मनोकामना सिद्ध हनुमान मंदिर में श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन
संत नन्दा दास महाराज की 24 वर्ष की धूणी शक्ति तपस्या पूर्ण होने पर आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन कृष्ण महाराज ने श्रद्धालुओं को दिव्य संदेश दिया।

मनोकामना सिद्ध हनुमान मंदिर में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन व्यासपीठ से श्रद्धालुओं को संबोधित करते चित्रकूट के युवराज कृष्ण महाराज (दाएं) और मंच पर उपस्थित अन्य साधु-संत।
नगर स्थित मनोकामना सिद्ध हनुमान मंदिर में संत नन्दा दास महाराज की 24 वर्ष की धूणी शक्ति तपस्या पूर्ण होने के उपलक्ष में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के तृतीय दिवस चित्रकूट के युवराज कृष्ण महाराज ने श्रद्धालुओं को भक्ति, ज्ञान एवं वैराग्य का दिव्य संदेश प्रदान किया। कथा के दौरान व्यासपीठ से श्रीमद्भागवत के गूढ़ एवं ज्ञानवर्धक प्रसंगों का विस्तारपूर्वक वर्णन किया गया, जिसे सुन श्रद्धालु भावविभोर हो उठे।
कथा के प्रारंभ में महाराज श्री ने विदुर एवं मैत्रेय ऋषि संवाद की महिमा का वर्णन करते हुए कहा कि जब मनुष्य संसार की मोह-माया से विचलित हो जाता है, तब संतों का सत्संग और भगवान की कथा ही जीवन को सही दिशा प्रदान करती है। उन्होंने बताया कि महात्मा विदुर ने संसार के कल्याण हेतु मैत्रेय ऋषि से सृष्टि की उत्पत्ति, जीव कल्याण तथा भगवान की भक्ति के रहस्यों के संबंध में प्रश्न किए थे। इसके पश्चात सृष्टि रचना का वर्णन करते हुए महाराज श्री ने कहा कि भगवान की इच्छा से पंच तत्व, ब्रह्मांड, देवता एवं समस्त चराचर जगत की उत्पत्ति हुई। उन्होंने कहा कि यह संपूर्ण संसार भगवान की दिव्य शक्ति का स्वरूप है तथा जीव का वास्तविक उद्देश्य भगवान की भक्ति प्राप्त करना है।
कथा के मध्य भगवान कपिलदेव एवं माता देवहुति संवाद का मार्मिक वर्णन करते हुए महाराज श्री ने कहा कि भगवान कपिलदेव ने अपनी माता को भक्ति, ज्ञान एवं वैराग्य का उपदेश देकर जीवन के वास्तविक स्वरूप का बोध कराया। उन्होंने कहा कि मनुष्य यदि भगवान के चरणों में प्रेमपूर्वक समर्पित हो जाए तो जन्म-मरण के बंधनों से मुक्त हो सकता है। कथा के दौरान श्रद्धालु भगवान के नाम संकीर्तन में झूम उठे।
महाराज श्री ने माता सती के पावन चरित्र का भावपूर्ण वर्णन करते हुए कहा कि माता सती ने भगवान शिव के सम्मान एवं पतिव्रता धर्म की रक्षा के लिए अपने प्राणों का त्याग कर सनातन संस्कृति में आदर्श नारी धर्म का संदेश दिया। इस प्रसंग को सुन श्रद्धालुओं की आंखें नम हो गईं और पूरा कथा पांडाल भक्तिमय वातावरण में डूब गया।
तत्पश्चात ध्रुव चरित्र का वर्णन करते हुए महाराज श्री ने बताया कि बालक ध्रुव ने मात्र पांच वर्ष की आयु में कठोर तपस्या कर भगवान श्रीहरि को प्रसन्न किया और अटल भक्ति के कारण ध्रुवपद प्राप्त किया। उन्होंने कहा कि यदि मनुष्य के भीतर दृढ़ निश्चय, भक्ति एवं गुरु के प्रति समर्पण हो तो वह जीवन में असंभव को भी संभव बना सकता है। ध्रुव चरित्र से बच्चों एवं युवाओं को प्रेरणा लेने का संदेश भी दिया गया।
कथा के दौरान भजन-कीर्तन एवं संगीतमय प्रस्तुतियों ने श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। श्रद्धालुओं ने कथा श्रवण कर धर्मलाभ प्राप्त किया तथा मंदिर परिसर में भक्ति की अविरल गंगा बहती रही। आयोजन समिति की ओर से श्रद्धालुओं के लिए विशेष व्यवस्थाएं की गई हैं।
अपने प्रवचन में महाराज श्री ने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि मानव जीवन को संस्कारित करने का दिव्य माध्यम है। भागवत श्रवण से मनुष्य के भीतर भक्ति, सदाचार एवं मानवता का विकास होता है।
आयोजकों ने बताया कि 23 एवं 24 मई 2026 को विष्णु महायज्ञ का आयोजन किया जाएगा। महायज्ञ प्रतिदिन प्रातः 8:00 बजे से 11:30 बजे तक तथा दोपहर 3:00 बजे से 6:30 बजे तक आयोजित होगा। वहीं 25 मई 2026 सोमवार को विष्णु महायज्ञ की पूर्णाहुति दोपहर 12:15 बजे होगी। आयोजन समिति ने श्रद्धालुओं से सीनियर सेकेंडरी स्कूल ग्राउंड स्थित यज्ञशाला में पहुंचकर महायज्ञ में भाग लेने का आग्रह किया है।

Pratahkal Bureau
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