सेवंत्री पंचायत के कसार गांव में आयोजित होने वाले 26वें भव्य शिविर में देश भर से शामिल होंगे ब्राह्मण बटुक, अब तक 15 हजार से अधिक ले चुके हैं दीक्षा।

राजसमन्द/चारभुजा। पहाड़ियों की सुरम्य वादियों में बसे चारभुजा निकटवर्ती सेवंत्री पंचायत के कसार गांव में वैदिक सनातन परंपरा को जीवंत करने की तैयारियां पूर्ण हो चुकी हैं। बरसों पूर्व से वैदिक कर्मकांडी ब्राह्मणों की पावन कर्मभूमि रहे इस छोटे से गांव में आगामी 21 मई से 26वां भव्य 15 दिवसीय संस्कार शिविर प्रारंभ होने जा रहा है। पिछले 25 वर्षों से निरंतर आयोजित हो रहे इस ऐतिहासिक शिविर में पूरे भारतवर्ष से ब्राह्मण बटुक वैदिक ज्ञान और सनातन संस्कारों के अर्जन के लिए कसार की धरा पर जुटेंगे।

संस्थान के अध्यक्ष पंडित उमेश द्विवेदी के कुशल नेतृत्व में आयोजित हो रहे इस विशाल अनुष्ठान को लेकर तैयारियों को अंतिम रूप दे दिया गया है। संस्थान के महामंत्री पंडित जितेंद्र शर्मा ने शिविर की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए बताया कि विगत 25 वर्षों के सफर में अब तक लगभग 15 से 20 हजार बटुक यहाँ से उच्च स्तरीय वैदिक ज्ञान प्राप्त कर चुके हैं। ये दीक्षित बटुक वर्तमान में अपने-अपने गृह क्षेत्रों में पूर्ण विधि-विधान से कर्मकांड संपन्न कराकर अपनी आजीविका का गरिमापूर्ण संचालन कर रहे हैं।

इस पुनीत कार्य में पिछले 25 वर्षों से नि:स्वार्थ भाव से अपनी अनवरत सेवाएं देने वाले समर्पित विद्वानों की टोली इस बार भी पूरी ऊर्जा के साथ जुटी हुई है। पंडित गोविंद पालीवाल, राजेश दवे, घनश्याम पालीवाल, भारत पानेरी, प्रशांत व्यास, मनोज शर्मा, राजेश शर्मा एवं प्रभु प्रकाश पालीवाल पुष्कर सहित संस्थान से जुड़े कई ऐसे वरिष्ठ जन हैं, जो आगामी 15 दिनों तक अपने गृह क्षेत्र व सांसारिक व्यस्तताओं को पूरी तरह छोड़कर अपनी इस कर्मभूमि पर सेवा देने के लिए उपस्थित रहेंगे। इसके साथ ही, स्थानीय स्तर पर व्यवस्थाओं को चाक-चौबंद करने के लिए पंडित देव प्रकाश पालीवाल, ओम प्रकाश तथा हरि ओम सहित संस्थान के तमाम सेवादार तन-मन-धन से तैयारियों में जुटे हुए हैं।

यह भव्य आयोजन माँ पराम्बा भगवती वाराही माँ एवं श्री रूप चतुर्भुज नाथ की असीम अनुकम्पा के साथ-साथ सूरजकुण्ड धाम के अवधेश चैतन्य जी महाराज एवं महामण्डलेश्वर मौनी बाबा रामदास के दिव्य आशीर्वाद और समाज के विभिन्न आयामों की पावन अनुप्रेरणा से संपन्न हो रहा है। संस्थान प्रबंधन ने आधिकारिक तौर पर सूचित किया है कि शिविर में प्रवेश के लिए इच्छुक शिक्षार्थियों के आवेदन 20 एवं 21 मई को सीधे गुरुकुल स्थल पर ही ऑफलाइन माध्यम से स्वीकार किए जाएंगे। कसार की वादियों में आयोजित होने वाला यह अनूठा शिविर न केवल ब्राह्मण बटुकों के जीवन को संस्कारित करेगा, बल्कि आधुनिक युग में लुप्त होती जा रही हमारी समृद्ध वैदिक और गुरुकुल परंपरा के संरक्षण में मील का पत्थर साबित होगा।

Updated On 18 May 2026 5:26 PM IST
Pratahkal Newsroom

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