राजसमंद।

एक ओर परिवहन विभाग सड़क सुरक्षा को लेकर बड़े-बड़े दावे करता नजर आ रहा है, वहीं दूसरी ओर राजसमंद परिवहन विभाग खुद गंभीर सवालों के घेरे में खड़ा हो गया है। जिले में परिवहन कार्यालय का संचालन अब नियमों से नहीं, बल्कि दलालों के भरोसे होता दिखाई दे रहा है।


दोहरा रवैया: नाकों पर सख्ती, दफ्तर में ढिलाई

  • परिवहन विभाग के नाकों पर आमजन और वाहन चालकों से सख़्ती से नियमों का पालन करवाया जा रहा है।
  • वहां चालान काटे जा रहे हैं और सड़क सुरक्षा का हवाला दिया जा रहा है।
  • लेकिन इसी विभाग के ऑफिस में ड्राइविंग ट्रायल के बिना ही लाइसेंस जारी किए जाने की चर्चाएं आम हो चुकी हैं।

बिना ट्रायल लाइसेंस का खेल

स्थानीय सूत्रों के अनुसार, लाइसेंस बनवाने आए आवेदकों को सीधे दलालों के पास भेजा जाता है। "तय रकम देने के बाद बिना ट्रायल, बिना नियमों की जांच-पड़ताल के लाइसेंस थमा दिया जाता है।" हैरानी की बात यह है कि यह सब कुछ विभागीय अधिकारियों की जानकारी में होने के बावजूद खुलेआम चल रहा है।

अब हालात ऐसे बन गए हैं कि परिवहन विभाग का ऑफिस दलालों का अड्डा बनता जा रहा है। विभागीय अधिकारी मानो इन दलालों पर ही निर्भर हो गए हों।


सड़क सुरक्षा पर उठते गंभीर सवाल

नियोमों की धज्जियां उड़ाने वाला यही सिस्टम आगे चलकर सड़क हादसों का कारण बन सकता है, लेकिन जिम्मेदारों को इसकी कोई चिंता नहीं दिख रही। सवाल यह भी उठता है कि जब बिना ट्रायल के लाइसेंस दिए जा रहे हैं, तो नाकों पर की जा रही सख़्ती का आखिर मतलब क्या है? क्या सड़क सुरक्षा सिर्फ दिखावे तक सीमित रह गई है?

अब जरूरत है कि उच्च अधिकारी और परिवहन मुख्यालय इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराएं, ताकि दलाल राज पर अंकुश लगे और नियमों का सही मायने में पालन हो सके।

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