सनवाड़ के नवनिर्मित चारभुजा मंदिर में पांच दिवसीय प्राण-प्रतिष्ठा महोत्सव शुरू
राजसमन्द के सनवाड़ गांव में भव्य कलश यात्रा के साथ धार्मिक अनुष्ठान का आगाज हुआ, 14 मई को मुख्य समारोह में होगी प्रतिमा की प्राण-प्रतिष्ठा।

राजसमन्द के सनवाड़ गांव में चारभुजा मंदिर प्राण-प्रतिष्ठा महोत्सव के दौरान भगवान की पालकी को कंधों पर उठाकर शोभायात्रा निकालते कुमावत समाज के वरिष्ठजन और श्रद्धालु।
राजसमन्द। जिला मुख्यालय के निकटवर्ती सनवाड़ गांव में नवनिर्मित चारभुजा मंदिर पर आयोजित पांच दिवसीय प्राण-प्रतिष्ठा महोत्सव का शुभारंभ रविवार को अपार जनसमूह की उपस्थिति में भव्य कलश यात्रा के साथ हुआ। हजारों धर्मप्रेमियों की सहभागिता ने पहले ही दिन पूरे क्षेत्र के वातावरण को भक्तिमय और आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर कर दिया। स्थानीय कुमावत समाज एवं समस्त ग्रामवासियों के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस महोत्सव को लेकर ग्रामीणों में भारी उत्साह देखा जा रहा है।
कलश यात्रा का शुभारंभ सुबह फोरलेन स्थित रामदेव चौराहा के खेड़ापति बालाजी मंदिर से हुआ, जहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु एकत्रित हुए। पवित्र जल से पूरित कलशों के विधिवत पूजन के पश्चात गाजे-बाजे के साथ शोभायात्रा रवाना हुई। यात्रा के अग्रभाग में डीजे पर 'म्हारा सांवरिया सरकार ने घणी रे खम्मा', 'बन्नो म्हारो चारभुजा रो नाथ बन्नी म्हारी तुलसा लाडली', 'फूलड़ा ले आ रे मालीड़ा म्हारे घर आवेला भगवान' और 'थे काला पण घणा रूपाला सा मंडफिया वाला श्याम' जैसे कर्णप्रिय भजनों पर युवा थिरकते नजर आए। उनके पीछे पारंपरिक चूनड़ी परिधानों में सजी सैकड़ों महिलाएं और बालिकाएं सिर पर मंगल कलश धारण कर मंगल गीतों का गायन करती चल रही थीं।
शोभायात्रा में भगवान चतुर्भुज पूरी शानो-शौकत के साथ पालकी में विराजित थे, जिन्हें श्रद्धालु कंधों पर उठाकर सेवा धराते हुए चल रहे थे। महोत्सव समिति के अध्यक्ष जगदीशचन्द्र पालड़िया, बालकृष्ण पालड़िया, शंकर लाल अडाणिया, शम्भू लाल धनारिया, पन्नालाल धनारिया, लक्ष्मी लाल सिरोठा, भैरूलाल पालड़िया, बंशीलाल पालड़िया सहित समाज के वरिष्ठजन और युवा पारंपरिक मेवाड़ी पोशाक में हरिनाम संकीर्तन व प्रभु के जयकारे लगाते हुए आकर्षण का केंद्र बने रहे। सेवाली मोड़, राजनगर फव्वारा सर्कल और सनवाड़ चौराहा होते हुए गुजरी इस यात्रा का ग्रामीणों ने पुष्पवर्षा कर आत्मीय स्वागत किया। विशेष रूप से सनवाड़ चौराहा पर जेसीबी के माध्यम से की गई पुष्पवृष्टि श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण रही।
धार्मिक क्रियाओं के क्रम में यज्ञाचार्य पंडित जयप्रकाश श्रोत्रिय के निर्देशन में वैदिक शैली से निर्मित यज्ञशाला में मंडप प्रवेश, मंडप पूजन और अन्नाधिवास की विधियां पूर्ण की गईं। महोत्सव समिति अध्यक्ष जगदीशचन्द्र पालड़िया ने आगामी कार्यक्रमों की जानकारी देते हुए बताया कि सोमवार से आगामी तीन दिनों तक सुबह 7:30 से 12:30 बजे तक एवं दोपहर 2:30 से शाम 6:00 बजे तक यज्ञ अनुष्ठान निरंतर जारी रहेगा। मंगलवार और बुधवार को विशाल भजन संध्याओं का आयोजन होगा, जबकि महोत्सव का चरम और मुख्य प्राण-प्रतिष्ठा समारोह 14 मई को आयोजित किया जाएगा। इस आयोजन ने सनवाड़ और आसपास के क्षेत्र में आस्था का नया ज्वार पैदा कर दिया है।

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