अरावली बचाओं अभियान: आमेट में नगरवासियों ने धरना प्रदर्शन कर एसडीएम को राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपा
आमेट में अरावली बचाओं अभियान के तहत नगरवासियों ने आधे दिन आमेट बंद रख धरना प्रदर्शन किया और राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में अरावली पर्वत श्रृंखला के संरक्षण और बड़े औद्योगिक प्रोजेक्ट्स पर प्रतिबंध की मांग की गई, ताकि पर्यावरण और आने वाली पीढ़ियों का भविष्य सुरक्षित रहे।

आमेट। अरावली बचाओं अभियान के तहत सोमवार को आमेट नगर में नगरवासियों ने स्वेच्छा से आधे दिन आमेट बंद रख धरना प्रदर्शन किया और एसडीएम कार्यालय पहुंचकर राष्ट्रपति के नाम एक ज्ञापन सौंपा। इस अवसर पर नगर के पुष्पेन्द्र जांगिड, सुरेश सिंह, प्रदीप सिंह, मनीष मेवाड़ा, प्रकाश खटीक, जयसिंह, करणसिंह, मनोज बुनकर, नूरूदीन, राज वैष्णव, दिलीप पालीवाल, राजेन्द्र सोनी, अजय सिंह, राहुल सिंह, हिम्मत खटीक सहित बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित थे।
नगरवासियों ने बस स्टैंड से लक्ष्मीबाजार, गणेश चोक, रामद्वारा होते हुए पुनः बस स्टैंड स्थित एसडीएम कार्यालय तक नारेबाजी करते हुए मार्च किया। धरना प्रदर्शन के दौरान नगरवासियों ने अपने ज्ञापन में अरावली पर्वत श्रृंखला की प्राचीन और राष्ट्रीय महत्व की भूमिका पर प्रकाश डाला। ज्ञापन में कहा गया कि अरावली केवल राजस्थान की ही नहीं, बल्कि पूरे भारत की एक महत्वपूर्ण प्राकृतिक धरोहर हैं, जो पर्यावरण संतुलन, वर्षा जल संरक्षण, भू-जल स्तर, जैव विविधता तथा मरुस्थलीकरण को रोकने में अहम भूमिका निभाती हैं।
ज्ञापन में नगरवासियों ने सरकार से अपील की कि वर्तमान में अरावली क्षेत्र को बड़े उद्योगपतियों के लिए सौंपने की योजना अत्यंत चिंताजनक है। इससे पर्यावरण को अपूरणीय क्षति के साथ-साथ आने वाली पीढ़ियों के भविष्य पर भी गंभीर संकट उत्पन्न होगा। ज्ञापन में यह भी कहा गया कि अरावली पर्वत श्रृंखला के विनाश से राजस्थान में जल संकट, बढ़ते तापमान, वन्यजीवों के आवास नष्ट होने के साथ-साथ प्राकृतिक आपदाओं की आशंकाएं और अधिक बढ़ सकती हैं।
नागरिकों ने अपने ज्ञापन में संविधान के अनुच्छेद 48A और 51A(g) का हवाला देते हुए बताया कि पर्यावरण संरक्षण राज्य और नागरिक दोनों का कर्तव्य है। उन्होंने मांग की कि अरावली क्षेत्र में खनन और बड़े औद्योगिक प्रोजेक्ट्स पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया जाए। नगरवासियों का कहना था कि उन्हें पूरा विश्वास है कि जनता की भावनाओं को ध्यान में रखते हुए सरकार जनहित और पर्यावरण संरक्षण को प्राथमिकता देते हुए अरावली पर्वत श्रृंखला को बचाने के लिए ठोस कदम उठाएगी।
इस धरना प्रदर्शन ने स्थानीय प्रशासन और नागरिकों के बीच अरावली संरक्षण को लेकर जागरूकता और सक्रिय भागीदारी को मजबूती प्रदान की है।
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Pratahkal Bureau
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