आमेट। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ जिला आमेट के सरदारगढ़ खण्ड द्वारा संघ शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में आयोजित ‘प्रमुख जन गोष्ठी’ में भारत के गौरवशाली इतिहास और जीवन मूल्यों पर गहन चिंतन किया गया। राजनंदिनी वाटिका सरदारगढ़ में आयोजित इस गरिमामयी कार्यक्रम के मुख्य वक्ता राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के विभाग प्रचारक हरिशंकर रहे, जबकि अध्यक्षता सरदारगढ़ खंड के माननीय खण्ड संघचालक फतेहलाल माली ने की। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्य वक्ता हरिशंकर ने स्पष्ट किया कि भारत से प्रेम करने वाला और अपनी भारतीय पहचान पर गर्व करने वाला हर व्यक्ति हिन्दू है, चाहे उसकी उपासना-पद्धति कोई भी क्यों न हो। उन्होंने जोर देकर कहा कि हिन्दू शब्द केवल एक धार्मिक परिभाषा नहीं, बल्कि हजारों वर्षों की सांस्कृतिक निरंतरता से निर्मित एक सभ्यतागत पहचान है। विभाग प्रचारक ने ऐतिहासिक संदर्भ देते हुए कहा कि संघ स्थापना के समय ही डॉ. हेडगेवार ने यह उद्घोष कर दिया था कि भारत हिन्दू राष्ट्र है क्योंकि इसकी सभ्यतागत आत्मा स्वयं इसे अभिव्यक्त करती है; वास्तव में भारत और हिन्दू एक-दूसरे के पर्याय हैं।

संघ की मूल दर्शन-व्यवस्था की व्याख्या करते हुए उन्होंने कहा कि संघ की स्थापना किसी का विरोध या नुकसान करने के लिए नहीं, अपितु व्यक्ति-निर्माण और भारत को विश्वगुरु बनाने की दिशा में समाज को संगठित करने हेतु हुई है। उन्होंने भारतीय संस्कृति में त्याग और समर्पण की महत्ता को मां पन्नाधाय के बलिदान, झांसी की रानी लक्ष्मीबाई के शौर्य और अहिल्याबाई होल्कर द्वारा किए गए मंदिर निर्माण के उदाहरणों से रेखांकित किया। साथ ही, भगवान राम और लक्ष्मण के जीवन से भाई-भाई के प्रेम, माता-पिता के प्रति समर्पण, गुरु के प्रति श्रद्धा और देश के लिए सर्वस्व अर्पण की प्रेरणा साझा की। हरिशंकर ने महापुरुष डॉ. भीमराव अंबेडकर और डॉ. हेडगेवार के जीवन चरित्र पर प्रकाश डालते हुए प्रबुद्धजनों से आग्रह किया कि वे पूर्वाग्रहों के आधार पर राय बनाने के बजाय संघ को समझने के लिए शाखा में जाएं, क्योंकि भारत को एक सूत्र में पिरोने की कार्यपद्धति ही संघ है।

वक्ता ने 'पंच परिवर्तन' के अंतर्गत सामाजिक समरसता, कुटुंब प्रबोधन, नागरिक कर्तव्य, स्वबोध और पर्यावरण संरक्षण के महत्व को विस्तार से समझाया। उन्होंने परिवार व्यवस्था को समाज की 'रीढ़ की हड्डी' बताते हुए कुटुंब प्रबोधन पर बल दिया और कहा कि हर भारतीय परिवार को अपने पूर्वजों की वीरगाथाएं याद रखनी चाहिए ताकि नई पीढ़ी में राष्ट्रीय उत्तरदायित्व की भावना जागृत हो। जनसांख्यिकीय चुनौतियों पर सचेत करते हुए उन्होंने अवैध घुसपैठ, संतुलित जनसंख्या-नीति की आवश्यकता और विभाजनकारी धार्मिक परिवर्तन के प्रयासों के प्रति सजग रहने का आह्वान किया। साथ ही, युवाओं को सोशल मीडिया के विवेकपूर्ण उपयोग की सलाह दी। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि जिला सहकारी विभाग के कैलाश चंद्र शर्मा ने संघ की रचनात्मक भूमिका की सराहना की। कार्यक्रम का शुभारंभ भारत माता के चित्र पर पुष्पांजलि और राष्ट्रगीत से हुआ, जिसमें स्वयंसेवक, शिक्षाविद और विभिन्न वर्गों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे। समापन राष्ट्रगान और सामूहिक भोज के साथ हुआ, जो समाज की एकजुटता का परिचायक बना।

Mubarik Ajnabi, Rajsamand

Mubarik Ajnabi, Rajsamand

नाम: मुबारिक-अजनबी

वर्तमान पद: प्रतिनिधि (प्रातःकाल, आमेट)

कार्यक्षेत्र: आमेट, जिला राजसमन्द (राजस्थान)

अनुभव: 25 वर्षों से पत्रकारिता का अनुभव

परिचय एवं कार्यक्षेत्र 

मुबारिक-अजनबी राजस्थान के राजसमन्द जिले के आमेट तहसील क्षेत्र के अनुभवी पत्रकार हैं। वर्तमान में वह 'प्रातःकाल' के प्रतिनिधि के रूप में कार्यरत हैं। वह आमेट तहसील और उसके आसपास के ग्रामीण व शहरी क्षेत्रों से नियमित रूप से रिपोर्टिंग करते हैं।

बीट (मुख्य विषय)

  • विशेष कवरेज: आमेट तहसील क्षेत्र से क्राइम (अपराध) और सांस्कृतिक खबरों की विशेष रिपोर्टिंग।
  • नियमित कवरेज: स्थानीय राजनीति, प्रशासन, कानून-व्यवस्था, सरकारी विभागों की कार्यप्रणाली और जनहित से जुड़े अन्य मुद्दे।

शैक्षणिक योग्यता (Education)

एम.ए. (M.A.) - कला स्नातकोत्तर की डिग्री।

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