लावासरदारगढ़ की चारागाह भूमि बनी डंपिंग यार्ड, गोवंश पर टूट रही मौत की मार
लावासरदारगढ़ की आरक्षित चारागाह भूमि को पंचायत द्वारा कचरे का डंपिंग यार्ड बनाए जाने से दर्जनों गौवंश प्लास्टिक और गंदगी खाने को मजबूर हैं। प्रशासनिक लापरवाही के चलते कई नंदी बीमार होकर मर चुके हैं। ग्रामीणों ने चारागाह भूमि को अवैध डंपिंग से मुक्त कर पुनः गौ संरक्षण के लिए बहाल करने की मांग की है।

आमेट/लावासरदारगढ़। कभी जहां प्रदेश सरकार की मंशा के अनुरूप गौवंश स्वच्छंद रूप से विचरण करता था, आज वही भूमि मौत का मैदान बन चुकी है। लावासरदारगढ़ राजस्व क्षेत्र की चारागाह भूमि, जिसे वर्षों पहले गो ग्रास के लिए आरक्षित किया गया था, अब पूरी तरह कचरे के डंपिंग यार्ड में तब्दील हो चुकी है। डिंगरोल मार्ग स्थित कई बीघा गोचर भूमि पर पंचायत द्वारा लगातार कस्बे का कूड़ा डालने से यहां का मूल स्वरूप समाप्त हो गया है, और इस गंदगी में गोवंश जीवन बचाने की जद्दोजहद में लगा हुआ है।
प्रदेश में पशुपालकों के लिए सुरक्षित चराई क्षेत्र बनाने के उद्देश्य से चारागाह भूमि आरक्षित की गई थी, ताकि मवेशियों को प्राकृतिक भोजन मिल सके और वे खुले वातावरण में चर सकें। लेकिन प्रशासनिक उदासीनता ने इस उद्देश्य को ध्वस्त कर दिया। प्लास्टिक, अपशिष्ट और नगर का ठोस कचरा यहां लगातार डाला जा रहा है, जिसके कारण प्रतिदिन अनेक नंदी व गौवंश गंदगी में भोजन ढूंढने को मजबूर हैं। प्लास्टिक के सेवन और प्रदूषण के कारण कई गोवंश बीमार पड़कर दम तोड़ चुके हैं, जबकि जिम्मेदार अधिकारी स्थिति से अवगत होने के बावजूद कार्रवाई से पीछे हटे हुए हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने कई बार इस भूमि को बचाने और अवैध डंपिंग रोकने की मांग की, लेकिन किसी भी विभाग के अधिकारी या कर्मचारी ने इस ओर ध्यान नहीं दिया। बदहाल हालात इतने बिगड़ चुके हैं कि आसपास से गुजरना भी कठिन हो गया है। दूसरी ओर, पंचायत के ट्रैक्टर रोजाना कस्बे की गंदगी इसी स्थान पर डालकर स्थिति को और भयावह बना रहे हैं।
राज्य सरकार के स्पष्ट कानूनों के मुताबिक चारागाह भूमि का किसी भी प्रकार का दुरुपयोग प्रतिबंधित है, और इसकी जिम्मेदारी संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों की होती है। इसके बावजूद यहां खुलेआम नियमों का उल्लंघन जारी है, जिससे सरकारी प्रावधान और स्थानीय व्यवस्था दोनों प्रश्नों के घेरे में हैं।
गो भक्तों और ग्रामीणों ने प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप की मांग करते हुए कहा है कि इस अवैध डंपिंग यार्ड को हटाकर भूमि को पुनः गोचर क्षेत्र के रूप में बहाल किया जाए, ताकि गौ माता को वह संरक्षण और सम्मान मिल सके जिसके लिए यह भूमि आरक्षित की गई थी।
- लावासरदारगढ़ चारागाह भूमि पर कचरा डंपिंग मामलालावासरदारगढ़ गोचर भूमि अवैध डंपिंग विवादलावासरदारगढ़ में गोवंश की मौत प्लास्टिक खाने सेAmet Lawasardargarh illegal dumping on grazing landLawasardargarh cow deaths due to garbage dumpingराजसमंद लावासरदारगढ़ डिंगरोल मार्ग चारागाह संकटRajasthan grazing land misuse in Lawasardargarhगौ संरक्षण संकट लावासरदारगढ़ चारागाह नष्टillegal dumping yard on pasture land in Amet areaलावासरदारगढ़ पंचायत द्वारा कचरा डंपिंग विवाद

Pratahkal Bureau
प्रातःकाल ब्यूरो, प्रातःकाल न्यूज़ की वह समर्पित संपादकीय टीम है, जो सटीक, सामयिक और निष्पक्ष समाचार पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध है। हमारा ब्यूरो राजनीति, समाज, अर्थव्यवस्था और राष्ट्रीय मामलों में सत्यापित रिपोर्टिंग, गहन विश्लेषण और जिम्मेदार पत्रकारिता पर अपना ध्यान केंद्रित करता है।
