RSS शताब्दी वर्ष: रेलमगरा में आयोजित प्रबुद्ध जन गोष्ठी में राष्ट्र निर्माण का संकल्प
संघ के प्रांत शारीरिक प्रमुख डॉ. भारत भूषण ने कुरज में हिन्दुत्व दर्शन और सामाजिक समरसता के माध्यम से सशक्त भारत के निर्माण पर बल दिया।

रेलमगरा | राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में रेलमगरा खंड द्वारा कुरज स्थित माहेश्वरी भवन में आयोजित ‘प्रमुख जन गोष्ठी’ ने वैचारिक मंथन के साथ राष्ट्र निर्माण का नया संकल्प प्रस्तुत किया। मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित संघ के प्रांत शारीरिक प्रमुख डॉ. भारत भूषण ने प्रबुद्धजनों को संबोधित करते हुए स्पष्ट किया कि भारत का विचार वैश्विक पटल पर सदैव श्रेष्ठ रहा है, किंतु वर्तमान समय की मांग है कि इस विचार को हम अपने आचरण में उतारें। उन्होंने राष्ट्र की आत्मा और हिन्दुत्व की पहचान को रेखांकित करते हुए कहा कि गत सौ वर्षों की संघ यात्रा दैनिक शाखाओं, सेवा कार्यों और सामाजिक पहलों के माध्यम से समाज के अंतिम छोर तक पहुंचने का एक मौन और निष्काम प्रयास रही है।
डॉ. भूषण ने अपने ओजस्वी उद्बोधन में "माता भूमिः पुत्रो अहं पृथिव्याः" के मूल मंत्र का स्मरण कराते हुए कहा कि हिन्दू दर्शन में संपूर्ण विश्व को एक परिवार मानने और सर्वे भवन्तु सुखिनः की मंगलकामना का महान विचार समाहित है। उन्होंने आगाह किया कि आज जब विश्व समुदाय पर्यावरण संकट, आतंकवाद और विस्तारवादी दृष्टिकोण से त्रस्त है, तब विश्व कल्याण के लिए हिन्दुत्व दर्शन पर आधारित सशक्त भारत का उदय अनिवार्य है। उन्होंने समाज में परिवर्तन लाने हेतु कुछ परिवारों को आदर्श मॉडल के रूप में विकसित करने की आवश्यकता पर बल दिया, ताकि श्रेष्ठ विचारों के अनुरूप श्रेष्ठ आचरण समाज की मुख्यधारा बन सके। भविष्य की कार्ययोजना पर चर्चा करते हुए उन्होंने युवा वर्ग को सकारात्मक सामाजिक कार्यों से जोड़ने, सामाजिक समरसता को सुदृढ़ करने, परिवार संस्था को मजबूती प्रदान करने और पर्यावरण संरक्षण में प्रत्येक नागरिक की सक्रिय भागीदारी का आह्वान किया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता मंच पर उपस्थित रेलमगरा खंड के संघचालक जगदीश चंद्र शर्मा ने की। गोष्ठी में शिक्षाविद, उद्योगपति, न्यायिक अधिकारी, धार्मिक प्रतिनिधि, कला एवं क्रीड़ा जगत के प्रबुद्धजन और समाज के विभिन्न वर्गों के प्रतिनिधियों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की। आयोजन का विधिवत शुभारंभ अतिथियों द्वारा भारत माता के चित्र पर पुष्पांजलि और राष्ट्रगीत के साथ हुआ। औपचारिक परिचय और स्वागत के पश्चात उपस्थित जनसमूह ने संवाद के माध्यम से समाज में अपेक्षित परिवर्तनों पर अपने विचार साझा किए। आयोजकों ने स्पष्ट किया कि इस गोष्ठी का मूल उद्देश्य संघ की शताब्दी यात्रा के अनुभवों को साझा करते हुए भविष्य की राष्ट्रीय दिशा पर गहन विमर्श करना है। राष्ट्रगान के सामूहिक गान के साथ इस गरिमामय कार्यक्रम का समापन हुआ, जिसने समाज को भेदभाव से ऊपर उठकर एकसूत्र में पिरोने का संदेश दिया।

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