साकेत साहित्य संस्थान की मासिक संगोष्ठी में साहित्यकारों और कलाकारों का सम्मान
राजसमंद में साकेत साहित्य संस्थान की अगस्त मासिक संगोष्ठी में साहित्यकारों ने रचनाओं का वाचन किया। फिल्म निर्देशक हारून रशीद, निर्माता महिपाल पूनमिया सहित साहित्यकारों और कलाकारों का सम्मान भी किया गया।

तस्वीर में राजसमंद के जिला सूचना केंद्र में आयोजित साकेत साहित्य संस्थान की मासिक साहित्य संगोष्ठी के दौरान उपस्थित साहित्यकार, कलाकार और अतिथि नजर आ रहे हैं।
राजसमंद में साकेत साहित्य संस्थान की अगस्त माह की मासिक साहित्य संगोष्ठी 22 अगस्त को जिला सूचना केन्द्र में आयोजित हुई। कार्यक्रम में जिलेभर से आए साहित्यकारों ने अपनी रचनाओं का वाचन किया। इस दौरान साहित्यकारों, कलाकारों और जिला स्तर पर स्वतंत्रता दिवस पर सम्मानित सदस्यों का भी सम्मान किया गया।
गोष्ठी के मुख्य अतिथि फिल्म निर्देशक और लेखक हारून रशीद रहे। हारून रशीद ने क्राइम पेट्रोल, सावधान इंडिया, आहट और सीआईडी जैसे टीवी सीरियल में लेखन और निर्देशन किया है। उनके साथ फिल्म निर्माता महिपाल पूनमिया भी मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता वीणा वैष्णव ने की।
गोष्ठी में अध्यक्ष वीणा वैष्णव, उपाध्यक्ष नारायण सिंह राव, महासचिव कमल अग्रवाल, ममता खटीक, डॉ. सम्पतलाल रेगर, राधेश्याम राणा, राधेश्याम शर्मा, हरीश कुमार सालवी, लक्ष्मी नारायण पालीवाल, गायड़ सिंह चुण्डावत, रविराज सिंह चुण्डावत, ओम प्रकाश कीर, चतुर कोठारी, रोशनलाल गर्ग, रतनलाल नागरची, गणपत चपलोत, छगनलाल प्रजापत, भावना पालीवाल, सुरेश कुमार धोबी, चंद्र शेखर नारलाई, ज्योत्सना पोखरना, डॉ. उषा शर्मा, राकेश टांक और कमलेश जोशी सहित अन्य सदस्य उपस्थित रहे।
रचनाओं के वाचन के क्रम में डॉ. सम्पत लाल रेगर ने ‘आज का रावण’, ‘सनम हरजाई’, ज्योत्सना पोखरना ने ‘कीमत जल के बूंदों की कब समझेंगे’, भावना पालीवाल ने ‘कंचनवन फिर कांतिमान है’, राधेश्याम शर्मा ने ‘युवा आंदोलनों में भ्रमित न हों’, चंद्रशेखर नारलाई ने ‘मानवीयता को मध्य नज़र रख’, राधेश्याम राणा ने ‘सावन में झूला झूले रे’, वीणा वैष्णव ने ‘मीत कुछ ही भले, ना भीड़ चाहिए’, नारायण सिंह राव ने ‘बड़े लोग वाकई बड़े होते हैं’, लक्ष्मी नारायण पालीवाल ने ‘नारायण सिंह राव एक व्यक्तित्व’, परितोष पालीवाल ने ‘जिसको तुमने लिफ्ट, वही चुराए पर्स’, चतुर कोठारी ने ‘मैं स्वतंत्र देश का स्वछंद नागरिक हूँ’, छगनलाल प्रजापत ने एक हास्य रचना, कमलेश जोशी ने ‘कैमरे पर शर्माने वाली लड़कियां’, डॉ. उषा शर्मा ने ‘जीत सत्य की होती है’ और डॉ. रतन लाल नंगारची ने बाल विवाह विषय पर कविता प्रस्तुत की।
इसी दौरान जाह्नवी कला परिषद् से जुड़े सदस्यों और हाल ही में जिला स्तर पर स्वतंत्रता दिवस पर सम्मानित सदस्यों को भी साकेत साहित्य संस्थान की ओर से सम्मानित किया गया। सम्मानित होने वालों में फिल्म निर्देशक हारून रशीद, फिल्म निर्माता महिपाल पूनमिया, जाह्नवी कला परिषद् के अध्यक्ष मनोज पोरवाड़, डॉ. जगदीश जीनगर, महेन्द्र कुमावत, कुमार दिनेश, सुरेश रजक और सुरेश भाट शामिल रहे।
अगस्त माह की साकेत की गोष्ठी में साहित्यधर्मी स्वजन का भी बहुमान किया गया। इसमें दिनेश श्रीमाली, नारायण सिंह राव, राकेश टांक, गायड सिंह चुंडावत, हरीश कुमार सालवी, राधेश्याम शर्मा, रघुवीर दास वैष्णव और चंद्रशेखर शर्मा नारलाई का बहुमान किया गया।
कार्यक्रम की समस्त जानकारी मीडिया प्रभारी अन्नू राठौड़ रुद्रांजली ने दी। अंत में अध्यक्ष वीणा वैष्णव और उपाध्यक्ष नारायण सिंह राव ने सभी का आभार व्यक्त किया।

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