कुम्भलगढ़ में गूंजा "नरेगा बचाओ संग्राम": योगेंद्र सिंह परमार ने भरी हुंकार, मजदूरों के हक के लिए सड़कों पर उतरा जनसैलाब
कुम्भलगढ़ में पीसीसी सचिव योगेंद्र सिंह परमार के नेतृत्व में "नरेगा बचाओ संग्राम" का आगाज हुआ। समीचा, मोरचा और गजपुर जैसी कई पंचायतों में हजारों मजदूरों और महिलाओं ने जुटकर हक की आवाज बुलंद की। परमार ने सरकार की जनविरोधी नीतियों को आड़े हाथ लेते हुए भ्रष्टाचार मुक्त पंचायत और स्थायी विकास का संकल्प लिया। जानिए कैसे यह अभियान बना मजदूरों की उम्मीद।

कुम्भलगढ़। राजसमंद जिले के ऐतिहासिक कुम्भलगढ़ की धरती पर शनिवार को एक नया संकल्प जन्म लेता दिखाई दिया। पीसीसी सचिव और कांग्रेस के प्रखर युवा नेता योगेंद्र सिंह परमार के नेतृत्व में शुरू हुए "नरेगा बचाओ संग्राम" अभियान ने न केवल प्रशासन की नींद उड़ा दी है, बल्कि ग्रामीण विकास की एक नई इबारत लिख दी है। समीचा से लेकर कालींजर तक, पहाड़ियों के बीच बसी पंचायतों में जब हजारों मजदूरों और महिलाओं की आवाजें एक साथ गूंजी, तो वह केवल एक विरोध प्रदर्शन नहीं, बल्कि अपने हक की लड़ाई का शंखनाद बन गया। योगेंद्र सिंह परमार ने इस दौरान समीचा, मोरचा, बड़गांव, गजपुर, कोयल और कालींजर ग्राम पंचायतों का सघन दौरा कर ग्रामीणों की समस्याओं को सुना और उन्हें अपने अधिकारों के प्रति सजग किया।
अभियान के दौरान जनसमूह को संबोधित करते हुए योगेंद्र सिंह परमार ने अत्यंत गंभीर लहजे में कहा कि नरेगा केवल गड्ढे खोदने का जरिया नहीं है, बल्कि यह ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। उन्होंने इस बात पर गहरा क्षोभ व्यक्त किया कि वर्तमान सरकार की नीतियों के कारण गरीब वर्ग की आर्थिक स्थिति कमजोर हो रही है और महंगाई सातवें आसमान पर है। परमार ने स्पष्ट किया कि जब तक श्रमिक को समय पर भुगतान और महिलाओं को कार्यस्थल पर उचित सम्मान व सुविधाएं नहीं मिलेंगी, तब तक कुम्भलगढ़ की खुशहाली का सपना अधूरा है। उन्होंने "गाँव का पैसा, गाँव के काम" का नारा देते हुए जोर दिया कि नरेगा के माध्यम से खेल मैदान, पक्की सड़कें और जल संरक्षण जैसे स्थायी ढांचे तैयार होने चाहिए ताकि पंचायतों का भविष्य मजबूत हो सके।
इस संग्राम में ग्रामीणों का आक्रोश और उत्साह देखते ही बनता था। स्थानीय लोगों ने वर्तमान विधायक और सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि जहाँ सत्तासीन लोग गरीबों की कमर तोड़ रहे हैं, वहीं परमार भाई धरातल पर उतरकर उनके हक की लड़ाई लड़ रहे हैं। कार्यक्रम के समापन पर हजारों की संख्या में मौजूद नरेगा कर्मियों और महिला समूहों ने एक स्वर में गगनभेदी नारा दिया— "गाँव का विकास, हमारा प्रयास; मजदूर का हक, योगेंद्र सिंह का साथ।" ग्रामीणों ने परमार को विश्वास दिलाया कि विकास की इस मुहिम में वे कंधे से कंधा मिलाकर उनके साथ चलेंगे।
इस व्यापक अभियान में संगठन की एकजुटता भी नजर आई। "मनरेगा बचाओ संग्राम" के प्रभारी सत्यनारायण बायती, केलवाड़ा मंडल अध्यक्ष हीरा सिंह चौहान, पंचायत समिति सदस्य मांगीलाल मेघवाल और युवा नेता चमन दाना ने व्यवस्थाओं की कमान संभाली। साथ ही मंडल अध्यक्ष केसर सिंह, किशन मेघवाल, सोशल मीडिया विधानसभा अध्यक्ष हरीश व्यास, हीरा, धोरण सरपंच पोकर, पूर्व सरपंच मकन सिंह, कमलेश जोशी, सुरेश सेन, मोहन सिंह, बड़गांव से विक्रम सिंह, पूर्व सरपंच हीरालाल भील, सवाराम भील और घिसा सिंह ने भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। गजपुर मंडल अध्यक्ष राम सिंह चौहान, गजपुर से हीरालाल कोठारी, हरि सिंह, कोयल सरपंच लक्ष्मण गुर्जर और रमेश जैन सहित भारी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता और मनरेगा श्रमिकों ने इस आंदोलन को ऐतिहासिक बनाया। यह अभियान कुम्भलगढ़ की राजनीति में एक बड़े बदलाव का संकेत दे रहा है, जहाँ अब मजदूर और किसान अपने हक के लिए संगठित हो चुके हैं।

Mubarik Ajnabi, Rajsamand
नाम: मुबारिक-अजनबी
वर्तमान पद: प्रतिनिधि (प्रातःकाल, आमेट)
कार्यक्षेत्र: आमेट, जिला राजसमन्द (राजस्थान)
अनुभव: 25 वर्षों से पत्रकारिता का अनुभव
परिचय एवं कार्यक्षेत्र
मुबारिक-अजनबी राजस्थान के राजसमन्द जिले के आमेट तहसील क्षेत्र के अनुभवी पत्रकार हैं। वर्तमान में वह 'प्रातःकाल' के प्रतिनिधि के रूप में कार्यरत हैं। वह आमेट तहसील और उसके आसपास के ग्रामीण व शहरी क्षेत्रों से नियमित रूप से रिपोर्टिंग करते हैं।
बीट (मुख्य विषय)
- विशेष कवरेज: आमेट तहसील क्षेत्र से क्राइम (अपराध) और सांस्कृतिक खबरों की विशेष रिपोर्टिंग।
- नियमित कवरेज: स्थानीय राजनीति, प्रशासन, कानून-व्यवस्था, सरकारी विभागों की कार्यप्रणाली और जनहित से जुड़े अन्य मुद्दे।
शैक्षणिक योग्यता (Education)
एम.ए. (M.A.) - कला स्नातकोत्तर की डिग्री।
