राजसमंद। नए भारत के निर्माण में ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई संजीवनी देने के संकल्प के साथ 'विकसित भारत-रोज़गार एवं आजीविका गारंटी मिशन (ग्रामीण) अधिनियम 2025' यानी 'वी.बी.जी. राम जी' कानून अब धरातल पर उतरने को तैयार है। राजसमंद जिले के प्रभारी मंत्री और प्रदेश के उप मुख्यमंत्री डॉ. प्रेमचंद बैरवा ने सोमवार शाम कुंभलगढ़ उपखंड के चारभुजा-गढ़बोर में आयोजित एक भव्य रात्रि चौपाल को संबोधित करते हुए इस कानून को ग्रामीण भारत के लिए 'आय, सम्मान और भविष्य की त्रिवेणी' करार दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह केवल एक वैधानिक दस्तावेज नहीं, बल्कि भ्रष्टाचार मुक्त और पारदर्शी व्यवस्था के माध्यम से हर गरीब के हाथ को काम और हर चेहरे पर मुस्कान लाने की मोदी सरकार की एक ऐतिहासिक गारंटी है।

रात्रि चौपाल के दौरान मंच पर कुंभलगढ़ विधायक एवं पूर्व मंत्री सुरेन्द्र सिंह राठौड़, जिला कलक्टर अरुण कुमार हसीजा, अतिरिक्त जिला कलेक्टर नरेश बुनकर, जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी बृजमोहन बैरवा तथा उपखंड अधिकारी साक्षी पूरी की गरिमामयी उपस्थिति रही। डॉ. बैरवा ने अपने संबोधन में मनरेगा के पुराने ढांचे की कमियों पर कड़ा प्रहार करते हुए कहा कि 2005 में लागू उस कानून की अवधारणा भले ही जनहित में रही हो, लेकिन कालान्तर में वह भ्रष्टाचार और फर्जी मस्टररोल की भेंट चढ़ गया। उन्होंने कहा कि आज जब भारत दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन चुका है, तब पुराने ढर्रे के बजाय डिजिटल युग की जरूरतों के अनुरूप 'वी.बी.जी. राम जी' जैसा सशक्त कानून समय की मांग है।





इस नवीन कानून की बारीकियों पर प्रकाश डालते हुए उप मुख्यमंत्री ने बताया कि 16 दिसंबर 2025 को केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री द्वारा संसद में पेश और 21 दिसंबर को राष्ट्रपति की स्वीकृति पा चुका यह अधिनियम अब प्रत्येक ग्रामीण परिवार को वर्ष में न्यूनतम 125 दिन के रोजगार की वैधानिक गारंटी देता है। यह पुरानी व्यवस्था से 25 प्रतिशत अधिक है, जो राजस्थान जैसे राज्यों में ग्रामीण पलायन को रोकने में मील का पत्थर साबित होगा। सबसे महत्वपूर्ण बदलाव कृषि क्षेत्र के हितों को ध्यान में रखकर किया गया है, जिसके तहत बुवाई और कटाई के समय राज्यों को 60 दिनों का 'अस्थायी विराम' देने का अधिकार होगा ताकि खेतों में श्रमिकों की कमी न हो और विकास कार्यों का सामंजस्य बना रहे।

पारदर्शिता के मामले में डॉ. बैरवा ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि अब बायोमेट्रिक प्रणाली से हाजिरी लगेगी और सामाजिक लेखा परीक्षा के माध्यम से भ्रष्टाचार की हर जड़ को काट दिया जाएगा। उन्होंने आश्वासन दिया कि श्रमिकों को 15 दिनों के भीतर भुगतान सुनिश्चित किया जाएगा और विलंब की स्थिति में उन्हें मुआवजे का हक होगा। यदि 15 दिन में काम नहीं मिला, तो बेरोजगारी भत्ता देना अनिवार्य होगा। ग्राम पंचायत और ग्राम सभा को इस कानून की धुरी बताते हुए उन्होंने कहा कि स्थानीय आवश्यकता के अनुसार जल संरक्षण और स्थायी परिसंपत्तियों का निर्माण अब गांवों की अपनी योजना से होगा। कार्यक्रम के अंत में विधायक सुरेन्द्र सिंह राठौड़ ने क्षेत्रवासियों को नवीन पंचायत समिति की बधाई देते हुए चारभुजा क्षेत्र के सर्वांगीण विकास का भरोसा दिलाया। यह आयोजन न केवल एक सरकारी संवाद था, बल्कि ग्रामीण स्वावलंबन की दिशा में एक नए युग का शंखनाद बनकर उभरा।

Pratahkal Bureau

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