केलवा/शांतिनगर। भक्ति, शक्ति और मुक्ति के अद्भुत संगम के साथ शांतिनगर की धरा इन दिनों आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर है। यहाँ आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के सातवें दिन श्रद्धा का ऐसा ज्वार उमड़ा कि समूचा क्षेत्र 'जय श्री कृष्णा' के उद्घोष से गुंजायमान हो उठा। कथा व्यास निर्मल राम महाराज ने अपनी ओजस्वी वाणी से श्रद्धालुओं को जीवन के गूढ़ रहस्यों से अवगत कराते हुए कहा कि भागवत का श्रवण केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि पूर्वजन्मों के संचित पापों को भस्म करने वाली दिव्य अग्नि है। उन्होंने जोर देकर कहा कि जो मनुष्य अनजाने में भी पाप करता है, वह कर्म करते समय तो आनंदित होता है, लेकिन जब नियति का चक्र घूमता है, तो उसे वही फल रो-रोकर भुगतना पड़ता है। महाराज ने आगाह किया कि अहंकार और अधर्म का अंत सदैव विनाशकारी होता है, इसलिए मनुष्य को सदैव पाप से भयभीत रहकर धर्म के पथ पर अडिग रहना चाहिए।

कथा के दौरान भगवान श्रीकृष्ण के विवाहोत्सव के प्रसंग ने पांडाल में उत्सव का माहौल पैदा कर दिया। निर्मल राम महाराज ने श्रीकृष्ण और उनकी 16,108 रानियों के विवाह की आध्यात्मिक व्याख्या करते हुए बताया कि यह कोई सांसारिक भोग नहीं, बल्कि करुणा और धर्म की पुनर्स्थापना का अलौकिक कृत्य था। उन्होंने विस्तार से वर्णन किया कि किस प्रकार भगवान ने प्रत्येक रानी से दस पुत्रों को जन्म दिया और उन्हें श्रेष्ठ संस्कारों से दीक्षित किया, जो समाज के लिए लोककल्याण का एक कालजयी संदेश है। इसके साथ ही, बाणासुर और श्रीकृष्ण के बीच हुए भीषण युद्ध का जीवंत चित्रण करते हुए उन्होंने समझाया कि शक्ति का मद और वैभव का दुरुपयोग व्यक्ति को पतन की ओर ले जाता है। महाराज ने बाणासुर के उदाहरण से स्पष्ट किया कि अंततः विजय केवल सत्य की ही होती है।

इस दिव्य सत्संग में भक्ति की सरिता इस कदर बही कि उपस्थित जनसमूह भाव-विभोर होकर झूम उठा। इस धार्मिक अनुष्ठान में क्षेत्र के गणमान्य नागरिकों सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। कार्यक्रम में मुख्य रूप से भामाशाह नरेंद्र बोहरा, हेमराज सिंधल, नानालाल, नाथूलाल, बालू राम तेली, मांगीलाल तेली, बंसीलाल तेली, परशुराम, रतनलाल और नंदलाल तेली उपस्थित रहे। साथ ही शांताबाई, ताराबाई, कंचन देवी, राधा देवी और सुनीता सहित अनेक महिलाओं ने भी कथा श्रवण कर पुण्य लाभ अर्जित किया। संध्या बेला में महाआरती के साथ सातवें दिन की कथा का विश्राम हुआ। यह आयोजन केवल एक कथा मात्र नहीं, बल्कि समाज में शांति, प्रेम और सद्भाव के संचार का माध्यम बनकर उभरा है, जिसका प्रभाव क्षेत्र के जनमानस पर स्पष्ट रूप से परिलक्षित हो रहा है।

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