शाहपुरा में चातुर्मास के शुभारंभ पर सिंहाड़ हनुमान जी मंदिर से भव्य शोभायात्रा एवं कलश यात्रा गाजे-बाजे के साथ निकाली गई। यह यात्रा कुमावत समाज के चारभुजा मंदिर से होते हुए शाहपुरा के उपला रामद्वारा, फौज मोहल्ला पहुंची, जिसमें नगर के अनेक श्रद्धालु शामिल हुए।



कथा वाचन के लिए पधारे अंतर्राष्ट्रीय रामस्नेही संप्रदाय के युवा विद्वान संत श्री मनसुखराम जी महाराज ने प्रथम दिवस के प्रवचन में कहा कि शोभायात्रा के दौरान सिर पर कलश धारण करने से जीवन के क्लेश दूर होते हैं। उन्होंने कहा कि जीव के दो ही सगे हैं, एक स्वयं परमात्मा और दूसरे सतगुरु महाराज। दोनों की प्राप्ति अत्यंत दुर्लभ है और उन्हें प्राप्त करने के लिए किसी न किसी देवस्थान पर संत का सानिध्य लेना पड़ता है।

संत श्री ने कहा कि जब जीवन में संत का सानिध्य प्राप्त होता है तो व्यक्ति की सभी समस्याएं दूर हो जाती हैं। इसलिए जब भी अवसर मिले, सत्संग अवश्य सुनना चाहिए। उन्होंने कहा कि परमात्मा से मिलना जितना कठिन नहीं है, उससे अधिक कठिन मनुष्य का सरल बनना है।

प्रवचन के दौरान उन्होंने मानस का उल्लेख करते हुए बताया कि भगवान से पूछा गया कि वे किसे मिलते हैं। इस पर स्वयं तुलसीदास बाबा लिखते हैं कि जिसका मन निर्मल, पवित्र, छल-कपट से रहित होता है, उसी को परमात्मा के दर्शन होते हैं। संत श्री ने कहा कि निर्मलता ही भगवान की प्राप्ति का मार्ग है और इसी विषय पर श्रद्धालुओं को मार्गदर्शन प्रदान किया।

रामद्वारा की कार्यकारिणी के सदस्यों ने बताया कि इस वर्ष चातुर्मास 25 जुलाई से 21 अक्टूबर तक रहेगा। इस अवधि में प्रतिदिन सायंकाल 7:30 बजे से सत्संग का आयोजन होगा, जिसे सुनने के लिए श्रद्धालुओं से उपस्थित रहने का आग्रह किया गया।

Pratahkal Newsroom

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