आमेट/सरदारगढ़। राजसमंद जिले का महत्वपूर्ण तहसील मुख्यालय सरदारगढ़ आज के आधुनिक दौर में भी रोडवेज सेवाओं की भारी किल्लत से जूझ रहा है। लंबे समय से उपेक्षा का शिकार यह क्षेत्र अब अपनी बुनियादी परिवहन सुविधाओं की बहाली के लिए हुंकार भर रहा है। सरदारगढ़ कस्बे सहित आसपास के एक दर्जन से अधिक गांवों के निवासियों ने राजस्थान राज्य परिवहन निगम, जयपुर के अध्यक्ष से गुहार लगाई है कि क्षेत्र को रोडवेज के नेटवर्क से जोड़ा जाए। ग्रामीणों का आरोप है कि रोडवेज कर्मियों की कथित मनमर्जी के कारण पूर्व में संचालित सेवाएं बंद कर दी गईं, जिससे आम जनता और तीर्थयात्रियों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

वर्तमान में तहसील मुख्यालय होने के बावजूद सरदारगढ़ से केवल उदयपुर-जयपुर मार्ग पर एक मात्र रोडवेज बस का संचालन हो रहा है। ग्रामीणों ने रोष व्यक्त करते हुए बताया कि वर्षों पूर्व सरदारगढ़ होकर 'बांसवाड़ा-बोरावड़' बस का नियमित संचालन होता था, लेकिन विभागीय कर्मचारियों ने अपनी सुविधा के अनुसार इस मार्ग को परिवर्तित कर दिया। अब यह बस वाया लावासरदारगढ़ के बजाय राजसमंद-केलवा होकर सीधे बोरावड़ जा रही है, जिससे सैकड़ों ग्रामीण इस सरकारी सुविधा से पूरी तरह वंचित हो गए हैं। इस प्रशासनिक अनदेखी ने स्थानीय परिवहन व्यवस्था को हाशिए पर धकेल दिया है।

इस समस्या को लेकर समाजसेवी और पूर्व प्रभारी विकास अधिकारी सत्यदेव शर्मा के नेतृत्व में ग्रामीणों ने पुरजोर मांग रखी है। ग्रामीणों का कहना है कि सरदारगढ़ से अजमेर और पुष्कर जैसे प्रमुख तीर्थ स्थलों के लिए सीधी बस सेवा समय की मांग है। उन्होंने मांग की है कि सरदारगढ़ से वाया आमेट, ताल, लसानी, देवगढ़, ब्यावर और अजमेर होते हुए पुष्कर तक रोडवेज बस शुरू की जाए। इसके साथ ही, मेवाड़ के प्रसिद्ध कृष्ण धाम श्री सांवलिया जी के लिए भी सरदारगढ़ से वाया रेलमगरा और कपासन होते हुए बस सेवा की आवश्यकता जताई गई है।

इन धार्मिक स्थलों पर प्रतिदिन क्षेत्र के सैकड़ों श्रद्धालुओं, विशेषकर वरिष्ठ नागरिकों का आवागमन रहता है। सीधी बस सेवा के अभाव में यात्रियों को निजी वाहनों या टुकड़ों में यात्रा करनी पड़ती है, जो न केवल महंगी है बल्कि बुजुर्गों के लिए कष्टदायक भी है। सरदारगढ़ की जनता ने रोडवेज के उच्चाधिकारियों से अपील की है कि जनहित और धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए इन मार्गों पर शीघ्र अति शीघ्र बसें संचालित की जाएं। यदि प्रशासन इस ओर ध्यान देता है, तो न केवल तहसील मुख्यालय की कनेक्टिविटी बेहतर होगी, बल्कि राज्य परिवहन निगम के राजस्व में भी बढ़ोतरी सुनिश्चित होगी।

Pratahkal Bureau

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