VB-GRAM-G एक्ट से मोदी सरकार ने गांवों को दी मजबूती: मान सिंह बारहठ
मान सिंह बारहठ ने पुठोल पंचायत में ग्रामीणों को VB-GRAM-G बिल के तहत 125 दिन के रोजगार और ग्राम पंचायतों के सशक्तिकरण की विस्तृत जानकारी साझा की।

पुठोल पंचायत में आयोजित कार्यक्रम के दौरान भाजपा नेता मान सिंह बारहठ मनरेगा श्रमिकों को केंद्र सरकार के नए VB-GRAM-G बिल के प्रावधानों और 125 दिन की रोजगार गारंटी के बारे में समझाते हुए।
भारतीय जनता पार्टी राजसमन्द पूर्व जिला अध्यक्ष एवं कोटा देहात जिला संगठन प्रभारी मान सिंह बारहठ ने आज पुठोल पंचायत में भाजपा कार्यकर्ताओं के साथ मनरेगा के कार्मिकों को VB-GRAM-G बिल (विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार और आजीविका मिशन – ग्रामीण) की विस्तृत जानकारी दी।
ऐतिहासिक कदम और आत्मनिर्भरता
उन्होंने वहां उपस्थित श्रमिकों को इस बिल के बारे में विस्तृत समझाते हुए बताया कि—
"यह बिल ग्रामीण भारत के विकास की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है, जो रोजगार, आजीविका और गांवों को आत्मनिर्भर बनाने की मजबूत नींव रखता है।"
नरेगा से VB-GRAM-G तक का सफर
बारहठ ने बिल की विकास यात्रा और इसके नए स्वरूप पर प्रकाश डाला:
- यह कानून मूल रूप से वर्ष 2005 में नरेगा के रूप में लागू हुआ था।
- 2009 में महात्मा गांधी का नाम देकर इसे मनरेगा किया गया।
- अब समय की आवश्यकता को समझते हुए केंद्र सरकार ने इसे और अधिक प्रभावी बनाकर VB-GRAM-G के रूप में प्रस्तुत किया है।
रोजगार गारंटी में वृद्धि और पलायन पर रोक
देश की लगभग 70 प्रतिशत आबादी गांवों में निवास करती है, ऐसे में ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार सृजन और शहरों की ओर पलायन रोकने के लिए यह बिल अत्यंत आवश्यक है। बारहठ ने मुख्य अंतर स्पष्ट करते हुए कहा कि—
"जहां मनरेगा में 100 दिन के रोजगार की गारंटी थी, वहीं VB-GRAM-G बिल में ग्रामीण परिवारों को प्रति वर्ष 125 दिन के रोजगार की गारंटी दी गई है।"
लेकिन कांग्रेस इस बिल का विरोध कर के यह भ्रम फैला रही है कि नरेगा बंद हो जाएगा, आप को इनके झांसे में नहीं आना है।
ग्राम पंचायतों को मिली नई शक्ति
बारहठ ने कहा कि इस बिल के माध्यम से ग्राम पंचायतों को अपने गांव के विकास का खाका स्वयं तैयार करने और उसे केंद्र सरकार तक पहुंचाने का अधिकार मिला है।
"यह शक्ति प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने गांव के लोगों को सौंपी है, जिससे गांव अपने विकास का स्वयं नेतृत्व कर सके, पहले जहां फैसले दिल्ली से होते थे, अब पंचायत के फीडबैक और गांव की जरूरतों के आधार पर योजनाएं बनाई जाएंगी।"
किसानों के हित में विशेष प्रावधान
किसानों के हितों की चर्चा करते हुए बारहठ ने बताया कि—
"खेती के चरम सीजन में मजदूरों की कमी न हो, इसके लिए साल में 60 दिन तक योजना को विश्राम दिया जाएगा।"
यह कदम किसानों के हित में उठाया गया है, जिस पर पहले की सरकारों ने गंभीरता से विचार नहीं किया।
उपस्थिति
इस दौरान बाहरठ के साथ निम्नलिखित जन प्रतिनिधि और कार्यकर्ता उपस्थित थे:
- नर्बदा शंकर पालीवाल (भाजपा जिला प्रवक्ता)
- प्रेम सिंह राठौड़ (पूर्व उपसरपंच)
- सुमेर सिंह (शक्ति केंद्र संयोजक)
- स्थानीय भाजपा कार्यकर्ता

Pratahkal Bureau
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