श्रीमद्भागवत कथा के चतुर्थ दिन कैलाश नगर में श्रीकृष्ण जन्मोत्सव धूमधाम से मनाया गया। कथा वाचक प्रेम नारायण महाराज गेहूं खेड़ी ने भगवान श्रीकृष्ण की भक्ति, सत्संग, सेवा और दीनता का महत्व बताते हुए श्रद्धालुओं से अहंकार त्यागकर प्रभु की शरण में जाने का संदेश दिया। कथा के दौरान भजनों पर श्रद्धालु भाव-विभोर नजर आए।

कथा वाचक प्रेम नारायण महाराज ने कहा कि सत्संग से मन को शांति मिलने के साथ पारिवारिक सुख और परलोक के लिए भी शक्ति प्राप्त होती है। मनुष्य को समझना चाहिए कि संसार में स्थायी रूप से कोई किसी का नहीं है, भगवान ही सच्चे सहारा हैं। द्रौपदी प्रसंग का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि जब मनुष्य स्वयं को निर्बल समझकर सच्चे भाव से भगवान को पुकारता है तो प्रभु उसकी सहायता के लिए अवश्य आते हैं। भगवान भक्त के भाव को देखते हैं, इसलिए उन्हें ‘भावग्राही जनार्दन’ कहा गया है।

महाराज ने कहा कि जीवन में कथा और सत्संग के लिए समय निकालना चाहिए। आज दिया गया समय भविष्य में संस्कार और जीवन की दिशा तय करने में सहायक बनेगा। उन्होंने कहा कि मनुष्य को अपने कर्मों का फल समय आने पर प्राप्त होता है। इसलिए अच्छे संस्कारों और सेवा भाव को जीवन का आधार बनाना चाहिए।

गोपी भाव और दीनता का महत्व बताते हुए उन्होंने कहा कि भगवान की भक्ति केवल बाहरी दिखावे से नहीं, बल्कि आंखों में प्रेम और हृदय में दीनता के भाव से होती है। जीवन को सफल बनाने का सूत्र बताते हुए उन्होंने कहा कि सेवक बन जाओ, नर से नारायण बनने का मार्ग खुल जाएगा। धीरे-धीरे बर्फ की तरह अपने अहंकार को भी गलाना होगा। अहंकार सत्संग से दूर होता है और मनुष्य को सत्य का ज्ञान प्राप्त होता है।

कथा में समुद्र मंथन प्रसंग का वर्णन करते हुए महाराज ने बताया कि चौदह रत्नों में अंतिम रत्न के रूप में अमृत की प्राप्ति हुई। उन्होंने कहा कि मनुष्य को जीवन रूपी अमृत का सदुपयोग करना चाहिए और मोह-माया के चक्कर में पड़कर अवसर नहीं गंवाना चाहिए। ‘ब्रह्म ही सत्य है, माया मिथ्या है’ का संदेश देते हुए उन्होंने कहा कि यह मानव जीवन बार-बार नहीं मिलता, इसलिए भगवान की भक्ति और सेवा का अवसर नहीं गंवाना चाहिए।

महाराज ने गौसेवा का महत्व बताते हुए कहा कि गौ माता की सेवा से परिवार और समाज में सुख-शांति का वातावरण बनता है। जिस घर में गौ माता की सेवा और पालन होता है, वहां सदैव मंगल और खुशहाली बनी रहती है। उन्होंने कहा कि किसी का बुरा नहीं चाहने वाला धर्मवीर है और भगवान को कभी नहीं भूलने वाला सच्चे अर्थों में महावीर है।

श्रीकृष्ण जन्मोत्सव के अवसर पर श्रद्धालुओं ने जयकारे लगाए और भगवान श्रीकृष्ण की भक्ति में भाव-विभोर होकर उत्सव मनाया।

Bharat Kumar Rajak, Rajsamand

Bharat Kumar Rajak, Rajsamand

नाम: भरत कुमार रजक

वर्तमान पद: संवाददाता (प्रातः काल)

कार्यक्षेत्र: केलवा (राजसमंद, राजस्थान)

बीट (मुख्य विषय): शिक्षा, सोशल एक्टिविटी (सामाजिक गतिविधियां) और एजुकेशन

अनुभव: 12 वर्ष

परिचय 

भरत कुमार रजक 'प्रातः काल' समाचार पत्र में संवाददाता के रूप में कार्यरत हैं। उनका मुख्य कार्यक्षेत्र केलवा है। वह नियमित रूप से शिक्षा (एजुकेशन), शैक्षणिक व्यवस्थाओं, स्कूलों, कॉलेजों और सामाजिक गतिविधियों (सोशल एक्टिविटी) से जुड़े विषयों पर रिपोर्टिंग करते हैं।

पत्रकारिता का अनुभव (Work Experience)

भरत कुमार रजक को मीडिया और ग्राउंड रिपोर्टिंग के क्षेत्र में 12 वर्षों का लंबा अनुभव है। पिछले एक दशक से अधिक समय से वह क्षेत्र की खबरों और जनहित के मुद्दों को लगातार कवर कर रहे हैं।

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