आमेर: संत रामपाल महाराज के अनुयायियों ने जिलौला में आयोजित किया आध्यात्मिक कार्यक्रम
राजसमंद के आमेट उपखंड क्षेत्र के जिलौला स्कूल में आयोजित समागम में सैकड़ों श्रद्धालुओं ने भाग लिया, जहां सामाजिक कुरीतियों को दूर करने का संकल्प दिलाया गया।

राजसमंद के आमेट उपखंड के ग्राम जिलौला स्थित राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय परिसर में रविवार को आयोजित आध्यात्मिक कार्यक्रम के दौरान संत रामपाल महाराज के सत्संग को सुनते ग्रामीण और श्रद्धालु।
आमेट (मुबारिक-अजनबी)। उपखंड क्षेत्र के ग्राम जिलौला स्थित राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय परिसर में रविवार को संत रामपाल महाराज के अनुयायियों द्वारा एक भव्य, विशाल आध्यात्मिक एवं सामाजिक जागरूकता कार्यक्रम का सफलतापूर्वक आयोजन किया गया। इस गौरवमयी कार्यक्रम में क्षेत्र के सैकड़ों श्रद्धालुओं एवं ग्रामीणों ने अत्यंत उत्साहपूर्वक भाग लिया, जिसमें महिलाओं, युवाओं एवं बुजुर्गों की बहुत बड़ी संख्या में गरिमामयी उपस्थिति दर्ज की गई। जनसैलाब की इस भारी मौजूदगी से पूरा विद्यालय परिसर पूर्णतः भक्तिमय वातावरण में सराबोर हो गया और चारों ओर एक अलौकिक ऊर्जा का संचार देखने को मिला।
कार्यक्रम के दौरान वहां स्थापित विशाल एलईडी स्क्रीन के माध्यम से संत रामपाल जी महाराज का विशेष सत्संग प्रसारित किया गया। इस दिव्य सत्संग में संत रामपाल जी महाराज ने पवित्र कुरान शरीफ, श्रीमद्भगवद्गीता, वेद, बाइबल तथा अन्य पवित्र धर्मग्रंथों के अकाट्य प्रमाणों के आधार पर गूढ़ आध्यात्मिक ज्ञान का विस्तार से वर्णन किया। उन्होंने वैश्विक समाज को उद्बोधित करते हुए स्पष्ट रूप से बताया कि सभी धर्मों के पवित्र ग्रंथ सदैव मानव कल्याण और सच्ची भक्ति का ही संदेश देते हैं। सच्चे सतगुरु से नामदीक्षा लेकर मर्यादा में रहकर निष्कपट भक्ति करने से ही मनुष्य जीवन सफल बन सकता है तथा मोक्ष की परम प्राप्ति संभव है।
इस विशाल समागम में वर्तमान समय में समाज में फैली विभिन्न कुरीतियों जैसे नशाखोरी, दहेज प्रथा, भ्रूण हत्या, जाति-पाति के भेदभाव एवं तमाम सामाजिक बुराइयों को जड़ से समाप्त करने का पुरजोर आह्वान किया गया। संत रामपाल जी महाराज के निष्ठावान अनुयायियों ने वहां उपस्थित समस्त लोगों को नशा मुक्त भारत एवं दहेज मुक्त भारत बनाने का सामूहिक संकल्प दिलाया। उन्होंने इस बात पर विशेष प्रकाश डाला कि संत रामपाल जी महाराज के अनुयायी समाज में एक अनूठी मिसाल पेश करते हुए न तो कभी दहेज लेते हैं और न ही दहेज देते हैं, तथा वे सभी प्रकार के जानलेवा नशों से पूर्णतः दूर रहते हैं।
विद्यालय परिसर में इस अवसर पर एक विशेष आध्यात्मिक पुस्तक प्रदर्शनी भी लगाई गई, जो समस्त आगंतुकों के लिए मुख्य आकर्षण का केंद्र बनी रही। इस प्रदर्शनी में संत रामपाल जी महाराज द्वारा गहन शोध के बाद लिखित विभिन्न आध्यात्मिक पुस्तकों का भव्य प्रदर्शन किया गया था, जहाँ श्रद्धालुओं ने पुस्तकों का अत्यंत बारीकी से अवलोकन कर अमूल्य आध्यात्मिक ज्ञान प्राप्त किया। वहां उपस्थित सेवादारों ने पूरी मुस्तैदी के साथ लोगों को इन अनमोल पुस्तकों एवं सत्संग के माध्यम से दैनिक जीवन में मिलने वाले उत्कृष्ट आध्यात्मिक लाभों की विस्तृत जानकारी प्रदान की।
कार्यक्रम में उपस्थित प्रबुद्ध श्रोताओं ने पुरजोर शब्दों में कहा कि वर्तमान समय में आधुनिक समाज को आध्यात्मिकता के साथ-साथ उच्च नैतिक मूल्यों की भी महती आवश्यकता है। संत रामपाल जी महाराज के इन प्रेरणादायी सत्संगों के माध्यम से आमजन में सद्भावना, आपसी भाईचारा, मानवता और नैतिक जीवन जीने की वास्तविक प्रेरणा मिल रही है, जिससे वर्तमान समाज में अत्यंत सकारात्मक परिवर्तन साफ तौर पर देखने को मिल रहे हैं।
इस दौरान कार्यक्रम में उपस्थित तमाम ग्रामीणों ने इस प्रकार के अनूठे आध्यात्मिक एवं सामाजिक जागरूकता कार्यक्रमों की मुक्त कंठ से भूरि-भूरि सराहना की। उन्होंने कहा कि ऐसे उच्च स्तरीय आयोजनों से ग्रामीण व शहरी क्षेत्रों के समाज में वैचारिक जागरूकता बढ़ती है तथा दिशाहीन हो रहे युवाओं को एक सही और मर्यादित दिशा मिलती है। कार्यक्रम के गरिमापूर्ण समापन पर सभी उपस्थित श्रद्धालुओं ने सामूहिक रूप से विश्व शांति, सामाजिक सद्भाव एवं संपूर्ण मानव कल्याण की मंगल प्रार्थना की। इस ऐतिहासिक अवसर पर संत रामपाल महाराज के अनुयायी एवं स्थानीय सेवादार बहुत बड़ी संख्या में उपस्थित रहे तथा उन्होंने संपूर्ण व्यवस्थाओं को संभालते हुए इस भव्य कार्यक्रम के सफल आयोजन में अपना अमूल्य योगदान दिया।

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