सत्तर वर्ष की दादियों ने पोते-पोतियों संग खेलकर अपने बचपन को जीवंत किया, डिंगरोल में “बचपन मनाओ अभियान” का आयोजन
डिंगरोल में जतन संस्थान द्वारा आयोजित “बचपन मनाओ अभियान” में 70 वर्ष तक की दादियों ने पोते-पोतियों के साथ खेल और लोरी उत्सव में भाग लिया। तीन दिवसीय कार्यक्रम में पेंटिंग, मिट्टी के खिलौने और पारंपरिक खेलों के माध्यम से बच्चों और अभिभावकों के बीच बचपन की यादों को जीवंत किया गया।

लावासरदारगढ़/डिंगरोल। कहते हैं कि खेल की कोई उम्र नहीं होती। यह कथन सत्य साबित हुआ जब सत्तर वर्ष तक की दादियों ने अपने पोते-पोतियों के साथ मिलकर डिंगरोल में “बचपन मनाओ, बचपन बचाओ” अभियान में भाग लिया। जतन संस्थान द्वारा आयोजित इस तीन दिवसीय कार्यक्रम में नन्हे-मुन्ने बच्चों से लेकर बुजुर्ग अभिभावक तक ने अपने बचपन की यादों को ताजा किया और भावनाओं से भरी प्रस्तुतियां दीं।
डिंगरोल गांव के आंगनवाड़ी केंद्र में आयोजित इस कार्यक्रम की शुरुआत क्लस्टर कोऑर्डिनेटर मंजू देवी द्वारा अभियान और जतन संस्थान की परियोजनाओं की जानकारी देने के साथ हुई। अभिभावकों की बैठक में बच्चों के अधिकार, उनकी जरूरतों और विकास के चरणों पर चर्चा हुई और उनके सुरक्षित व समावेशी वातावरण में पालन-पोषण को प्रोत्साहित करने के उपाय सुझाए गए।
बाल दिवस के अवसर पर आयोजित लोरी उत्सव में महिलाओं ने पारंपरिक लोरियों और गीतों की प्रस्तुति दी। सुशीला शर्मा और बसंता लोहार सहित कई प्रतिभागियों ने बच्चों को सुलाने वाली लोरियों और गीतों के माध्यम से बचपन की यादों को ताजा किया। इसके साथ ही पेंटिंग प्रतियोगिता, मिट्टी के खिलौने बनाने और विभिन्न खेल गतिविधियों जैसे चम्मच दौड़, रस्सा कस्सि, सितोलिया और बैट-बॉल का आयोजन किया गया, जिसमें बच्चों और अभिभावकों की सक्रिय भागीदारी रही।
विद्यालय के अध्यापक सुभाष चन्द्र मेनारिया और उदयसिंह चारण ने बाल दिवस और पंडित जवाहरलाल नेहरू के जीवन व योगदान पर चर्चा करते हुए बच्चों के अधिकारों और उनके समग्र विकास की महत्ता पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम में अभिभावकों को यह भी समझाया गया कि कैसे आधुनिक समय में सोशल मीडिया और मोबाइल का प्रभाव बच्चों की पारंपरिक लोरियों, कविताओं और खेलों पर पड़ रहा है और उन्हें समय देकर बच्चों के साथ जुड़ने की प्रेरणा दी गई।
तीन दिवसीय कार्यक्रम ने न केवल बच्चों के खुशहाल बचपन को पुनर्जीवित किया बल्कि अभिभावकों को भी उनके अपने बचपन के अनुभवों और यादों को साझा करने का अवसर प्रदान किया। इस प्रकार यह अभियान बच्चों और अभिभावकों के बीच सकारात्मक संवाद, खेल और सांस्कृतिक गतिविधियों के माध्यम से सशक्त पारिवारिक और सामाजिक बंधन को बढ़ावा देने में सफल रहा।
- डिंगरोल बचपन मनाओ अभियानलावासरदारगढ़ बाल दिवस कार्यक्रमबच्चों के अधिकार और खेलसत्तर वर्ष की दादियों का लोरी उत्सवबच्चों और अभिभावकों के लिए खेलजतन संस्थान बाल विकास परियोजनाडिंगरोल में पारंपरिक खेलबाल विकास कार्यक्रम राजस्थानचम्मच दौड़ और सितोलिया प्रतियोगितामिट्टी के खिलौने बनाने की गतिविधिपेंटिंग प्रतियोगिता बच्चों के लिएबाल दिवस 2025 राजस्थानपोते पोतियों के साथ दादियों की खेल गतिविधिबचपन मनाओ बचपन बचाओ कार्यक्रमबच्चों के लिए समावेशी खेल आयोजन

Mubarik Ajnabi, Rajsamand
नाम: मुबारिक-अजनबी
वर्तमान पद: प्रतिनिधि (प्रातःकाल, आमेट)
कार्यक्षेत्र: आमेट, जिला राजसमन्द (राजस्थान)
अनुभव: 25 वर्षों से पत्रकारिता का अनुभव
परिचय एवं कार्यक्षेत्र
मुबारिक-अजनबी राजस्थान के राजसमन्द जिले के आमेट तहसील क्षेत्र के अनुभवी पत्रकार हैं। वर्तमान में वह 'प्रातःकाल' के प्रतिनिधि के रूप में कार्यरत हैं। वह आमेट तहसील और उसके आसपास के ग्रामीण व शहरी क्षेत्रों से नियमित रूप से रिपोर्टिंग करते हैं।
बीट (मुख्य विषय)
- विशेष कवरेज: आमेट तहसील क्षेत्र से क्राइम (अपराध) और सांस्कृतिक खबरों की विशेष रिपोर्टिंग।
- नियमित कवरेज: स्थानीय राजनीति, प्रशासन, कानून-व्यवस्था, सरकारी विभागों की कार्यप्रणाली और जनहित से जुड़े अन्य मुद्दे।
शैक्षणिक योग्यता (Education)
एम.ए. (M.A.) - कला स्नातकोत्तर की डिग्री।
