राजसमंद: कसार गांव में 26वें वैदिक संस्कार शिविर का हुआ भव्य समापन
राजसमंद के कसार गांव में 15 दिनों से जारी वैदिक शिविर का समापन हो गया, जिसमें स्थानीय विधायक सुरेंद्र सिंह राठौड़ ने स्थाई वेद विद्यालय शुरू करने की घोषणा की।

राजसमंद के कसार गांव में आयोजित 26वें वैदिक संस्कार शिविर के समापन समारोह के मंच पर (बाएं से दाएं) भाजपा जिला अध्यक्ष जगदीश पालीवाल, विधायक सुरेंद्र सिंह राठौड़, महामंडलेश्वर मौनी रामदास महाराज (माइक पर), संघ विभाग प्रचारक हरि सिंह, मुख्य वक्ता फतेहचंद सामसुखा और भामाशाह चंद्रशेखर पुरोहित उपस्थित रहे।
राजसमंद/चारभुजा। चारभुजा के निकटवर्ती दो कृष्णा धर्मों के बीच गोमती नदी तट के उद्गम स्थल पर बसे ऋषियों की तपोभूमि और ब्राह्मणों के छोटे से गांव कसार में पिछले 15 दिनों से जारी वेदों की गूंज शुक्रवार को थम गई। वैदिक मंत्रोच्चार के बीच संतों और प्रबुद्ध अतिथियों के सानिध्य में 26वें वैदिक संस्कार शिविर का भव्य समापन हुआ। पिछले पखवाड़े भर से इस पावन भूमि का कण-कण वैदिक ऋचाओं से गुंजायमान हो रहा था, जो समापन सत्र में चरम पर पहुंच गया।
समापन समारोह में विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित पूर्व सिंचाई राज्य मंत्री एवं वर्तमान विधायक सुरेंद्र सिंह राठौड़ ने कसार भूमि के गौरवशाली इतिहास को रेखांकित करते हुए एक ऐतिहासिक प्रसंग साझा किया। उन्होंने कहा कि जब कुंभलगढ़ का किला नहीं बन रहा था, तब मारवाड़ क्षेत्र से विद्वान ब्राह्मणों को कुंभलगढ़ आमंत्रित किया गया था। वहां विद्वानों द्वारा हवन-यज्ञ संपन्न करने के बाद ही कुंभलगढ़ का किला तैयार हो सका था। उस समय महाराणा प्रताप ने ब्राह्मणों को दान-दक्षिणा देने के लिए कहा था कि 'मेरे पास (तत्काल) कुछ नहीं है, मैं ब्राह्मणों को यह कसार गांव दान में देता हूं।' तभी से यह भूमि ऋषि-मुनियों की तपोभूमि के रूप में विख्यात है, जहां सदियों से वैदिक कर्मकांड अनवरत चल रहे हैं।
विधायक राठौड़ ने संस्थान के आधार स्तंभ आचार्य स्वर्गीय पंडित कन्हैयालाल द्विवेदी के योगदान को याद करते हुए कहा कि उनके द्वारा रोपे गए बीज की बदौलत आज यह गुरुकुल श्रृंगी ऋषि की पहाड़ी पर मजबूती से स्थापित है। उन्होंने मंच से प्रतिबद्धता जताते हुए कहा कि वे इस गुरुकुल संस्थान के लिए सरकार की हर एक जनकल्याणकारी योजना का लाभ दिलाने का पूरा प्रयास करेंगे। राठौड़ ने वादा किया कि जल्द से जल्द इस गुरुकुल में स्थाई वेद विद्यालय प्रारंभ करवाया जाएगा और एक ज्योतिष कार्यालय भी खोला जाएगा। उन्होंने हुंकार भरते हुए कहा कि अब हम एक-दो नहीं, बल्कि पूरे ग्यारह के समान मजबूत हैं, इसलिए हम पीछे नहीं हटेंगे और इस संस्थान को नई ऊंचाइयों तक ले जाना हमारी पहली प्राथमिकता रहेगी।
कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ अतिथियों एवं भामाशाहों द्वारा वैदिक मंगलाचरण एवं दीप प्रज्वलन के साथ किया गया। समापन सत्र में मुख्य अतिथि के रूप में भामाशाह चंद्रशेखर पुरोहित (चंदू भाई बड़ा भानुजा) उपस्थित रहे। वहीं विशिष्ट अतिथियों में रोकड़िया हनुमान धाम के महामंडलेश्वर मौनी रामदास महाराज, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के विभाग प्रचारक हरि सिंह, पंडित पदम कुमार शर्मा, गोटू पालीवाल, पूर्व प्रधान कमल जोशी, कुंभलगढ़ उपखंड अधिकारी साक्षी पुरी तथा चारभुजा तहसीलदार तोलाराम देवासी शामिल हुए। समारोह के मुख्य वक्ता राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के चालक फतेहचंद सामसुखा रहे। कार्यक्रम की शुरुआत में स्वागत उद्बोधन शशीकांत दीक्षित द्वारा दिया गया।
शिविर के दौरान और समापन पर बटुकों द्वारा उच्च स्वर में स्वस्तिवाचन, रुद्राष्टाध्यायी, गीता का पाठ, भद्र सूक्त, श्री सूक्त तथा शांति पाठ का सस्वर वाचन किया गया, जिससे पूरा परिसर आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर हो उठा। समारोह में पधारे समस्त अतिथियों का आत्मीय स्वागत सत्कार पंडित उमेश द्विवेदी, जितेंद्र शर्मा, निलेश व्यास, प्रशांत व्यास और राजेश दवे सहित अन्य पदाधिकारियों द्वारा किया गया। इस दौरान रोकड़िया हनुमान धाम के महामंडलेश्वर मौनी रामदास महाराज, मुख्य वक्ता फतेहचंद सामसुखा, पदम कुमार, चंद्रप्रकाश पालीवाल (चंदू भाई), हरि सिंह और कैलाश शर्मा ने भी संबोधित करते हुए बटुकों को संस्कारवान बनने की सीख दी। कार्यक्रम की अध्यक्षता संस्थान के अध्यक्ष पंडित उमेश द्विवेदी द्वारा की गई, जबकि अंत में उपस्थित सभी अतिथियों का आभार प्रदर्शन अरुण मिश्रा द्वारा किया गया।
इस भावुक क्षण में संस्थान को पुनर्जीवित करने वाले स्वर्गीय पंडित कन्हैयालाल द्विवेदी तथा गुरुकुल के नींव का पत्थर बनकर इस तपोभूमि पर अपना पसीना बहाने वाले सेवंती के पूर्व सरपंच स्वर्गीय विकास दवे को नमन किया गया। वक्ताओं ने कहा कि निस्वार्थ भाव से तन, मन और धन सब कुछ न्योछावर करने वाले स्वर्गीय विकास दवे की यह पुण्य यात्रा सदा बनी रहेगी, ऐसी कामना हर एक भामाशाह ने की। समारोह में भाजपा जिला अध्यक्ष जगदीश पालीवाल, जिला महामंत्री महेंद्र सिंह, किशन पंचोली, आईटी सेल के प्रभु गुर्जर, संपत पालीवाल, रामू पालीवाल, दौलत पालीवाल, हुकुम पालीवाल, गोविंद पालीवाल, दुर्गा शंकर द्विवेदी, गौरव बोहरा सहित बटुकों के माता-पिता व अभिभावक बड़ी संख्या में मौजूद रहे।
समारोह के दौरान पिछले 10 वर्षों से नियमित और निस्वार्थ भाव से गुरुकुल में अपनी तन-मन से सेवाएं दे रहे संस्थान से जुड़े लगभग 31 विद्वान गुरुजनों का विशेष सम्मान किया गया। इनमें पंडित भरत पानेरी, प्रभु प्रकाश, गोविंद पालीवाल, प्रशांत व्यास, पंकज व्यास, हेमंत शर्मा, श्रवण शर्मा, निलेश व्यास, राजेश शर्मा, मनोज शर्मा, देव प्रकाश पालीवाल, घनश्याम पालीवाल, राजेश दवे, मुकेश दवे, भूपेंद्र दवे तथा परमानंद दवे सहित कई विद्वान शामिल थे। मंच का सफल संचालन योगेश त्रिवेदी, योगेश पालीवाल एवं शशीकांत दीक्षित द्वारा संयुक्त रूप से किया गया। 26वें वैदिक संस्कार शिविर के विधिवत समापन के पश्चात संस्थान द्वारा सभी अतिथियों, अभिभावकों एवं बटुकों को सुरुचिपूर्ण सामूहिक प्रीतिभोज (भोजन) करवाया गया।

Pratahkal Bureau
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