राजसमंद में हुंकार: निजी स्कूलों ने कसी कमर, 30 जनवरी को जिला मुख्यालय पर होगा महाआंदोलन
राजसमंद में निजी विद्यालय संगठन ने 30 जनवरी के महा-प्रदर्शन को लेकर कमर कस ली है। डॉ. गिरिश पालीवाल और लाल सिंह झाला के नेतृत्व में जिले भर में 'डोर-टू-डोर' संपर्क कर संचालकों और शिक्षकों को लामबंद किया गया। शिक्षाकुल और प्राईवेट स्कूल फेडरेशन के समर्थन से यह आंदोलन अब एक बड़ी करवट लेने को तैयार है। जानिए क्या है पूरी तैयारी।

राजसमंद। शिक्षा के क्षेत्र में अपनी मांगों को लेकर मुखर होता निजी विद्यालय संगठन अब आर-पार की लड़ाई के मूड में नजर आ रहा है। आगामी 30 जनवरी को जिला मुख्यालय पर आयोजित होने वाले विशाल धरने और प्रदर्शन को ऐतिहासिक बनाने के लिए संगठन ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। इसी कड़ी में आज जिला मुख्यालय के विद्यालयों में 'डोर-टू-डोर' जनसंपर्क अभियान चलाकर हुंकार भरी गई, जिसने शहर के शैक्षणिक गलियारों में हलचल तेज कर दी है।
अभियान का नेतृत्व कर रहे जिला सचिव डॉ. गिरिश पालीवाल के मार्गदर्शन में टीम ने शहर के प्रत्येक निजी विद्यालय का दौरा किया। इस दौरान संचालकों और शिक्षकों से रूबरू होते हुए आंदोलन के उद्देश्यों को साझा किया गया और उनसे सक्रिय भागीदारी का आह्वान किया गया। जनसंपर्क के दौरान विद्यालयों से मिल रहे भारी समर्थन ने संगठन के उत्साह को दोगुना कर दिया है। क्षेत्र के विद्यालय संचालकों ने न केवल इस मुहिम को अपना समर्थन दिया, बल्कि यह विश्वास भी दिलाया कि 30 जनवरी को बड़ी संख्या में शिक्षक और संचालक सड़कों पर उतरकर अपनी एकजुटता का परिचय देंगे।
इस सघन संपर्क अभियान में संगठन की एकजुटता साफ दिखाई दी। टीम में जिला संयोजक व संरक्षक लाल सिंह झाला, राजसमंद ब्लॉक अध्यक्ष यशवंत शर्मा, जिला संगठन मंत्री शिवशंकर पुर्बिया, और जिला वरिष्ठ उपाध्यक्ष जवानसिंह देवड़ा ने सक्रिय भूमिका निभाई। इनके साथ ही खमनोर ब्लॉक कोषाध्यक्ष दिलीप जोशी, कैलाश शर्मा, उदयलाल टांक और देवेंद्र गर्ग ने भी कंधे से कंधा मिलाकर विद्यालयों में जनसंपर्क किया और व्यवस्थाओं को लेकर चर्चा की।
रणनीति को और मजबूती देने के लिए संगठन के पदाधिकारियों ने 'प्राईवेट स्कूल फेडरेशन राजस्थान' एवं 'शिक्षाकुल राजसमंद' के संरक्षक डॉ. महेंद्र कर्णावट से विशेष मुलाकात की। डॉ. कर्णावट ने आंदोलन की प्रासंगिकता को समझते हुए अपना पूर्ण सहयोग देने की सहमति प्रदान की है। अनुभवी नेतृत्व और युवा जोश के इस समन्वय ने आगामी प्रदर्शन को लेकर प्रशासन की चिंताएं भी बढ़ा दी हैं। यह आंदोलन केवल एक प्रदर्शन मात्र नहीं, बल्कि निजी शिक्षण संस्थानों के अस्तित्व और उनके अधिकारों की रक्षा के लिए एक बड़ा कदम माना जा रहा है, जिसका प्रभाव आने वाले दिनों में जिले की शिक्षा व्यवस्था और नीतिगत निर्णयों पर स्पष्ट रूप से देखने को मिल सकता है।

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