चारभुजा (राजसमंद)। गोमती से देसूरी तक फैले जोधपुर स्टेट हाईवे-58 का 27 किलोमीटर लंबा खंड आज खस्ताहाल स्थिति में यात्रियों के लिए मौत का रास्ता बन चुका है। यह मार्ग, जो प्रतिदिन हजारों वाहनों की आवाजाही का गवाह है, जगह-जगह बड़े-बड़े गड्ढों, उखड़े डामर और उड़ती धूल के बीच अपनी जर्जर हालत पर आंसू बहा रहा है। बावजूद इसके, टोल प्लाजा वाहन चालकों से पूरे शुल्क की वसूली करने में तनिक भी हिचक नहीं दिखा रहे हैं।

सोमवार को इसी मार्ग पर हुए एक गंभीर हादसे ने फिर से सड़क की दुर्दशा को उजागर कर दिया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, सड़क की उबड़-खाबड़ सतह और गहरे गड्ढों के कारण वाहन असंतुलित होकर पलट गया, जिससे एक व्यक्ति की मौत हो गई। बताया गया है कि पिछले एक माह में इसी क्षेत्र में लगभग 10 से 15 सड़क दुर्घटनाएं हो चुकी हैं, जिनमें पांच लोगों की जान जा चुकी है।

स्थानीय निवासियों ने बताया कि मार्ग पर कहीं डामरीकरण का नामोनिशान नहीं है। पूरी सड़क पर केवल टूटी कंक्रीट और उड़ी हुई मिट्टी बची है, जो हर गुजरते वाहन के साथ आसमान में धूल का गुबार उड़ाती है। आमजन का कहना है कि यह स्थिति न केवल वाहन चालकों के लिए खतरा है बल्कि पर्यावरण और स्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल प्रभाव डाल रही है।

कस्बे के नागरिकों और सामाजिक संगठनों ने सड़क निर्माण विभाग की लापरवाही पर कड़ा आक्रोश जताया है। लोगों का आरोप है कि विभाग की उदासीनता और टोल कंपनियों की मनमानी के चलते जनता “धन और जीवन दोनों की हानि” झेल रही है। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि मार्ग की तत्काल मरम्मत कर उसे सुचारू रूप से यातायात योग्य बनाया जाए।

इस बीच, सड़क की बदहाल स्थिति के बावजूद टोल वसूली का जारी रहना शासन व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है। यह सवाल अब आम नागरिकों की जुबान पर है — जब सड़कें ही नहीं बचीं, तो टोल किस बात का?

Pratahkal Bureau

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