राजसमंद। राजसमंद के परिवहन विभाग में भ्रष्टाचार अब बंद कमरों से निकलकर सरेआम सड़कों और दफ्तरों के कंप्यूटर तक जा पहुंचा है। प्रातःकाल डिजिटल द्वारा किए गए एक गोपनीय स्टिंग ऑपरेशन ने विभाग की कार्यशैली की कलई खोलकर रख दी है, जहां जिम्मेदार कर्मचारी मूकदर्शक बने हुए हैं और दलाल पूरे सिस्टम को अपनी उंगलियों पर नचा रहे हैं।

इस स्टिंग ऑपरेशन के दौरान जो दृश्य कैमरे में कैद हुए, वे बेहद चौंकाने वाले हैं। विभाग के कर्मचारी दिनेश किलोलिया की कुर्सी पर बैठकर एक दलाल बेखौफ होकर सरकारी कंप्यूटर पर विभागीय कार्य निपटा रहा था। जैसे ही कैमरे की मौजूदगी का आभास हुआ, दफ्तर में हड़कंप मच गया। कर्मचारी दिनेश किलोलिया आनन-फानन में उस दलाल को बाहर लेकर निकल गए, जिससे स्पष्ट प्रतीत होता है कि वे इस कृत्य पर पर्दा डालने का प्रयास कर रहे थे।

जब इस गंभीर अनियमितता पर दिनेश किलोलिया से प्रत्यक्ष सवाल किया गया, तो उन्होंने मामले को रफा-दफा करने के अंदाज में इसे हल्का दिखाने की कोशिश की। किलोलिया का तर्क था कि वह व्यक्ति उनका ड्राइवर है और केवल कंप्यूटर चालू कर रहा था। हालांकि, यह स्पष्टीकरण कई अनुत्तरित प्रश्न खड़े करता है कि क्या अब सरकारी मशीनरी और संवेदनशील डेटा को संभालने के लिए निजी ड्राइवरों या दलालों की सहायता ली जा रही है?

विभागीय सूत्रों के अनुसार, परिवहन विभाग में दलालों का नेटवर्क इस कदर अपनी जड़ें जमा चुका है कि आम जनता के लिए सीधे तौर पर काम करवाना लगभग असंभव हो गया है। साधारण नागरिकों को नियमों की पेचीदगियों में उलझाकर परेशान किया जाता है, जबकि दलालों के माध्यम से आने वाली फाइलें चंद मिनटों में स्वीकृत हो जाती हैं। यह स्थिति सीधे तौर पर गहरी मिलीभगत और संस्थागत भ्रष्टाचार की ओर इशारा करती है।

मामले के तूल पकड़ने पर जब विभागीय उच्चाधिकारियों से संपर्क किया गया, तो उन्होंने रूटीन जवाब देते हुए मामले की "जांच" कर कार्रवाई करने का आश्वासन दिया। परंतु, जब साक्ष्य के रूप में वीडियो फुटेज उपलब्ध है, तब यह बड़ा सवाल उठता है कि क्या यह जांच केवल लीपापोती का साधन बनेगी या वास्तव में दोषियों पर गाज गिरेगी? राजसमंद परिवहन विभाग की यह तस्वीर सरकारी तंत्र की शुचिता पर एक बड़ा प्रश्नचिह्न लगाती है।

Pratahkal HQ

Pratahkal HQ

Next Story