज्वल भविष्य गढ़ने का साझा संकल्प है।

Pratahkal Bureau
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