शंभूपूरा में ‘बचपन मनाओ अभियान’ ने जगाई पारंपरिक खेलों और लोरियों की खुशबू
शंभूपूरा में जतन संस्थान के बालवाड़ी केंद्र पर आयोजित ‘बचपन मनाओ अभियान’ में पारंपरिक लोरियों, लोक खेलों और रचनात्मक गतिविधियों से बच्चों और समुदाय में उत्साह और सांस्कृतिक जुड़ाव बढ़ा। यह कार्यक्रम बाल्यावस्था और सीखने की संस्कृति को पुनर्जीवित करने का महत्वपूर्ण प्रयास रहा।

शंभूपूरा, आमेट। ग्राम शंभूपूरा में जतन संस्थान द्वारा संचालित बालवाड़ी केंद्र पर आयोजित ‘बचपन मनाओ अभियान’ ने बच्चों और समुदाय दोनों में उत्साह की लहर दौड़ा दी। यह आयोजन बाल्यावस्था के महत्व को उजागर करने और पारंपरिक लोरियों एवं लोक खेलों के माध्यम से सीखने की संस्कृति को पुनर्जीवित करने के उद्देश्य से किया गया।
कार्यक्रम का शुभारंभ बुजुर्ग महिलाओं द्वारा पुराने समय की लोरियों के सामूहिक गायन से हुआ। बच्चों और अभिभावकों ने साथ मिलकर इन परंपरागत लोरियों को सीखा, जिससे गांव में एक जीवंत और सांस्कृतिक माहौल बना। जतन संस्थान के आमेट ब्लॉक कॉर्डिनेटर भारती खोईवाल, कलस्टर कॉर्डिनेटर रतन लाल और केसर गाडरी सहित अभिभावकों और गांववासियों ने सक्रिय भागीदारी की।
इस अभियान में बच्चों के लिए विभिन्न टीचिंग-लर्निंग मटेरियल जैसे रंगीन चार्ट, चित्र कार्ड, गिनती बोर्ड और पर्यावरण से जुड़े उपकरण भी तैयार किए गए और केंद्र पर प्रदर्शित किए गए। इन सामग्रियों का उद्देश्य अभिभावकों को बच्चों के साथ घर पर रचनात्मक गतिविधियों को प्रोत्साहित करना था।
कार्यक्रम का विशेष आकर्षण पारंपरिक खेलों की पुनः खोज रहा। बच्चों और बड़ों ने मिलकर ‘बचपन की दुकान’, ‘बचपन की चक्करी’, ‘सितोलिया’, ‘नार कांकरी’, ‘कंकड़ खेल’ और मिट्टी के खिलौने जैसे खेलों में भाग लिया। उम्रदराज़ लोगों ने साझा किया कि ये खेल मनोरंजन के साथ-साथ सामूहिकता, संतुलन और सीखने का माध्यम भी थे।
अंत में सभी प्रतिभागियों ने बच्चों के खेल, प्रदर्शनी और स्थानीय व्यंजनों के स्टॉल का आनंद लिया। इस अवसर पर भारती खोईवाल ने कहा कि ऐसे आयोजन बच्चों में सीखने की रुचि, रचनात्मकता और सामाजिक संबंधों को मजबूत करते हैं। गांववासियों ने भी बताया कि यह कार्यक्रम उन्हें अपने बचपन की यादों में ले गया और पूरे गांव में प्रसन्नता का माहौल बना दिया।
‘बचपन मनाओ अभियान’ ने न केवल बच्चों में खेल और शिक्षा के प्रति रुचि जगाई, बल्कि स्थानीय सांस्कृतिक विरासत और सामुदायिक जुड़ाव को भी मजबूती प्रदान की।
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Pratahkal Bureau
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